जब कानून के रखवाले नहीं करेंगे अपना काम , तो जानिए क्या होगा उनका अंजाम ?

एक अरसे पहले इन्टरनेट पर दो पुलिस वालो का आपस में लड़ता हुआ विडियो वायरल हो गया था, तहकीक के बाद पता चला के आपसी इख्तेलाफ़ (मतभेद) के चलते उनमे लडाई हुई ,.
मुझे बताइए ? इनके साथ डिपार्टमेंट ने क्या किया होगा ?

जी हा आपने बिलकुल सही ख्याल किया, उन दोनों ससपेंड कर दिया गया,
“जिन्हें कानून की हिफाज़त करने और लोगो को कानून मनवाने के लिए चुना गया वोही लोग अपनी जिम्मेदारी भूलकर आपस में लडाई झगडा करेंगे तो क्या कानून को ऐसे लोगो की जरुरत होगी ?” नहीं ना ! इनका तो सस्पेण्ड होना लाज़मी है, और इनकी पोस्ट भी किसी और को दी गयी होगी,.

यही मिसाल आज मुसलमानों की है, अल्लाह ने आलमी अमन का कानून अपने बन्दों तक पोहचाने के लिए बाज़ बन्दों को माँ के पेट से ही पुलिसवाला (यानी मुस्लमान) पैदा किया, अब वो मुस्लमान अपनी जिम्मेदारी छोड़कर, इंसानियत को अमन के दींन का पैगाम (कुरान और नबी सलाल्लाहू अलाही वसल्लम की सुन्नत) लोगो को बताना छोड़कर आपस में दुनियापरस्ती के वास्ते लडायी झगडे करने लगेंगे तो क्या अल्लाह इनकी पकड़ नहीं करेगा ? क्या अल्लाह इन्हें इबरतनाक सजा नहीं देगा ?

इसी बात को अल्लाह तआला ने कुरआन में फ़रमाया और कहा,
“के तुम्हे दूसरी कौम से बदल दूंगा अगर काम नहीं करोगे तो”
– (सुरह मोहम्मद: 38)

इस आयत में काम से मुराद अल्लाह के दीन की दावत का काम है, और बेशक अल्लाह ने अपना वादा पूरा किया, और ज़माने ने इसकी मिसाले भी देखी के – कैसे वो लोग जो एक अरसे तक इस्लाम से गाफिल या इस्लाम के खिलाफ थे लेकिन अल्लाह ने जब उन्हें कुरान पढने की तौफीक दी तो आज वो इस्लाम के पैगाम को दुनिया भर तक पोहचाने की जिम्मेदारी अदा करते नज़र आ रहे है,. कनाडा के ईसाई प्रचारक डॉ.गैरी मिलर से लेकर नीदरलैंड के इस्लाम विरोधी डच राजनेता अनार्ड वॉन डूर्न, और फ्रांस के डॉ मौरिस बुकाय से लेकर अमेरिका के ईसाई पादरी यूसुफ एस्टीज तक इन सब ने सिर्फ इस्लाम ही नहीं अपनाया बल्कि आज वो इस्लाम को आलमी सतह तक पोहचाने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहे है, 

जब मुस्लमान खानदान में पैदा होने वाले अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझते तब अल्लाह ऐसे लोगो को तैयार करता है जिनके बारे में हमने गुमांन भी नहीं किया होगा,. यक़ीनन अल्लाह के लिए कोई छोटा बड़ा नहीं, अल्लाह को तो वही बन्दे पसंद है जो सबसे ज्यादा उस से डरते और अच्छे नेक काम करते है, तो हमे भी इसपर गौर करना चाहिए के आज हम जिस मुसीबत में है कही वो हमारी ही शरारत तो नहीं ? कही इसकी वजह हमारा अपनी जिम्मेदारियो से दूर भागना तो नहीं ?

*बहरहाल हमे चाहिये के इस अमन के दींन का तारुफ़ हम खुद भी हासिल करे, और इसे लोगो में आम करने की जिम्मेदारी भी निभाए,  और अगर हमने ऐसा नहीं किया तो बहरहाल कुरआन में ऐसे बेशुमार वाकियात मौजूद है जिन्होंने अल्लाह के हुक्म की खिलाफवर्जी की और हलाक हो गए ,..

याद रहे इस्लाम सबके लिए है, और अब इसे सब तक पोहचाना मुसलमानों का भी उतना ही जिम्मा है जितना अल्लाह के तमाम नबि और सहांबा और नेक बन्दों का जिम्मा था,.

अल्लाह से दुआ है के! अल्लाह हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक दे ,.. हमे इस दीन का आलमी पैगाम उसके बन्दों तक पोहचाने वाला बनाये,. अमीन अल्लाहुम्मा अमीन ,..

– मोहम्मद सलीम

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