99 बीमारियों की दवा (ला हौल वला कुव्वत इल्ला बिल्लाह)

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : जो शख्स “ला हौल वला कुव्वत इल्ला बिल्लाह” पढेगा, तो यह निनान्वे मर्ज की दवा है, जिस में सबसे छोटी बीमारी रंज व ग़म है।
Read More...

आतिश फ़िशाँ (लावा, वालकेनो)

आतिश फिशाँ वह आग है, जो ज़मीन के अन्दर की धातों को पिघला कर बाहर निकालती है, जब वह बाहर निकलती है, तो बेपनाह जानी माली नुकसान होता है, यही नहीं बल्के चिकना और चटयल मैदान बना देता है, दुनिया के तरक्क्रीयाफ्ता लोग आज तक इसकी रोकथाम के लिये न कोई मशीन, न कोई इंतेज़ाम और न कोई मालूमात खास हासिल कर सके, के कब निकलेगा, कितना निकलेगा, कहाँ से निकलेगा और…
Read More...

क़यामत में झूटे खुदाओं की बेबसी

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है :"जिसको तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, वह खजूर की गुठली के एक छिलके का भी इख्तियार नहीं रखते, अगर तुम उनको पुकारो भी, तो वह तुम्हारी पुकार सुन भी नहीं सकते और अगर (बिलफर्ज़) सुन भी लें तो तुम्हारी ज़रूरत पूरी न कर सकेंगे और कयामत के दिन तुम्हारे शिर्क की मुखालफत व इन्कार करेंगे।"
Read More...

मस्जिदे कुबा की तामीर और पहला जुमा

मदीना मुनव्वरा से तक़रीबन तीन मील के फासले पर एक छोटी सी बस्ती कुबा है, यहाँ अन्सार के बुहत से खानदान आबाद थे और कुलसूम बिन हदम उन के सरदार थे, हिजरत (migration) के दौरान आपने पहले कुबा में कयाम फर्माया और कुलसूम बिन हदम के घर मेहमान हुए, रसूलुल्लाह (ﷺ) ने यहाँ अपने मुबारक हाथों से एक मस्जिद की बुनियाद डाली, जिस का नाम मस्जिदे कुबा है, मस्जिद की…
Read More...

The proud will be gathered on the Day of Judgement

Rasool-Allah Sallallahu Alaihi Wasallam said"The proud will be gathered on the Day of Judgement resembling tiny particles (Like an ant) in the image of men. They will be covered with humiliation everywhere, they will be dragged into a prison in Hell called Bulas, submerged in the Fire of Fires, drinking the drippings of the people of the Fire,…
Read More...

मुसलमानों का मदीना हिजरत करना

मक्का मुकरमा में मुसलमानों पर बेपनाह जुल्म व सितम हो रहा था, इस लिये रसूलल्लाह (ﷺ) ने दूसरी बैते अकबा के बाद मुसलमानों को मदीना जाने की इजाज़त दे दी। मुसलमानों में सबसे पहले अबू सलमा (र.अ) ने हिजरत का इरादा किया और सवारी तय्यार कर के सामान रखा और अपनी बीबी उम्मे सलमा और लड़के सलमा को साथ लिया, मगर बनी मुग़ीरा ने उम्मे सलमा को जाने न दिया और बनी…
Read More...

एक अहेम अमल : अगली सफ में नमाज़ अदा करना

रसलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"अल्लाह तआला और उसके फरिश्ते पहली सफ वालों पर रहमत भेजते हैं और मोअज्जिन के बुलंद आवाज़ के बकद्र उस की मगफिरत कर दी जाती है, खुश्की और तरी की हर चीज़ उस की आवाज़ की तसदीक करती है और उस के साथ नमाज़ पढ़ने वालों का सवाब उस को भी मिलेगा।"
Read More...

अल्लाह तआला से जो वादा करो उस को पूरा किया करो

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :"जब तुम बात किया करो, तो इन्साफ का ख्याल रखा करो, अगरचे वह शख्स तुम्हारा रिश्तेदार ही हो और अल्लाह तआला से जो अहद करो उस को पूरा किया करो, अल्लाह तआला ने तुम्हें इस का ताकीदी हुक्म दिया है। ताके तुम याद रखो (और अमल करो)।
Read More...

