मेअराज का सफर

हिजरत से एक साल पहले हजूर (ﷺ) को सातों आसमानों की सैर कराई गई, जिस को “मेअराज” कहते हैं। क़ुरआने करीम में भी सराहत के साथ इस का तज़केरा आया है। जब आपकी उम्र मुबारक ५१ साल ९ माह हुई, तोरात के वक़्त आपको मस्जिदे हराम लाया गया और जमजम और मकामे इब्राहिम के दर्मियान से बुराक नामी सवारी पर हजरत जिबईल (अ.स.) के साथ बैतुलमक्दिस तशरीफ लाए। यहाँ आपने तमाम अम्बियाए किराम की इमामत फर्माई। उसके बाद सातों आसमानों पर तशरीफ ले गए। हर आसमान पर अलग अलग नबियों से मुलाकात हुई। सातों आसमान के बाद “सिदरतुल मुन्तहा” तक हज़रत जिब्रईल साथ रहे। उस के बाद आप तने तन्हा आगे बढ़े और उस मकाम तक पहुँचे. जहाँ तक फरिश्ते भी नहीं जा सकते। यहाँ आपको अल्लाह से हम कलामी का शर्फ हासिल हुआ और यहीं पाँच नमाजे तोहफे में दी गई। उसके बाद बैतुलमक्दिस वापस आए और बुराक पर सवार हो कर मक्का मुकर्रमा वापस तशरीफ लाए।

इस अहम सफर में आप ने अल्लाह तआला की बड़ी बड़ी निशानियाँ देखीं। जिन के मुतअल्लिक अल्लाह तआला ने फ़रमाया के “उन की आँख न किसी तरफ माइल हुई और न (हद से) आगे बढ़ी। उन्होंने अपने रब (की कुदरत) के बड़े बड़े अजाएबात देखे।” 

[Islamic History]

TO BE CONTINUE ….

📕 सूरह नज्म: १७ ता १४

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