जऩ्नत में बुढ़ापा नहीं …

Series : ख़्वातीन ए इस्लाम : पोस्ट 49

जन्नत में बुढ़ापा नहीं

हसन बसरी रहिमहुल्लाह फ़रमाते हैं:
एक बूढ़ी औरत नबी ﷺ के पास आई और कहा:

“ऐ अल्लाह के रसूल, अल्लाह से दुआ़ कीजिए कि वो मुझे जन्नत में दाख़िल कर दे।”

इस पर आप ﷺ ने फ़रमाया: ओ फुलां, जन्नत में बुढ़ी औरत नहीं जाएगी।

इस पर वो औरत रोते हुवे वापस जाने लगी तो आप ﷺ ने फ़रमाया: इस को बत़ाओ की बुढ़ापे की हालत में जन्नत में दाख़िल नहीं होगी। क्यूंकि अल्लाह तआ़ला फ़रमाता है:

हम ने उन्हें नए सिरे से पैदा किया है और उन्हें कुंवारियां बना दिया है। वो जवान हम-उमर औ़रतें हैं।

📕 अश्शमाएल अल मुहम्मदिया 205-ह़सन बिशहिदिहि

📕 सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224

————- J,Salafy ————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं

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