Babri Masjid: बाबरी मस्जिद गिराने में शामिल रहे बलबीर सिंह और उनके २ दोस्तों ने इस्लाम अपनाकर मस्जिदें बनवाईं

Babri Masjid: बाबरी मस्जिद गिराने में शामिल रहे बलबीर सिंह और उनके २ दोस्तों ने इस्लाम अपनाकर मस्जिदें बनवाईं

Kar Sevak Balbir Singh was part of Babri masjid demolition. He later converted himself to Islam and became Mohammed Aamir.

“They plan, and Allah plans. Surely, Allah is the Best of planners”

# Holy Quran 8:30

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Waldain ke Huqooq (Complete Lecture) by Adv. Faiz Syed

Waldain (Maa Baap) ke Aulad par kya Huqooq hote hai,  Walidain se Baccho ne Kaisa Bartaw karna chahiye, Walidain agar Gairmulsim ho tab bhi Aulad ka rawayya unke haq me kaisa ho, Walidain ke Gaursharai amal par Aulad ne kya karna chahiye ? tafsili jankari ke liye Aaiye is bayan ka muatala karte hai.

Baraye meharbani isey jyada se jyada share karne me humara tawoon kare,. JazakAllahu khairan kaseera.

गैरमुस्लिम टैक्सी ड्राइवर के इस्लाम लाने की दास्ताँ

गैरमुस्लिम टैक्सी ड्राइवर के इस्लाम लाने की दास्ताँ

वाकिया: हिन्दू टैक्सी ड्राईवर का ईमान लाना | Maulana Kaleem Siddiqui | Story Hindu Taxi Driver Accept ISLAM who hate Muslims | ہندو کا قبول اسلام

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Seerat Un Nabi (ﷺ) in Urdu : [4 Day] Session by Br Imran

Seerat Un Nabi (ﷺ) in Urdu : [4 Day] Session by Br Imran

Sirate Nabi Kya hai ? Nabi Salallahu Alaihi Wasallam ki risalat ka asal maksad kya hai?  Aap Salallahu Alaihi Wasallam ko Allah ne Kine Liye Nabi banakar bheja? , Aadam (Alaihi Salam) se lekar Nabi-e-Kareem (Salallahu Alaihi Wasslam) tak ke Tamam Aham Amibiya (Alaihi salam) ke bare me tafsili jankari is session me kiya ja raha hai, baraye meharbani Aap hazrat se darkhwast hai ke isey pura sune aur jyada se jyada logo tak karne me humari madad kare,. jazakAllahu khairan kaseera.

Kya Baithkar Namaz padhna Durust hai ?

Aurat Kya Baith Kar Namaz Padh Sakti Hai Ya Nahi Isliye Ke Zyada Tar Aurtain Baith Kar Namaz Padhti , Tafseeli Jankari ke liye is mukhtsar si video ka mutala kare, aur isey jayada se jyada share karne me humara tawoon kare, jazakAllahu khairan kaseera.

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Hindu RSS Activist Revert to Islam : Mai Ne Islam Kese Qabol Kiya Bro Umar Rao | इस्लाम के विरोधी भाई ने अपनाया इस्लाम | जानिए एक इबरतनाक दास्ताँ

इस्लाम के विरोधी भाई ने अपनाया इस्लाम | जानिए एक इबरतनाक दास्ताँ

इस्लाम की बद्दनामी के लिए दिन रात बेशुमार मनसूबे किये जाते है, लेकीन वो लोग भूल जाते है के इस्लाम कायनात के रब के उसूलो का नाम है, लिहाजा ये लोग जितनी भी चाले चल ले इनकी हर चाल लोगो को अल्लाह दीन की तरफ बुला रही है, ऐसा ही एक वाकिया हमारे गैरमुस्लिम भाई के साथ हुआ जब उन्होने अपनाया इस्लाम और कर दी अपनी आप बीती बयांन।