मुसलमानों के दिल अल्लाह की याद और उस के सच्चे दीन के सामने झुक जाएँ

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :“क्या ईमान वालों के लिए अभी तक ऐसा वक्त नहीं आया, के उनके दिल अल्लाह की नसीहत और जो दीने हक़ नाजिल हुआ है, उसके सामने झुक जाएँ और वह उन लोगों की तरह न हो जाएँ जिन को उन से पहले किताब दी गई थी। यानी वह वक्त आ चुका है के मुसलमानों के दिल कुरआन और अल्लाह की याद और उस के सच्चे दीन के सामने झुक जाएँ।”
Read More...

इत्र लगाना

हजरते आयशा (र.अ) से मालूम किया गया के रसूलुल्लाह इत्र लगाया करते थे? उन्होंने फ़रमाया “हाँ मुश्क वगैरह की उम्दा खुशबु लगाया करते थे।”
Read More...

जहन्नम का जोश

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :"जब जहन्नम (क़यामत के झुटलाने वालों) को दूर से देखेगी, तो वह लोग (दूर ही से) उस का जोश व खरोश सुनेंगे और जब वह दोज़ख़ की किसी तंग जगह। में हाथ पाँव जकड़ कर डाल दिये जाएंगे, तो वहाँ मौत ही मौत पुकारेंगे। (जैसा के मुसीबत में लोग मौत की तमन्ना करते हैं)।"
Read More...

हुजूर (ﷺ) ग़ारे सौर में

रसूलअल्लाह (ﷺ) और हज़रत अबू बक्र (र.अ) दोनों मक्का छोड़ कर गारे सौर में पहुँच चुके थे। उधर मुश्रिकीनने पीछा करना शुरू किया और तलाश करते हुए गारे सौर के बिल्कुल मुँह के करीब पहुंच गए। उस वक़्त हजरत अबू बक्र (र.अ) ने कहा : या रसूलल्लाह ! उन में से किसी ने एक क़दम भी आगे बढ़ाया, तो हमें देख लेगा। हुजूर (ﷺ) ने फर्माया “घबराओ नहीं अल्लाह हमारे साथ है।”…
Read More...

सफा पहाड़ पर इस्लाम की दावत

नुबुव्वत मिलने के बाद रसूलुल्लाह (ﷺ) तीन साल तक पोशीदा तौर पर दीन की दावत देते रहे, फिर अल्लाह तआला की तरफ से हुजूर (ﷺ) को खुल्लमखुल्ला इस्लाम की दावत देने का हुक्म हुआ, इस हुक्म के बाद रसूलुल्लाह (ﷺ) ने सफा पहाड़ की चोटी पर चढ़ कर मक्का के तमाम खानदान वालों को आवाज़ दी, जब सब लोग जमा हो गए, तो आपने फ़रमाया : "ऐ लोगो ! अगर मैं तुमसे यह कहूँ के इस…
Read More...

नमाज़ के छोड़ने पर वईद

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : "नमाज़ का छोड़ना आदमी को कुफ्र से मिला देता है।"एक दूसरी हदीस में आप (ﷺ) ने फ़र्माया: "ईमान और कुफ्र के दरमियान फर्क करनेवाली चीज़ नमाज़ है।"
Read More...

अपने भाइयों के दर्मियान सुलह किया करो

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:"मुसलमान आपस में एक दूसरे के भाई है (अगर उनके दरमियान लड़ाई हो जाए) तो अपने दो भाइयों के दर्मियान सुलह करा दिया करो, और अल्लाह से डरते। रहा करो, ताके तुम पर रहम किया जाए।"
Read More...

सब से बेहतरीन दवा

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “सबसे बेहतरीन दवा कुरआन है।”फायदा : उलमाए किराम फर्माते हैं के क़ुरआनी आयात के मफ़हूम के मुताबिक जिस बीमारी के लिए जो आयत मुनासिब हो, उस आयत को पढ़ने से इन्शा अल्लाह शिफा होगी और यह सहाब-ए-किराम का मामूल था।
Read More...

माँ बाप पर लानत भेजने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:“(शिर्क के बाद) सब से बड़ा गुनाह यह है के आदमी अपने माँ बाप पर लानत करे। अर्ज किया गया: ऐ अल्लाह के रसूल ! कोई अपने माँ बाप पर लानत कैसे भेज सकता है? फर्माया : इस तरह के जब किसी के माँ बाप को बुरा भला कहेगा तो वह भी उसके माँ बाप को बुरा भला कहेगा।”
Read More...

