हज़रत इसहाक अलैहि सलाम » Qasas ul Anbiya: Part 10

पैदाइश:

हजरत इब्राहीम अलैहि सलाम की उम्र सौ साल हुई तो अल्लाह तआला उनको बशारत सुनाई कि सारा अलैहि सलाम के पेट से भी तेरे एक बेटा होगा, उसका नाम इस्हाक रखना और कुरआन में है:

तर्जुमा – ‘पस हमने उसको इस्हाक़ की और उसके बाद (उसके और याकूब की बशारत दी। सारा कहने लगी, क्या मैं निगोड़ी बुढ़िया जनूंगी और जबकि यह इब्राहीम मेरा शौहर भी बूढ़ा है, वाक़ई यह तो बहुत अजीब बात है। फ़रिश्तों ने कहा, क्या तू अल्लाह के हुक्म पर ताज्जुब करती है? ऐ अहले बैत! तुम पर अल्लाह की बरकत व रहमत हो। बेशक अल्लाह तआला हर तरह हम्द के काबिल है और है बहुत बुजुर्ग।[सूरह हूद 11:71-73]

तर्जुमा-‘इब्राहीम ने कहा, क्या तुम मुझको इस बुढ़ापा आ जाने पर भी बशारत देते हो, यह कैसी बशारत दे रहे हो? फ़रिश्तों ने कहा, हम तुझको हक़ बात की बशारत दे रहे हैं, पस तू नाउम्मीद होने वालों में से न हो। इब्राहीम ने कहा और नहीं नाउम्मीद होते अपने परवरदिगार की रहमत से, मगर गुमराह ।[अल-हिज 15:51-56]

ख़त्ना:

हज़रत इस्हाक अलैहि सलाम जब आठ दिन के हुए तो हज़रत इब्राहीम अलैहि सलाम ने उनकी खतना करा दी।

इस्हाक़ अलैहि सलाम की शादी:

तौरात के एतबार से हज़रत इस्हाक अलैहि सलाम की शादी हज़रत इब्राहीम के भतीजे की बेटी से हुई और उससे उनके यहां दो बेटे ईसू और याकूब पैदा हुए। ईसू की शादी हज़रत इस्माईल अलैहि सलाम की साहबज़ादी बश्शामा या महल्लात से हुई और हजरत याकूब अलैहि सलाम अपने मामू के यहां व्याहे गए।

इस्हाक़ अलैहि सलाम का जिक्र कुरआन में:

कुरआन पाक में हजरत इस्हाक़ अलैहि सलाम का जिक्र सूरः अंबिया, सूरः मरयम, सूरः हूद और सूरः साफ़्फ़ात में आया है।

इंशा अल्लाह अगली पोस्ट में हम लूत अलैहि सलाम का तफ्सील में ज़िक्र करेंगे।

To be continued …

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