*बराए मेहरबानी इस विडियो को देखे और इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर कर हमारे उन गैरमुस्लिम भाइयो तक पोहचाने की कोशिश करे जो मासूम है और सच्चे रब की राह पर चलना चाहते है लेकिन उन्हें बताने काम अब तक हमने नहीं किया,. अल्लाह हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक दे।

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Qabar me kya hoga

Qabar me kya hoga by Sister. Amtul Mateen

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Sood (Riba) ke Nuqsanat

Sood (Riba) ke Nuqsanat by Adv Faiz Sayed

Sood ke Nuqsanat

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What is Riba (Usury and Interest) (Sood) According to Quran and Sunnah, What is Riba – Sood in the Light of Quran

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Bani Israel ko Butparasti me mubtela karne wali Ghamandi Malika ka Hashr

Is Video me hum ek aisi Aurat ka tazkira Kar rahe hai jis ne ek poori Qoum yani Bani Israel ko Gumrah kar diya, Hazrat Ilyas (Alaih Salam) aur Malika Izabel ka Ibratnaak Wakiya. agar aap ko video pasand aye tou isey jyada se jyada share kar logon tak pohchane me humara tawoon kare. JazakAllahu Khairan Kaseera

इस विडियो में हम एक ऐसी औरत का तजकिरा करेंगे जिस ने एक पूरी कौम यानी बनी इस्राईल को गुमराह कर दिया, हज़रात इल्यास (अलेही सलाम) और मलिका इजाबेल का इबरतनाक वाकिया,.. अगर आपको विडियो पसंद आये तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर कर लोगो तक पोहचाने में हमारी मदद करे,.
– जज़कल्लाहू खैरण कसीरा

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बेटे के कातिल को मुआफ कर अब्दुल मोमिन ने दुनिया भर को दिया इस्लाम का असल पैगाम

अमेरिका में एक मुस्लिम पिता ने अपने बेटे के कातिल को मुआफ कर के इस्लाम की असल तस्वीर पेश की हैं, पिता ने कहा के ये मुआफी उसके बेटे के कातिल के लिए इस्लाम का सबसे बड़ा तोहफा होगा |

*विडियो देखे:

अमेरिका एक कोर्ट ने जैसे ही हत्यारे एलेग्जेंडर को ३१ साल की सजा सुनाई तो जिस लड़के का कतल हुआ था उसके पिता ने कातिल को इस्लाम का हवाला देकर मुआफ कर दिया, ये नज़ारा देख कर ना सिर्फ कोर्ट में मौजूद हर शख्स रो पड़ा बल्कि खुद कातिल के आँखों में भी आंसू आ गए |

पूरी दुनिया में जहा इस्लाम के नाम पर आतंक मचाया जा रहा है वही अमेरिका के एक कोर्ट ने एक मुस्लिम पिता के कातिल बेटे को सिर्फ इसलिए मुआफी दे दी क्यूंकि वो इस्लाम का असल चेहरा दुनिया के सामने पेश करना चाहता है,.
पिता अब्दुल मोमिन ने कहा “मै अपनी तरफ से, अपने बेटे सलाहुद्दीन और उसकी मरहूम माता की तरफ से ये कतल मुआफ करता हु, साथ ही में पिता ने कातिल से कहा के मै तुम्हे इस क़त्ल के बारे में जिम्मेदार नहीं ठहराता , मै मेरे बेटे को तकलीफ पोहचाने की वजह से तुमसे नाराज़ भी नहीं हु, बल्कि मै उस शख्स से खपा हु जिसने तुम्हे इन्सानियत से गिरा हुआ कदम उठाने के लिए गुमराह किया”

आगे वो कहते है के “इस्लाम का सबसे बड़ा तौफा मुआफी और खैरात है , इसीलिए ये तौफा मैंने अपने बेटे के कातिल को देने का फैसला किया है”

अब्दुल मोमिन आगे कहते है के “अल्लाह सब पर रेहम करनेवाला है, सबके गुनाहों को मुआफ करनेवाला है, उन्होंने कहा के अल्लाह ने कुरान में इंसानों से वादा किया है के अगर इन्सान उस से अपने गुनाहों की मुआफी मांगेगा तो अल्लाह उनके बड़े से बड़े गुनाहों को भी मुआफ कर देगा” इसीलिए कुरान के फरमान को सामने रखते हुए मैंने कातिल को मुआफ कर दिया ताकि वो आईंदा कोई अपराध न करे और अपने माता पिता के सपनो को साकार करे,.

