[140+] Islamic Quotes in Hindi | पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब (ﷺ) की शिक्षाओं की एक झलक

[ इसलाम का दुष्प्रचार करने वाले जरूर पढें ] #IslamForAll #ProphetForAll #Prophet_Muhammad #ProphetofCompassion

1

समस्त संसार को बनाने वाला एक ही मालिक अल्लाह हैं। वह निहायत मेहरबान और रहम करने वाला है। उसी की ईबादत (पूजा) करो और उसी का हुक्म मानो।

2

अल्लाह ने इन्सान पर अनगिनत उपकार किए हैं। धरती और आकाश की सारी शक्तियॉ इन्सानों की सेवा मे लगा दी हैं। वही धरती और आकाश का मालिक हैं, वही तुम्हारा पालनहार हैं।

3

अल्लाह (यानि अपने सच्चे मालिक ) को छोड़कर अन्य की पूजा करना सबसे बड़ा पाप और अत्याचार है।

4

अल्लाह की नाफरमानी करके तुम उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते। फरमाबरदार बनकर रहो, इसमें तुम्हारा अपना ही भला है।

5

अल्लाह की याद से रूह को सकून मिलता हैं, उसकी इबादत से मन का मैल दूर होता है।

6

अल्लाह की निशानियों ( दिन, रात, धरती, आकाश, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु आदि की बनावट ) पर विचार करो। इस से अल्लाह पर ईमान मजबूत होगा और भटकने से बच जाओगे।

7

मैं अल्लाह की ओर से संसार का मार्ग दर्शक नियुक्त किया गया हूॅ। मार्ग दर्शन का कोई बदला तुमसे नही चाहता। मेरी बातें सुनों और मेरी आज्ञा का पालन करो।

8

मै कोई निराला और अजनबी पैगम्बर नही हूॅं। मुझसे पहले संसार मे मार्ग दर्शन के लिए बहुत-से रसूल आ चुके हैं, अपने धर्म-ग्रन्थों में देख लो या किसी ज्ञानी व्यक्ति से मालूम कर लो। मैं पहले के पैगम्बर की शिक्षा को पुन: स्थापित करने और कपटाचारियों के बन्धन से मानव को मुक्त कराने आया हू।

9

मैं इसलिए भेजा गया हू कि नैतिकता और उत्तम आचार को अंतिम शिखर तक पहुॅचा दू। मैं लोगो की कमर पकड़-पकड़कर आग में गिरने से बचा रहा हू, किन्तु लोग हैं कि आग ही की ओर लपक रहे हैं।

10

मैं दुनियावालों के लिए रहमत बनाकर भेजा गया हूॅ। तुम लोगो के लिए आसानियॉ पैदा करो; मुसीबते न पैदा करो। मॉ-बाप की सेवा करो। उनके सामने ऊॅची आवाज से न बोलो। उन्होने तुम पर बड़ा उपकार किया है, अत: तुम उनके आज्ञाकारी बनकर रहों।

11

मॉ-बाप यदि अन्याय का आदेश दे तो न मानों, बाकी बातों में उनकी आज्ञा का पालन करो।

12

सारे मानव एक मालिक(अल्लाह) के पैदा किए हुए है, एक मॉ-बाप ( आदम-हव्वा ) की संतान हैं। उनके बीच रंग-नस्ल जाति, भाषा, क्षेत्रीयता आदि का भेद भाव घोर अन्याय है। सारे लोग आदम की सन्तान है, उनसे प्यार करो घृणा न करो। उन्हे आशावान बनाओं निराश मत करो।

13

मानव में श्रेष्ठ वह हैं जो दूसरों का हमदर्द, पवित्र आचरण वाला और अपने पालनहार ( अल्लाह ) का आज्ञाकारी हैं।

