हजरत मूसा अलैहि सलाम » Qasas ul Anbiya: Part 15.4

जादूगरों की हार और फ़िरऔन का रद्देअमल (प्रतिक्रिया) .......... बहरहाल जश्न का दिन आ पहुंचा, जश्न के मैदान में तमाम शाहाना कर व फ़र के साथ फ़िरऔन तख्तनशी है और दरबारी भी दर्जे के एतबार से क़रीने से बैठे हैं और लाखों इंसान हक व बातिल के…

हजरत मूसा अलैहि सलाम » Qasas ul Anbiya: Part 15.3

हज़रत मूसा अलैहि सलाम की एक नबी की हैसियत से मिस्र को वापसी और हज़रत हारून अलैहि सलाम को रिसालत का मंसब अता किया जाना। मिस्र में दाखिला .......... जब हज़रत मूसा अलैहि सलाम नुबूवत के मंसब से सरफ़राज़ होकर कलामे रब्बानी से फैजयाब बनकर और…

शबे क़द्र और इस की रात का महत्वः (शबे क़द्र की फ़ज़ीलत हिंदी में)

शबे क़द्र का अर्थ: रमज़ान महीने में एक रात ऐसी भी आती है, जो हज़ार महीने की रात से बेहतर है। जिसे शबे क़द्र कहा जाता है। शबे क़द्र का अर्थ होता हैः "सर्वश्रेष्ट रात", ऊंचे स्थान वाली रात”, लोगों के नसीब लिखी जानी वाली रात।शबे क़द्र बहुत…

हजरत मूसा अलैहि सलाम » Qasas ul Anbiya: Part 15.2

हज़रत मूसा अलैहि सलाम की मिस्र से मदयन के लिए हिजरत मूसा अलैहि सलाम और मदयन का इलाका .......... हजरत शुऐब अलैहि सलाम के वाक़ियों में मदयन का जिक्र आ चुका है। मदयन की आबादी मिस्र से आठ मंजिल पर वाकए थी। हजरत मूसा अलैहि सलाम सलाम चूंकि…

हजरत मूसा अलैहि सलाम » Qasas ul Anbiya: Part 15.1

हज़रत मूसा अलैहि सलाम की शुरूआती जिंदगी और बनी इसराईल मिस्र में .......... हज़रत यूसुफ़ अलैहि सलाम के किस्से में बनी इसराईल का जिक्र सिर्फ इसी क़दर किया गया था कि हज़रत याकूब और उनका ख़ानदान हज़रत यूसुफ़ अलैहि सलाम से मिलने मिस्र में आए,…

हजरत शुएब अलैहि सलाम» Qasas ul Anbiya: Part 14

हज़रत शुऐब अलैहि सलाम की कौम हज़रत शुऐब अलैहि सलाम मदयन या मदयान की ओर भेजे गए थे। मदयन एक कबीले का नाम है, जो हजरत इब्राहीम अलैहि सलाम के बेटे मदयन की नस्ल से था। शुएब अलैहि सलाम भी चूंकि उसी नस्ल और उसी क़बीले से थे, इसलिए उनके भेजे जाने…

कुरान से पहले मुस्लिम कौन सी किताब का अनुसरण करते थे…?

» सवाल: कुरान दुनिया मे आने से पहले मुस्लिम कौन सी किताब का अनुसरण करते थे...? » जवाब: कुरआन नाजिल होने से पहले वहां चार किस्म के लोग थे : 1. यहूदी - हज़रत मूसा (अलैह सलाम) के मानने वाले, इनके पास आसमानी किताब थी जिसे आज दुनिया (Old…

हज़रत युसूफ अलैहि सलाम (भाग: 4) » Qasas ul Anbiya: Part 13.4

युसूफ अलैहि सलाम का भाइयों को हकीकत बताना बहरहाल हज़रत याकूब अलैहि सलाम ने अपने बेटों से फ़रमाया : ‘देखो, एक बार फिर मिस्र जाओ और यूसफ़ और उसके भाई की तलाश करो और अल्लाह की रहमत से नाउम्मीद और मायूस न हो, इसलिए कि अल्लाह की रहमत से ना…

हज़रत युसूफ अलैहि सलाम (भाग: 3) » Qasas ul Anbiya: Part 13.3

युसूफ अलैहि सलाम की बेगुनाही का साबित होना साक्री ने यह सब मामला बादशाह के सामने जा सुनाया। बादशाह ने ख्वाब की ताबीर का मामला देखकर कहा कि ऐसे आदमी को मेरे पास लाओ। जब बादशाह का दूत हजरत यूसुफ़ अलैहि सलाम के पास पहुंचा तो हजरत यूसुफ ने…

हज़रत युसूफ अलैहि सलाम (भाग: 2) » Qasas ul Anbiya: Part 13.2

अज़ीज़े मिस्र की बीवी जुलेखा और यूसुफ (अ.)  .......... कुएं में डाले जाने और गुलामी के बाद अब हज़रत यूसुफ़ की एक और आज़माइश शुरू हुई, वह यह कि हजरत यूसुफ़ अलैहि सलाम की जवानी का आलम था। हुस्न और खूबसूरती का कोई ऐसा पहलू न था जो उनके अन्दर…

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. AcceptRead More