*क्यों और कैसे हुआ था कतल:

ये बात २०१५ की है जब अब्दुल मोमिन का बेटा सलाहुद्दीन पिज़्ज़ा दिलिवेरी का काम करता था, एक रोज़ वो पिज़्ज़ा देने के लिए जा रहा था तब एलेग्जेंडर ने उसे लुटने के मकसद से हमला कर दिया और वो गंभीर रूप से घायल हो गया, जिस से सलाहुद्दीन की मौत हो गयी” ये मुआमला कोर्ट में 2 साल चलता रहा आखिर में केस की जब सुनिवाई हुई तो कोर्ट ने कातिल को ३१ साल की सजा सुनाई, लेकिन सलाहुद्दीन के पिता ने कोर्ट के सामने ही अपने बेटे के कातिल को मुआफ कर इस्लाम के अमन का पैगाम दिया,.

एक तरफ अब्दुल मोमिन है जिसने इस्लाम का असल पैगाम दुनिया भर के सामने लाया और दुसरी तरफ कुछ ऐसे लोग है जो इस्लाम को दहशतगर्दी से जोड़ रहे है ऐसे लोगो को अब्दुल मोमिन से सबक लेनी चाहिए और इस्लाम का जो असली मकसद है उसे दुनिया के सामने लाना चाहिए, याद रहे इस्लाम का असली मकसद मुआफ करना है ना की दहशत फैलाना,.

*खैर मुमकिन है के इस न्यूज़ को हमारी मीडिया नहीं दिखाएगी अब आपको ही इसे आगे पोहचाना है,.

– साभार: रियल फ्लेवर न्यूज़

Ladki Ki Shadi Keliye LIC Karana Kya Jaiz Hai by Adv. Faiz Syed


Does LIC permissible in Islam for Girls Marriage by Adv Faiz Sayed ?, Is LIC insurance permissible in Islam ?, is life insurance allowed in islam ?, is health insurance halal in islam ?, fatwa on lic policy, insurance in islam halal or haram, fatwa on life insurance in islam

Dua ka Tarika, uske Conditions aur Fazilat by Adv Faiz Sayed

Aajkal humare muashre me Dua ke talluk se beshumar galatefehmiya paayi jati hai ke Allah humari dua nahi saunta, meri to dua kabhi kabool hi nahi hoti, fala aur fala,.. tou aaiye dua ke kya aadaab (conditions) hotey hai, Dua kaisi mangi jaye, kin mouko par dua jaldi qabool hoti hai,, iske talluk se tafseeli jankari ke liye is video ka muatala karta hai ,..
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– JazakAllahu khairan kaseera,..

Ex Jain Brother Vijay Kumar Jain Accepted Islam विजय कुमार जैन ने अपनाया इस्लाम! रखा अब्दुल वाहिद अपना नाम

विजय कुमार जैन ने अपनाया इस्लाम! रखा अब्दुल वाहिद अपना नाम

जानिए – पूर्व जैन धर्म से इस्लाम लाने की दास्तान – विजय कुमार जैन से अब्दुल वाहिद तक का इब्रतनाक वाकिया | Janiye – Ex Jain Brother ke Islam laane ki dasta – Vijay Kumar Jain se Abdul Wahid tak ka Ibratnaak Wakiya

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16 Saal ke Researh ke baad Isayi Padri ne Apnaya Islam 16 साल के अध्यन के बाद ईसाई पादरी ने अपनाया इस्लाम

16 साल के अध्ययन के बाद ईसाई पादरी मैथ्यू पाल गिल ने अपनाया इस्लाम

पूर्व ईसाई पादरी मैथ्यू पाल गिल ने इस्लाम स्वीकार किया और मौलाना सलमान गिल बन गए। उन्होंने 16 साल की गहन शोध के बाद इस्लाम को स्वीकार किया। उन्होंने सच्चाई की खोज में विभिन्न धर्मों के विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया और अल्हम्दुलिल्लाह उन्हें अपने सच्चे रब (अल्लाह) का वास्तविक धर्म यानी इस्लाम मिल गया है।

*बराए मेहरबानी इस विडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने में हमारा तावून करे |
– जज़ाकअल्लाहु खैरण कसीरा !

