शोहर की नाशुक्री का अन्जाम

पोस्ट 10 :
शोहर की नाशुक्री का अन्जाम

इब्ने अ़ब्बास रज़िअल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि,
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया:

मुझे जहन्ऩम दिखाई गई तो मैं ने देखा कि उस में अक्सरिय्यत औ़रतों की है । (क्यूंकि) वो (नाशुक्री, इन्कार) करती हैं।

पूछा गया: क्या अल्लाह से कुफ्र करती हैं ?

आप ﷺ ने फ़रमाया: शोहर का इन्कार करती हैं। एहसान का इन्कार करती हैं। अगर उन में से तू किसी पर एक ज़माने तक एहसान करता रहे फिर वो तुझ से कुछ कमी देखे तो फ़ौरन कहती है: मैं ने तुम्हारी त़रफ़ से कभी कोई भलाई नहीं देखी ।

📕 बुख़ारी: अल ईमान 29,
📕 मुस्लिम: अल कसूफ 1512
अल्फ़ाज़ बुख़ारी के हैं ।

————-J,Salafy————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं
(सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224)

 

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