14

तुम धरती वालों पर दया करो, आकाशवाला ( अल्लाह ) तुम पर दया करेगा।

15

वह व्यक्ति सब से अच्छा हैं जो अपने घरवालों और पड़ोसियों के लिए अच्छा हैं।

16

औरतों, गुलामों और यतीमों ( अनाथों ) पर विशेष रूप से दया करो।

17

जो अपने बेटे और बेटियो के बीच भेदभाव न करे और बेटियों का ठीक से पालन-पोषण करे, वह स्वर्ग में जाएगा।

18

जो बड़ो का आदर और छोटो से प्रेम न करे वह हम में से नहीं।

19

तुम ￰दुनयावी जिन्दगी मे मस्त होकर भूल मत जाओ, तुम सब को अपने किए हुए कर्मो का हिसाब अपने रब को देना हैं। आखिरत ( परलोक ) की सफलता ही वास्तविक सफलता हैं।

20

आखिरत ( परलोक ) की यातना बड़ी कठोर हैं। वहॉ कुल-वंश, सगे-सम्बन्धी, धन-दौलत और किसी की सिफारिश कुछ काम आने वाली नहीं। अल्लाह के हुक्म का पालन और उत्तम आचरण ही (उस की यातना से) बचने का एक मात्र साधन हैं। अपने को और अपने घर वालों को नरक की अग्नि से बचाओं।

21

अल्लाह के हुक्म के मुताबिक खर्च करके स्वंय को नरक की अग्नि से बचाओं। तुम्हारे माल में तुम्हारे सम्बन्धियों, गरीबो, अनाथो का भी हक हैं। उन के हक अदा करो।

22

दूसरो का धन अवैध रूप से न खाओं। तिजारत या समझौते के द्वारा वैध रूप से धन प्राप्त करो। चीजों मे मिलावट न करो, नाप-तौल मे कमी न करो। व्यापार में धोखा न दो। जो धोखा देता हैं हम में से नही।

23

बाजार मे भाव बढ़ाने के लिए ( गल्ला आदि ) चीजों को रोककर ( जखीरा कर के ) मत रखों। ऐसा करने वाला घोर यातना का अधिकारी है।

24

पैसे को गिन-गिनकर जमा न करो और न फिजूलखर्ची करो, मध्यम मार्ग को अपनाओं।

25

दूसरों के अपराध क्षमा कर दिया करो। दूसरों के ऐब का प्रचार न करो उसे छिपाओं, तुम्हारा रब तुम्हारे ऐबो पर परदा डाल दैगा। झूठ, चुगलखोरी, झूटे आरोप ( बोहतान ) से बचो। लोगो को बुरे नाम से न पुकारो।

26

अश्लीलता और निर्लज्जता के करीब भी न जाओ, चाहे वह खुली हो या छिपी।

27

दिखावे का काम न करो। दान छिपाकर दो। उपकार करके एहसान मत जताओ।

28

रास्ते से कष्टदायक चीजों ( कॉटे, पत्थर आदि ) को हटा दिया करो।

29

धरती पर नर्म चाल चलो, गर्व और घमण्ड न करो। जब बोलो अच्छी बात बोलो अन्यथा चुप रहो। अपने वचन और प्रतिज्ञा को पूरा करो।

30

सत्य और न्याय की गवाही दो, चाहे तुम्हारी अपनी या अपने परिवार-जनों की ही हानि क्यो न हो। अन्याय के विरूद्ध संघर्ष करने वाला अल्लाह का प्यारा होता है।

31

किसी बलवान को पछाड़ देना असल बहादुरी नही, बहादुरी यह है कि आदमी गुस्से पर काबू पाए।

32

मजबूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी अदा करो।

33

किसी सेवक से उसकी शक्ति से अधिक काम न लो, उस के आराम का ख्याल रखो। जो खुद खाओं उसे भी खिलाओं और जो खुद पहनो उसे भी पहनाओं। जानवरों पर दया करो, उनकी शक्ति से अधिक उनसे काम न लो।