दुनिया में उम्मीदों का लम्बा होने का फितना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:"मुझे अपनी उम्मत पर सब से ज़ियादा डर ख्वाहिशात और उम्मीदों के बढ़ जाने का है, ख्वाहिशात हक़ से दूर कर देती हैं और उम्मीदों का लम्बा होना, आखिरत को भुला देता है, यह दुनिया भी चल रही है और हर दिन दूर होती चली जा रही है और आखिरत भी चल रही है। और हर दिन करीब होती जा रही है।" (यानी हर वक़्त ज़िन्दगी कम होती जा रही है और मौत…
Read More...

नजाशी के दरबार में कुफ्फार की अपील

कुरैश ने जब यह देखा के सहाबा-ए-किराम हबशा जा कर सुकून व इत्मीनान के साथ जिंदगी गुजार रहे हैं, तो उन्होंने मशविरा कर के अम्र बिन आस और अब्दुल्लाह बिन अबी रबीआ को बहुत सारे तोहफे देकर बादशाह हबशा के पास भेजा। वहाँ का बादशाह ईसाई था। इन दोनों ने वहाँ जाकर तोहफे पेश किये और कहा के हमारे यहाँ से कुछ लोग अपने आबाई मजहब को छोड़ कर एक नया दीन इख्तियार कर…
Read More...

इल्म सीखते हुए वफात पा जाने की फ़ज़ीलत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :"जिस को इल्म सीखते हुए मौत आजाए, वह इस हाल में अल्लाह तआला से मुलाकात करेगा के उसके और नबियों के दर्मियान सिर्फ नुबुब्बत के दर्जे का फर्क होगा।"
Read More...

वरम (सूजन) का इलाज

हज़रत अस्मा (र.अ) के चेहरे और सर में वरम हो गया, तो उन्होंने हजरत आयशा (र.अ) के जरिये आप (ﷺ) को इस की खबर दी। चुनान्चे हुजूर (ﷺ) उन के यहाँ तशरीफ़ ले गए और दर्द की जगह पर कपड़े के ऊपर से हाथ रख कर तीन मर्तबा यह दुआ फ़रमाई।फिर इर्शाद फ़र्माया : यह कह लिया करो, चुनांचे उन्हों ने तीन दिन तक यही अमल किया तो उन का वरम जाता रहा।
Read More...

खुम्बी (मशरूम) से आँखों का इलाज

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़ारमाया : "खुम्बी का पानी ऑखों के लिये शिफा है।"फायदा : हजरत अबू हुरैरह (र.अ) अपना वाकिआ बयान करते हैं, मैंने तीन या पाँच या सात खुम्बिया ली और उसका पानी निचोड़ कर एक शीशी में रख लिया, फिर वही पानी मैंने अपनी बाँदी की दूखती हुई आँख में डाला तो वह अच्छी हो गई।नोट : खुम्बी को हिन्दुस्तान के बाज इलाकों में साँप की छतरी और…
Read More...

जमात से नमाज़ अदा करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया:"जिस ने तक्बीरे ऊला के साथ चालीस दिन तक अल्लाह की रज़ा के लिए जमात के साथ नमाज़ पढी उस के लिये दोजख से नजात और निफाक से बरात के दो परवाने लिख दिये जाते हैं।"
Read More...

हलाल को हराम समझने का गुनाह

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है :"ऐ ईमान वालो ! अल्लाह ने तुम्हारे लिये जो पाक व लजीज चीजें हलाल की हैं, उन को अपने ऊपर हराम न किया करो और (शरई) हुदूद से आगे मत बढो, बेशक अल्लाह तआला हद से आगे बढ़ने वालों को पसन्द नहीं करता।”
Read More...

मदीना मुनव्वरा में इस्लाम का फैलना

मदीना में जियादा तर आबादियाँ क़बील-ए-औस व खज़रज की थीं, यह लोग मुशरिक और बुत परस्त थे। उनके साथ यहूद भी रहते थे। जब कभी क़बील-ए-औस व खजरज से यहूद का मुकाबला होता, तो यहूद कहा करते थे के अन क़रीब आखरी नबी मबऊस होने वाले हैं, हम उन की पैरवी करेंगे। और उनके साथ हो कर तुम को "क़ौमे आद" और "कौमे इरम" की तरह हलाक व बरबाद करेंगे।जब हज का मौसम आया, तो…
Read More...

जमात के लिये मस्जिद जाने की फ़ज़ीलत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:"जो शख्स बाजमात नमाज के लिये मस्जिद में जाए तो आते जाते हर कदम पर एक गुनाह मिटता है (हर कदम पर) और उसके लिये एक नेकी लिखी जाती है।"
Read More...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. AcceptRead More