दीन-ऐ-इस्लाम में नमाज़ की अहमियत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया :

“दीन बगैर नमाज़ के नहीं है, नमाज़ दीन के लिये ऐसी है जैसा आदमी के बदन के लिये सर होता है।”

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