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Ghusal kab Wajib ho Jata hai ?

Ghusl – Bathing kin kamo se Toot Jata Hai ? , Humpar Gusal kab Farz ho jata hai ?, Ghusl kaise tut’ta hai ?, Gusl ke Aqsaam kya hai ?

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Ghusl ka Sunnat aur Mukammil Tariqa

Ghusl – Bathing ka Sunnat aur Mukammil Tariqa by Adv. Faiz Syed
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Tauba aur Astaghfar ke 14 Azeem fayde by Adv. Faiz Syed

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Shabe Qadr me Ibadat ka Tareeka

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Ramzan Ka Mukhtasar Taruf by Adv. Faiz Syed

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Namaz ki Ahmiyat aur Fazilat by Adv Faiz Sayed

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तलाक, हलाला और खुला की हकीकत (Triple Talaq & Halala)

तलाक, हलाला और खुला की हकीकत (Triple Talaq & Halala)

• तलाक की हकीकत:

पति पत्नी में अगर किसी तरह भी निबाह नहीं हो पा रहा है तो अपनी ज़िदगी जहन्नम बनाने से बहतर है कि वो अलग हो कर अपनी ज़िन्दगी का सफ़र अपनी मर्ज़ी से पूरा करें इसी को तलाक कहते है जो कि इंसान होने के नाते उनका हक है, इसी लिए दुनियां भर के कानून में तलाक़ की गुंजाइश मौजूद है। और इसी लिए पैगम्बरों के दीन (धर्म) में भी तलाक़ की गुंजाइश हमेशा से रही है।

यूं तो तलाक़ कोई अच्छी चीज़ नहीं है और सभी लोग इसको ना पसंद करते हैं इस्लाम में भी यह एक बुरी बात समझी जाती है लेकिन इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं कि तलाक़ का हक ही इंसानों से छीन लिया जाए।

• दीने इब्राहीम की रिवायात के मुताबिक अरब जाहिलियत के दौर में भी तलाक़ से अनजान नहीं थे, उनका इतिहास बताता है कि तलाक़ का कानून उनके यहाँ भी लगभग वही था जो अब इस्लाम में है लेकिन कुछ बिदअतें उन्होंने इसमें भी दाखिल कर दी थी. किसी जोड़े में तलाक की नौबत आने से पहले हर किसी की यह कोशिश होनी चाहिए कि जो रिश्ते की डोर एक बार बन्ध गई है उसे मुमकिन हद तक टूटने से बचाया जाए,

जब किसी पति-पत्नी का झगड़ा बढ़ता दिखाई दे तो अल्लाह ने कुरआन में उनके करीबी रिश्तेदारों और उनका भला चाहने वालों को यह हिदायत दी है कि वो आगे बढ़ें और मामले को सुधारने की कोशिश करें इसका तरीका कुरआन ने यह बतलाया है कि “एक फैसला करने वाला शोहर के खानदान में से मुकर्रर करें और एक फैसला करने वाला बीवी के खानदान में से चुने और वो दोनों जज मिल कर उनमे सुलह कराने की कोशिश करें, इससे उम्मीद है कि जिस झगड़े को पति पत्नी नहीं सुलझा सके वो खानदान के बुज़ुर्ग और दूसरे हमदर्द लोगों के बीच में आने से सुलझ जाए.”

