सज्द-ए-सहु करना

रसुलअल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:

“जब तुम में से किसी को (नमाज़ में) भूल चूक हो जाए, तो सज्द-ए-सह्व कर ले।”

फायदा: अगर नमाज में कोई वाजिब भूल से छूट जाए या वाजिबात और फराइज़ में से किसी को अदा करने में देर हो जाए, तो सज्द-ए-सहु करना वाजिब है; इस के बगैर नमाज़ नहीं होती।

और भी देखे : सजदा ऐ सहु का तरीका अहकाम और मसाइल

📕 मुस्लिम: १२८३

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