34

किसी वस्तु का आवश्यकता से अधिक प्रयोग न करो। पानी का दुरूपयोग न करो, चाहे तुम नदी के किनारे ही क्यो न हो।

35

अपने शरीर, वस्त्र और घर को पाक-साफ रखों। जब सो कर उठो तो सबसे पहले अपने दोनो हाथों को धो लो। तुम्हे पता नही कि नींद में हाथ कहॉ-कहॉ गए हैं।

36

युद्ध मे औरतो, बच्चो, बीमारों और निहत्थो पर हाथ न उठाओं। फल वाले पेड़ो को न काटो। युद्ध के बन्दियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, उन्हें यातनाएं न दो।

37

जो कोई बुराई को देखे, तो अपनी ताकत के मुताबिक उसे रोकने की कोशिश करे, यदि रोकने की क्षमता ना हो तो दिल से उस को बुरा समझो।

38

सारे कर्मो का आधार नीयत ( इरादा ) हैं। गलत इरादे के साथ किए गए अच्छे कर्मो का भी कोई फल अल्लाह के यहॉ नही मिलेगा।

39

अपने भाई की मदद करो, चाहे वह अत्याचारी हो या नृशंसित (अत्याचार को सहन करने वाला)। नृशंसित की मदद यह है कि अत्याचारी से उसे छुड़ाया जाए और अत्याचारी की मदद यह है कि उसे अत्याचार से रोका जाए।

40

जो शख्स बिना आज्ञा अपने भाई के पत्र को देखे वह आग को देखेगा।

41

किसी भाई की ज़रूरत पूरी करने वाला ऐसा है कि गोया उस ने तमाम उम्र खुदा की ख़िदमत में बिता दी।

42

अपने किसी भाई को मुश्किल में देख कर खुश मत हो, मुम्किन है अल्लाह उसे मुश्किल से निकाल कर तुम्हें मुश्किल में डाल दे।

43

अपने मुसलमान भाई से मिलते वक़्त तुम्हारा मुस्कुरा देना भी सदका है। अच्छी बात कहना और बुराई से रोकना और भटके हुए को राह दिखाना भी सदका है।

44

मुसलमान, मुसलमान का भाई है उस पर जुल्म न करे न उसे जलील करे न हकीर समझे।

45

हलाल चीज़ों में से जो चाहो खाओ और पहनों लेकिन उस में दो चीजें न हों (1) फुजूल खर्ची (2) घमंड

46

दुनिया की कोई चीज़ तुम्हारे पास न हो, लेकिन यह चार चीजें हों तो तुम्हें कोई नुक्सान नहीं (i) बात करने का तरीका (ii) अमानत की हिफाज़त करना (iii) अच्छी आदत (iv) हलाल गिजा (आहार)।

47

जहाँ तक हो सके हर एक से नेकी करो चाहे नेक हो या बुरा।

48

किसी इंसान के दिल में ईमान और ईर्ष्या इकट्ठे नहीं रह सकते।

49

पड़ोसी का हक चारों तरफ़ 40-40 घरों तक है।

50

जो ईश्वर (अल्लाह) और कयामत पर ईमान रखता है उसे कह दो कि पड़ोसी का आदर करे।

51

शिर्क (अल्लाह के साथ साझेदारी) के बाद बदतर गुनाह अल्लाह के बन्दों को तकलीफ पहुँचाना है और ईमान के बाद अफ़ज़ल तरीन नेकी अल्लाह के बन्दों को राहत पहुँचाना है।

52

वह शख़्स जो बड़ों का आदर और छोटों पर दया नहीं करता, वह मेरी उम्मत में से नहीं है।

53

पेट से बढ़ कर कोई बुरा बरतन नहीं।

54

जो शख़्स इस बात से खुश हो कि लोग उस के लिए सम्मान के तौर पर खड़े हों वह अपना ठिकाना आग में समझे।