♥ कुरआन ने इसे कुछ यूं बयान किया है –

“और अगर तुम्हे शोहर बीवी में फूट पड़ जाने का अंदेशा हो तो एक हकम (जज) मर्द के लोगों में से और एक औरत के लोगों में से मुक़र्रर कर दो, अगर शोहर बीवी दोनों सुलह चाहेंगे तो अल्लाह उनके बीच सुलह करा देगा, बेशक अल्लाह सब कुछ जानने वाला और सब की खबर रखने वाला है”[ सूरेह निसा ४:35 ]

इसके बावजूद भी अगर शोहर और बीवी दोनों या दोनों में से किसी एक ने तलाक का फैसला कर ही लिया है तो शोहर बीवी के खास दिनों (Menstruation) के आने का इन्तिज़ार करे, और खास दिनों के गुज़र जाने के बाद जब बीवी पाक़ हो जाए तो बिना हम बिस्तर हुए कम से कम दो जुम्मेदार लोगों को गवाह बना कर उनके सामने बीवी को एक तलाक दे, यानि शोहर बीवी से सिर्फ इतना कहे कि ”मैं तुम्हे तलाक देता हूँ”

* तलाक हर हाल में एक ही दी जाएगी दो या तीन या सौ नहीं, जो लोग जिहालत की हदें पार करते हुए दो तीन या हज़ार तलाक बोल देते हैं यह इस्लाम के बिल्कुल खिलाफ अमल है और बहुत बड़ा गुनाह है अल्लाह के रसूल (सल्लाहू अलैहि वसल्लम) के फरमान के मुताबिक जो ऐसा बोलता है वो इस्लामी शर्यत और कुरआन का मज़ाक उड़ा रहा होता है.

इस एक तलाक के बाद बीवी 3 महीने यानि 3 तीन हैज़ (जिन्हें इद्दत कहा जाता है और अगर वो प्रेग्नेंट है तो बच्चा होने) तक शोहर ही के घर रहेगी और उसका खर्च भी शोहर ही के जुम्मे रहेगा लेकिन उनके बिस्तर अलग रहेंगे, कुरआन ने सूरेह तलाक में हुक्म फ़रमाया है कि इद्दत पूरी होने से पहले ना तो बीवी को ससुराल से निकाला जाए और ना ही वो खुद निकले, इसकी वजह कुरआन ने यह बतलाई है कि इससे उम्मीद है कि इद्दत के दौरान शोहर बीवी में सुलह हो जाए और वो तलाक का फैसला वापस लेने को तैयार हो जाएं।

* अक्ल की रौशनी से अगर इस हुक्म पर गोर किया जाए तो मालूम होगा कि इसमें बड़ी अच्छी हिकमत है। हर समाज में बीच में आज भड़काने वाले लोग मौजूद होते ही हैं, अगर बीवी तलाक मिलते ही अपनी माँ के घर चली जाए तो ऐसे लोगों को दोनों तरफ कान भरने का मौका मिल जाएगा, इसलिए यह ज़रूरी है कि बीवी इद्दत का वक़्त शोहर ही के घर गुज़ारे।

फिर अगर शोहर बीवी में इद्दत के दौरान सुलह हो जाए तो फिरसे वो दोनों बिना कुछ किये शोहर और बीवी की हेस्यत से रह सकते हैं इसके लिए उन्हें सिर्फ इतना करना होगा कि जिन गवाहों के सामने तलाक दी थी उनको खबर करदें कि हम ने अपना फैसला बदल लिया है, कानून में इसे ही ”रुजू” करना कहते हैं और यह ज़िन्दगी में दो बार किया जा सकता है इससे ज्यादा नहीं। (सूरेह बक्राह-229)

शोहर रुजू ना करे तो इद्दत के पूरा होने पर शोहर बीवी का रिश्ता ख़त्म हो जाएगा, लिहाज़ा कुरआन ने यह हिदायत फरमाई है कि इद्दत अगर पूरी होने वाली है तो शोहर को यह फैसला कर लेना चाहिए कि उसे बीवी को रोकना है या रुखसत करना है, दोनों ही सूरतों में अल्लाह का हुक्म है कि मामला भले तरीके से किया जाए, सूरेह बक्राह में हिदायत फरमाई है कि अगर बीवी को रोकने का फैसला किया है तो यह रोकना वीबी को परेशान करने के लिए हरगिज़ नहीं होना चाहिए बल्कि सिर्फ भलाई के लिए ही रोका जाए।

