क़यामत क्या है और क्यों आएगी?

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۞ बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ۞

क़यामत किसे कहते है ?

इस दुनिया में जो भी आया, हर एक ने इसको छोड़कर दूसरी दुनिया का रास्ता लिया यानि अपनी उम्र की सांस पूरी करके मौत की कठिन घाटी को तय करके बरजख में पहुंचा। बरजख में अज़ाब और तकलीफें भी हैं और आराम व राहत भी है। अपने-अपने आमाल के एतबार से बरजख में अलग-अलग हालात से गुजरना पड़ता है। दुनिया से जो आता है बरजख में जगह पाता है। गरज़ यह कि हर आने वाला जाएगा और जिस तरह इंसानों और जिन्नों की उम्रें तय हैं; उसी तरह दुनिया की उम्र भी तयशुदा है। जब इस दुनिया की उम्र पूरी होगी; अचानक उसके मजमुए को मौत आ जाएगी। एक-एक आदमी के चले जाने को मौत और पूरी दुनिया के ख़त्म हो जाने को कयामत कहते हैं

क़यामत क्यों आएगी ?

अल्लाह तआला ने ज़िन्दगी और मौत को इसीलिए पैदा किया ताकि वो आज़माये के अमल के लिहाज से कौन अच्छे और कौन बुरे होंगे , और जो जैसा करेगा वैसा उसको बदला दे दिया जायेगा। इंसान क्या करे और क्या ना करे जिसका एलान भी अल्लाह ने अपने पैग॒म्बरों की ज़ुबानी साफ कर दिया की “इंसानों! तुमको मरना है और मरने के बाद जी उठना है और जी उठकर पैदा करने वाले मालिक के सामने जवाबदही करना है।” इसीलिए क़यामत आएगी।

कुरआन मजीद में कियामत के दिन को ‘“यौमुद्दीन‘ (बदले का दिन) और थयौगुल फसल” (फैसले का दिन) और ‘यौमुल हिसाब” (हिसाब का दिन) फ़रमाया गया है।

हिसाब के लिए क़यामत ही क्यों, दुनिया में फैसले क्यों नहीं होते ?

अब यह सवाल आता है कि “इस दुनिया में क्यों फैसले नहीं होते और बदले क्‍यों नहीं मिलते? तो इसका जवाब यह है कि एक तो यह दुनिया
अमल की जगह है इसमें इम्तिहान के लिए आते हैं। अमल की जगह अमल का बदला मिलने लगे तो गैब पर ईमान न रहे और इम्तिहान का मकसद
बेकार हो जाए। फिर यह कि अमल बराबर जारी है। नेकियों से बहुत-से गुनाह (छोटे) माफ होते रहते हैं और तौबा करने का भी मौका है।

इसलिए यह मुनासिब और सही है कि इस जिंदगी के बाद दूसरी ज़िंदगी में फैसले हों और बदले दिए जाएं। कियामत के दिन जब ख़त्म होगा और सबके फैसले हो जाएंगे तो हर एक अपने-अपने अंजाम के मुताबिक दोजख़ में पहुंचेगा। वे गुनाहगार मोमिन जो बुरे आमाल की वजह से दोजख़ में जाएंगे। बाद में जब अल्लाह जल्ल ल शानुहू की मंशा होगी, दोज़ख़ से निकाल कर जन्नत में दाख़िल कर दिए जाएंगे। लेकिन जन्नत से निकाल कर किसी को किसी दूसरी जगह न भेजा जाएगा। कियामत के फैसले के बाद जन्नत का फैसला हो जाना ही सच्ची कामयाबी है।

क़यामत कब आएगी ?

कियामत का आना हक है इसमें कोई शक नहीं। लेकिन ये कब आएगी इसके बारे में हकीकी इल्म तो अल्लाह तआला को ही है , अल्लाह तआला की जब मंशा होगी; सूर फूंक दिया जाएगा | कियामत आ मौजूद होगी । तो कोई भी उसको झुठलाने वाला न होगा | उसके आने का वक्त अल्लाह तआला के इल्म में मुक्रर है। लोगों के एतराज करने से अल्लाह तआला इसे वक्त से पहले जाहिर न फरमाएगा। सूरः सबा में यह भी इर्शाद है :

“और वे कहते हैं कि यह वादा कब पूरा होगा अगर तुम सच्चे हो। आप (नबी ﷺ) कह दीजिए कि ‘ए लोगो! तुम्हारे लिए वादा है एक दिन का। न एक घड़ी इससे आगे किये जाओगे और न पहले।'”

बहरहाल इस सिरिज (मैदाने हश्र के हालत) में हम जायज़ा लेंगे के ‘क़यामत के दिन के हालत कैसे होंगे, क़यामत की हौलनाकिया क्या होंगी? और कौन लोग रेहमते इलाही के साये में होंगे।” इंशाअल्लाह इस सीरीज में हम तफ्सील में इसका जिक्र करेंगे। बराये मेहरबानी इन पोस्ट का तरतीब से पढ़े और इन्हे ज्यादा से ज्यादा शेयर करने में हमारा तावूंन करे।

To be Continued …

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