55

ईश्वर के नज़दीक दो कतरों (बून्द) से बढ़ कर कोई क़तरा पसन्द नहीं। पहला आँसू का क़तरा जो खुदा के डर से निकले, दूसरा खून का क़तरा जो खुदा की राह में गिरे।

56

बाज़ार से बच्चों के लिए जो चीज़ लाओ पहले लड़की को दो फिर लड़के को।

57

जो ज्ञान की राह पर चलता है, अल्लाह उस के लिए स्वर्ग का रास्ता आसान कर देता है।

58

ज्ञान हासिल करना हर मुसलमाल मर्द और औरत पर फर्ज है।

59

जिस ने ज्ञान का रास्ता अपनाया उस ने स्वर्ग का रास्ता अपनाया।

60

जिस ने ज्ञान हासिल करने में मृत्यु पाई गोया वह शहीद हुआ।

61

जिहालत (अज्ञानता) ग़रीबी की बदतरीन शक्ल है।

62

जन्म से मौत (कब्र) तक ज्ञान हासिल करो।

63

हमेशा सच्ची और हक़ बात कहो अगरचे कड़वी ही हो।

64

तीन काम ऐसे हैं जो इंसान की मौत के बाद भी जारी रहते हैं। (i) सदकाए जारिया (ii) वह ज्ञान जिस से लोग फ़ायदा उठाएँ (iii) नेक संतान जो उस के लिए दुआ करे।

65

बुलंद हिम्मती ईमान की निशानी है।

66

वह शख़्स बेदीन है जिस में ईमानदारी नहीं।

67

ईमान और कंजूसी एक जगह इकट्ठे नहीं हो सकते।

68

सब्र ईमान से ऐसे मिला हुआ है जैसे सिर से जिस्म मिला हुआ है और सब्र ईमान की रौशनी है।

69

सादगी ईमान की अलामत है।

70

हया और कम बोलना ईमान की शाखें हैं।

71

बेहतरीन लोग वह हैं जो अच्छे सदाचार के मालिक हैं।

72

अपनी मेहनत की कमाई से बेहतर खाना किसी शख़्स ने कभी नहीं खाया।

73

(बुरी और फ़िज़ूल बातों से) ख़ामोशी बहुत बड़ी हिकमत (समझदारी) है।

74

समता अख्तियार करने वाला किसी का मुहताज नहीं होता।

75

कर्म नियतों के साथ हैं। हर शख़्स को उसी का बदला मिलेगा जिस की उस ने नियत की है।

76

कपटाचारी की तीन निशानियाँ हैं। (i) जब बोले तो झूठ बोले। (ii) वादा करे तो पूरा न करे। (iii) अमानत ले तो ख्यानत करे।

77

हर नशे वाली चीज़ हराम है।

78

मोमिन की मिसाल खेती के पौदों की है जिसे हवा कभी झुका देती है कभी सीधा कर देती है और मुनाफ़िक की मिसाल सुनूबर के दरख्त की है जो खड़ा रहता है यहाँ तक कि एक ही दफ़ा उखड़ जाता है।

79

अल्लाह तआला ने हर बीमारी की शिफ़ा भी पैदा की है।

80

दुनिया में इस तरह रहो गोया प्रदेसी हो या राह चलने वाले।

81

वह ज़लील हुआ जिस ने माँ बाप को बुढ़ापे में पाया और उन की सेवा कर के स्वर्ग न हासिल की।

82

तुम में से बेहतर वह है जो कुरआन सीखे और दूसरों को सिखाए।

83

मय्यित (शव) के पीछे तीन चीजें चलती हैं, दो लौट आती हैं और एक रह जाती है। उस के पीछे उस के घर वाले, उस का माल और उस के कर्म चलते हैं। घर वाले और माल लौट आते हैं मगर कर्म साथ रह जाता है।

84

आदमी के झूटा होने के लिए यही काफी है कि वह सनी सुनाई बात बगैर जाँचे परखे आगे बयान कर दे।

