पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब (ﷺ) की शिक्षाओं की एक झलक #ProphetofCompassion

[ इसलाम का दुष्प्रचार करने वाले जरूर पढें ]

1. समस्त संसार को बनाने वाला एक ही मालिक हैं। वह निहायत मेहरबान और रहम करने वाला है। उसी की ईबादत करो और उसी का हुक्म मानो।


2. अल्लाह ने इन्सान पर अनगिनत उपकार किए हैं। धरती और आकाश की सारी शक्तियॉ इन्सानों की सेवा मे लगा दी हैं। वही धरती और आकाश का मालिक हैं, वही तुम्हारा पालनहार हैं।


3. अल्लाह (यानि अपने सच्चे मालिक ) को छोड़कर अन्य की पूजा करना सबसे बड़ा जुल्म और अत्याचार है।


4. अल्लाह की नाफरमानी करके तुम उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते। फरमाबरदार बनकर रहो, इसमें तुम्हारा अपना भला है।


5. अल्लाह की याद से रूह को सकून मिलता हैं। उसकी इबादत से मन का मैल दूर होता है।


6. अल्लाह की निशानियों ( दिन, रात, धरती, आकाश, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु आदि की बनावट ) पर विचार करो। इस से अल्लाह पर ईमान मजबूत होगा और भटकने से बच जाओगे।


7. मैं ( पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) अल्लाह की ओर से संसार का मार्ग दर्शक नियुक्त किया गया हूॅ। मार्ग दर्शन का कोई बदला तुमसे नही चाहता। मेरी बातें सुनों और मेरी आज्ञा का पालन करो।


8. मै कोई निराला और अजनबी पैगम्बर नही हूॅं। मुझसे पहले संसार मे मार्ग दर्शन के लिए बहुत-से रसूल आ चुके हैं, अपने धर्म-ग्रन्थों में देख लो या किसी ज्ञानी व्यक्ति से मालूम कर लो। मैं पहले के पैगम्बर की शिक्षा को पुन: स्थापित करने और कपटाचारियों के बन्धन से मानव को मुक्त कराने आया हू।


9. मैं इसलिए भेजा गया हू कि नैतिकता और उत्तम आचार को अंतिम शिखर तक पहुॅचा दू।
मैं लोगो की कमर पकड़-पकड़कर आग में गिरने से बचा रहा हू, किन्तु लोग हैं कि आग ही की ओर लपक रहे हैं।


10. मैं दुनियावालों के लिए रहमत बनाकर भेजा गया हूॅ। तुम लोगो के लिए आसानियॉ पैदा करो; मुसीबते न पैदा करो। मॉ-बाप की सेवा करो। उनके सामने ऊॅची आवाज से न बोलो। उन्होने तुम पर बड़ा उपकार किया है, अत: तुम उनके आज्ञाकारी बनकर रहों।


11. मॉ-बाप यदि अन्याय का आदेश दे तो न मानों, बाकी बातों में उनकी आज्ञा का पालन करो।


12. सारे मानव एक मालिक(अल्लाह) के पैदा किए हुए है, एक मॉ-बाप(आदम-हव्वा) की संतान हैं। उनके बीच रंग-नस्ल जाति, भाषा, क्षेत्रीयता आदि का भेद भाव घोर अन्याय है। सारे लोग आदम की सन्तान है, उनसे प्यार करो घृणा न करो। उन्हे आशावान बनाओं निराश मत करो।


13. मानव में श्रेष्ठ वह हैं जो दूसरों का हमदर्द, पवित्र आचरण वाला और अपने रब का आज्ञाकारी हैं।


14. तुम धरती वालों पर दया करो, आकाशवाला ( अल्लाह ) तुम पर दया करेगा।


15. वह व्यक्ति सब से अच्छा हैं जो अपने घरवालों और पड़ोसियों के लिए अच्छा हैं।


16. औरतों, गुलामों और यतीमों ( अनाथों ) पर विशेष रूप से दया करो।


17. जो अपने बेटे और बेटियो के बीच भेदभाव न करे और बेटियों का ठीक से पालन-पोषण करे, वह स्वर्ग में जाएगा।


18. जो बड़ो का आदर और छोटो से प्रेम न करे वह हम में से नहीं।


19. तुम ￰दुनयावी जिन्दगी मे मस्त होकर भूल मत जाओ, तुम सब को अपने किए हुए कर्मो का हिसाब अपने रब को देना हैं। आखिरत ( परलोक ) की सफलता ही वास्तविक सफलता हैं।