♥ अल्लाह कुरआन में फरमाता है –

“और जब तुम औरतों को तलाक दो और वो अपनी इद्दत के खात्मे पर पहुँच जाएँ तो या तो उन्हें भले तरीक़े से रोक लो या भले तरीक़े से रुखसत कर दो, और उन्हें नुक्सान पहुँचाने के इरादे से ना रोको के उनपर ज़ुल्म करो, और याद रखो के जो कोई ऐसा करेगा वो दर हकीकत अपने ही ऊपर ज़ुल्म ढाएगा।

और अल्लाह की आयातों को मज़ाक ना बनाओ और अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों को याद रखो और उस कानून और हिकमत को याद रखो जो अल्लाह ने उतारी है जिसकी वो तुम्हे नसीहत करता है, और अल्लाह से डरते रहो और ध्यान रहे के अल्लाह हर चीज़ से वाकिफ है”

[ सूरेह बक्राह २:231 ]

लेकिन अगर उन्होंने इद्दत के दौरान रुजू नहीं किया और इद्दत का वक़्त ख़त्म हो गया तो अब उनका रिश्ता ख़त्म हो जाएगा, अब उन्हें जुदा होना है.
इस मौके पर कुरआन ने कम से कम दो जगह (सूरेह बक्राह आयत 229 और सूरेह निसा आयत 20 में) इस बात पर बहुत ज़ोर दिया है कि मर्द ने जो कुछ बीवी को पहले गहने, कीमती सामान, रूपये या कोई जाएदाद तोहफे के तौर पर दे रखी थी उसका वापस लेना शोहर के लिए बिल्कुल जायज़ नहीं है वो सब माल जो बीवी को तलाक से पहले दिया था वो अब भी बीवी का ही रहेगा और वो उस माल को अपने साथ लेकर ही घर से जाएगी, शोहर के लिए वो माल वापस मांगना या लेना या बीवी पर माल वापस करने के लिए किसी तरह का दबाव बनाना बिल्कुल जायज़ नहीं है.

(नोट– अगर बीवी ने खुद तलाक मांगी थी जबकि शोहर उसके सारे हक सही से अदा कर रहा था या बीवी खुली बदकारी पर उतर आई थी जिसके बाद उसको बीवी बनाए रखना मुमकिन नहीं रहा था तो महर के अलावा उसको दिए हुए माल में से कुछ को वापस मांगना या लेना शोहर के लिए जायज़ है.)

अब इसके बाद बीवी आज़ाद है वो चाहे जहाँ जाए और जिससे चाहे शादी करे, अब पहले शोहर का उस पर कोई हक बाकि नहीं रहा.

इसके बाद तलाक देने वाला मर्द और औरत जब कभी ज़िन्दगी में दोबारा शादी करना चाहें तो वो कर सकते हैं इसके लिए उन्हें आम निकाह की तरह ही फिरसे निकाह करना होगा और शोहर को महर देने होंगे और बीवी को महर लेने होंगे.

# अब फ़र्ज़ करें कि दूसरी बार निकाह करने के बाद कुछ समय के बाद उनमे फिरसे झगड़ा हो जाए और उनमे फिरसे तलाक हो जाए तो फिर से वही पूरा प्रोसेस दोहराना होगा जो मैंने ऊपर लिखा है,

# अब फ़र्ज़ करें कि दूसरी बार भी तलाक के बाद वो दोनों आपस में शादी करना चाहें तो शरयत में तीसरी बार भी उन्हें निकाह करने की इजाज़त है. लेकिन अब अगर उनको तलाक हुई तो यह तीसरी तलाक होगी जिस के बाद ना तो रुजू कर सकते हैं और ना ही आपस में निकाह किया जा सकता है.