85

दुनिया मोमिन का कैदखाना है और काफिर (नॉनमुस्लिम) के लिए जन्नत।

86

हर गुनाह की तौबा है मगर अशिष्टी की नहीं।

87

दुनिया की मुहब्बत हर ख़ता की जड़ है।

88

इंसाफ़ की बात ज़ालिम बादशाह के सामने कहना बहुत बड़ा जिहाद है।

89

रिश्वत लेने और देने वाला दोनो जहन्नमी हैं।

90

जिस शख्स ने हलाल तरीके से रोज़ी तलाश की और लोगों के सामने हाथ फैलाने से रुका अपने बच्चों की रोज़ी के लिए प्रयास किया और अपने पड़ोसी से अच्छी तरह से पेश आया तो अल्लाह तआला उस से इस शान से मुलाकात करेगा कि उस शख्स का चेहरा चौदहवीं के चाँद की तरह चमक रहा होगा।

91

नर्क में पहुँचाने वाला काम, झूठ बोलना है।

92

जो झूठ बोल बोल कर लोगों को हँसाए उस के लिए सख्त अज़ाब है।

93

अगर कोई बुरा काम देखे मगर मना न करे तो अल्लाह अज़ाब नाज़िल करेगा और सब को उस में घेर लेगा।

94

अल्लाह अत्याचारी को फुरसत देता है मगर जब पकड़ता है तो फिर नहीं छोड़ता।

95

जो मौत को याद रखे और उस की अच्छी तरह तयारी करे वह सब से ज़्यादा अकलमंद है।

96

ठोकर के बगैर कोई सब्र करने वाला नहीं बनता, तजुर्बे के बगैर कोई होशयार नहीं होता।

97

अकलमन्द वह है जो अपने अस्तित्व (नफ्स) की रक्षा करे और मौत के बाद के लिए अमल करे। निर्बल (कमज़ोर) वह है जो अस्तित्व का कहा माने और खुदा से उम्मीद रखे।

98

अल्लाह कहता है कि तीन आदमियों का कयामत के दिन मैं दुश्मन हूंगा। (i) वह जो मेरे नाम पर वादा करे और फिर तोड़ दे। (ii) जो किसी आज़ाद को बेच कर उस की कीमत खाए। (iii) जो किसी को मज़दूरी पर लगाए और काम होने पर उस को मज़दूरी न दे।

99

जो दया नहीं करता उस पर दया नहीं की जाएगी।

100

ताकतवर वह नहीं जो दूसरों को पिछाड़ दे, ताकतवर तो वह है जो गुस्से में अपने आप पर काबू रखे।

101

मालदारी माल की कसरत से नहीं बल्कि मालदारी दिल की मालदारी है।

102

चुगली करने वाला जन्नत में दाखिल न होगा।

103

एक दूसरे की खुशामद न करो यह ऐसा है जैसे किसी को हलाक करना।

104

मोमिन को चाहिए अपने आप को ज़लील न करे जो काम . ताक़त से बाहर हो उस में हाथ न डाले।

105

तमाम बुरी आदतों में दो सब से बुरी हैं। (i) बहुत ज़्यादा कंजूसी, (ii) बहुत ज़्यादा कायरता।

106

जब कोई मुसलमान मेवादार दरख्त लगाता है और उस के मेवे पंछी इंसान और जानवर खाते हैं तो वह दरख्त कयामत तक के लिए उस शख्स के लिए जारी रहने वाला सदका बन जाता है।

107

बहुत ज़्यादा न हँसा करो, ज़्यादा हँसी से दिल सख्त हो जाता है।

108

हसद नेकियों को ऐसे खा जाता है जैसे आग लकड़ी को और सदका गुनाहों को ऐसे बुझा देता है जैसे पानी आग को।

109

जो आदमी खूनी रिश्तों को तोड़े वह जन्नत में दाखिल न होगा।

110

एक आदमी बात करे और वह राज़ की बात हो तो वह अमानत है।

111

ख़रीदने व बेचने में कसम खाने से बचे रहो। वह माल बिकवा देती है मगर फिर उसे मिटा देती है।