20. आखिरत ( परलोक ) की यातना बड़ी कठोर हैं। वहॉ कुल-वंश, सगे-सम्बन्धी, धन-दौलत और किसी की सिफारिश कुछ काम आने वाली नहीं। अल्लाह के हुक्म का पालन और उत्तम आचरण ही (उस की यातना से) बचने का एक मात्र साधन हैं। अपने को और अपने घर वालों को नरक की अग्नि से बचाओं।


21. अल्लाह के हुक्म के मुताबिक खर्च करके स्वंय को नरक की अग्नि से बचाओं। तुम्हारे माल में तुम्हारे सम्बन्धियों, गरीबो, अनाथो का भी हक हैं। उन के हक अदा करो। दूसरो का धन अवैध रूप से न खाओं। तिजारत या समझौते के द्वारा वैध रूप से धन प्राप्त करो। चीजों मे मिलावट न करो, नाप-तौल मे कमी न करो। व्यापार में धोखा न दो। जो धोखा देता हैं हम में से नही।


22. बाजार मे भाव बढ़ाने के लिए ( गल्ला आदि ) चीजों को रोककर ( जखीरा कर के ) मत रखों। ऐसा करने वाला घोर यातना का अधिकारी है।


23. पैसे को गिन-गिनकर जमा न करो और न फिजूलखर्ची करो, मध्यम मार्ग को अपनाओं।


24. दूसरों के अपराध क्षमा कर दिया करो। दूसरों के ऐब का प्रचार न करो उसे छिपाओं, तुम्हारा रब तुम्हारे ऐबो पर परदा डाल दैगा। झूठ, चुगलखोरी, झूटे आरोप ( बोहतान ) से बचो। लोगो को बुरे नाम से न पुकारो।


25. अश्लीलता और निर्लज्जता के करीब भी न जाओ, चाहे वह खुली हो या छिपी।


26. दिखावे का काम न करो। दान छिपाकर दो। उपकार करके एहसान मत जताओ।


27. रास्ते से कष्टदायक चीजों ( कॉटे, पत्थर आदि ) को हटा दिया करो।


28. धरती पर नर्म चाल चलो, गर्व और घमण्ड न करो। जब बोलो अच्छी बात बोलो अन्यथा चुप रहो। अपने वचन और प्रतिज्ञा को पूरा करो।


29. सत्य और न्याय की गवाही दो, चाहे तुम्हारी अपनी या अपने परिवार-जनों की ही हानि क्यो न हो। अन्याय के विरूद्ध संघर्ष करने वाला अल्लाह का प्यारा होता है।


30. किसी बलवान को पछाड़ देना असल बहादुरी नही, बहादुरी यह है कि आदमी गुस्से पर काबू पाए।


31. मजबूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी अदा करो।


32. किसी सेवक से उसकी शक्ति से अधिक काम न लो, उस के आराम का ख्याल रखो। जो खुद खाओं उसे भी खिलाओं और जो खुद पहनो उसे भी पहनाओं। जानवरों पर दया करो, उनकी शक्ति से अधिक उनसे काम न लो।


33. किसी वस्तु का आवश्यकता से अधिक प्रयोग न करो। पानी का दुरूपयोग न करो, चाहे तुम नदी के किनारे ही क्यो न हो।


34. अपने शरीर, वस्त्र और घर को पाक-साफ रखों। जब सोकर उठो तो सबसे पहले अपने दोनो हाथों को धो लो। तुम्हे पता नही कि नींद में हाथ कहॉ-कहॉ गए हैं।


35. युद्ध मे औरतो, बच्चो, बीमारों और निहत्थो पर हाथ न उठाओं। फल वाले पेड़ो को न काटो। युद्ध के बन्दियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, उन्हें यातनाएं न दो।


36. जो कोई बुराई को देखे, तो अपनी ताकत के मुताबिक उसे रोकने की कोशिश करे, यदि रोकने की क्षमता ना हो तो दिल से उस को बुरा समझो।


37. सारे कर्मो का आधार नीयत ( इरादा ) हैं। गलत इरादे के साथ किए गए अच्छे कर्मो का भी कोई फल अल्लाह के यहॉ नही मिलेगा।

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