• हलाला:

# अब चौथी बार उनकी आपस में निकाह करने की कोई गुंजाइश नहीं लेकिन सिर्फ ऐसे कि अपनी आज़ाद मर्ज़ी से वो औरत किसी दुसरे मर्द से शादी करे और इत्तिफाक़ से उनका भी निभा ना हो सके और वो दूसरा शोहर भी उसे तलाक देदे या मर जाए तो ही वो औरत पहले मर्द से निकाह कर सकती है, इसी को कानून में ”हलाला” कहते हैं.

लेकिन याद रहे यह इत्तिफ़ाक से हो तो जायज़ है जान बूझ कर या प्लान बना कर किसी और मर्द से शादी करना और फिर उससे सिर्फ इस लिए तलाक लेना ताकि पहले शोहर से निकाह जायज़ हो सके यह साजिश सरासर नाजायज़ है और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने ऐसी साजिश करने वालों पर लानत फरमाई है.

• खुला:

अगर सिर्फ बीवी तलाक चाहे तो उसे शोहर से तलाक मांगना होगी, अगर शोहर नेक इंसान होगा तो ज़ाहिर है वो बीवी को समझाने की कोशिश करेगा और फिर उसे एक तलाक दे देगा, लेकिन अगर शोहर मांगने के बावजूद भी तलाक नहीं देता तो बीवी के लिए इस्लाम में यह आसानी रखी गई है कि वो शहर काज़ी (जज) के पास जाए और उससे शोहर से तलाक दिलवाने के लिए कहे, इस्लाम ने काज़ी को यह हक़ दे रखा है कि वो उनका रिश्ता ख़त्म करने का ऐलान कर दे, जिससे उनकी तलाक हो जाएगी, कानून में इसे ”खुला” कहा जाता है.

यही तलाक का सही तरीका है लेकिन अफ़सोस की बात है कि हमारे यहाँ इस तरीके की खिलाफ वर्जी भी होती है और कुछ लोग बिना सोचे समझे इस्लाम के खिलाफ तरीके से तलाक देते हैं जिससे खुद भी परेशानी उठाते हैं और इस्लाम की भी बदनामी होती है.
– (मुशर्रफ अहमद)

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Duniya se Mohabbat ke Nuqsaanat by Adv. Faiz Syed

Dunia ki mohabbat aaj insan ke har kism ke Gunaah ka bayeens hai, jabki ye akahirat ke aitbar se bohot khassara uthane wali cheez hai ,.. iske talluk se tafseeli jankari ke liye aayiye is bayan ka muta’ala karte hai.
*baraye meharbani isey jyada se jyada share karne me humara tawoon kare,.
– JazakAllahu khairan kaseera !

Safar e Akhirat – Journey After Death by Adv. Faiz Syed

Waise agar dekha jaye tou Akhirat ka safar ek bohot bada topic hai, jo insan ke mout ke baad se shuru hota hai, fir uske baad uske Qabr ki Zindagi ka tamam mu’amla hota hai, uske baad barzaq ke halat, maqame-mehshar me usey dubara utahaya jana, mizan ka qayam hona , hisab aur kitab hona aur fir uske haq me jannat aur jahannum ka faisala hona ,.. tou aayiye is bayan ke waseele se hum Safar e aakhirat ki Haqqaniyat par roshni dalne ki koshish karet hai..

*baraye meharbani aap sabhi hazraat se darkhwast hai ke isey share kar jyada se jyada hazraat tak pohchane me humara tawoon karey..
– JazakAllahu Khairan kaseera !

Afwah ki Hakikat aur uske Nuksanat (Funny but Ilmi)

Aajkal muashre me log choti choti baato ki badi se badi afwaye failate hai aur sochtey tak nahi ke iska asar kaha tak ho sakta hai.. April fool ke naam se jhooth ko farow diya jata hai jab ke hum bhool jate hai ke jhooth ek kabira gunaah hai..
*beharhaal Afwah ke nataiz kitne sangeen hote hai isey jan’ne ke liye is mukhtsar si speech ka muta’ala kare , aur jyada se jyada share kar apne muashre ki islah me humara tawoon kare..
– JazakAllahu khairan kaseera !

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