112

अल्लाह दो बातों को पसन्द करता है सब्र और समता।

113

दो आदतें मोमिन में नहीं होती कंजूसी और बुरे सदाचार।

114

मुसलमान को गाली देना पाप है और उस से जंग करना कुफ़।

115

जन्नत माँ के कदमों तले है।

116

जो धोका दे वह हम में से नहीं।

117

रोना दिल को रौशन करता है।

118

बाप जन्नत के बड़े दरवाज़ों में से है चाहो तो उसे खो दो चाहो तो सुरक्षित कर लो।

119

अल्लाह की प्रसन्नता बाप की प्रसन्नता में है और अल्लाह का गुस्सा बाप के गुस्से में है।

120

दुनिया दौलत है और दुनिया में अच्छी दौलत नेक बीवी है।

121

औरत से चार बातों कि वजह से विवाह किया जाता है। (i) माल के लिए। (ii) ख़ानदान के लिए। (iii) खूबसूरती के लिए। (iv) दीन के लिए। बेहतर है कि दीन के लिए करे।

122

मज़लूम की आह से डर कि उस के और अल्लाह के बीच कोई पर्दा (रुकावट) नहीं।

123

इंसाफ की एक घड़ी सालों की इबादत से बेहतर है।

124

शरीफ़ तबीयत के लोग औरत की इज़्ज़त करते हैं और कमीनों के सिवा औरत की तौहीन कोई नहीं करता।

125

दुनिया आख़िरत की खेती है जो बोओगे वही काटोगे।

126

जुबान से अच्छी बात के सिवा कुछ न कहो।

127

जो शख़्स अपना गुस्सा निकाल लेने की ताकत रखता हो और फिर सब्र कर जाए, उस के दिल को अल्लाह सुकून और ईमान से भर देता देता है।

128

झूठी गवाही इतना बड़ा गुनाह है कि शिर्क के करीब जा पहुँचता है।

129

बदतरीन शख़्स वह है जिस के डर से लोग उस की इज्जत करें।

130

खाना खिलाना और जाने अंजाने को सलाम करना बेहतरीन इस्लाम (का अमल) है।

131

सवार पैदल को, चलने वाला बैठे को और थोड़े लोग ज़्यादा लोगों को सलाम करें।

132

मोमिन की जुबान दिल के पीछे होती है। यानी वह सोच समझ कर बोलता है।

133

जो शख़्स दूसरे को नेक काम की सलाह देता है तो उसे उसी के बराबर सवाब मिलता है जितना नेकी करने वाले को और जो किसी को बुरे काम की सलाह देता है उसे उसी के बराबर गुनाह होता है जितना बुरा काम करने वाले को।

134

ग़ल्ले (अनाज) को रोक कर बेचने वाला मलऊन (धिक्कृत) है।

135

औरतों में सब से अच्छी वह है जिसे उस का पति देखे तो खुश हो जाए।

136

सब से बड़ी नेकी अपने दोस्तों और साथियों की इज्जत करना है।

137

अल्लाह के नज़दीक बेहतरीन दोस्त वह है जो अपने दोस्त का भला चाहने वाला हो।

138

नर्म मिज़ाज और नर्म आदत वाले शख़्स पर जहन्नुम (नर्क) की आग हराम है।

139

जब तुम्हे नेकी कर के खुशी और बुराई कर के पछतावा हो तो तुम मोमिन हो।

140

जिस चीज़ का मैं ने हुक्म दिया उस पर अमल करो, जिस चीज़ से मना किया उस से रुक जाओ, तुम से पहली उम्मतें अपने नबियों से विरोध की वजह से हलाक हो गई थीं।

141

अपने माता पिता के साथ अच्छा व्यवहार करो, तुम्हारी संतान तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार करेगी।

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