दज्जाल की हकीकत (फितना ऐ दज्जाल) पार्ट 6

Complete Story of Dajjal from Birth to Death (Part 6)

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दज्जाल के मुतालिक जो तीन कौल मशहूर है के ये दज्जाल है उनमे पहला सामरी जादूगर, दुसरा हैरम आबीफ तीसरा है अमेरिका
आईये इस पार्ट में अमेरिका पर एक नजर  डालते है।

३. अमेरिका

New World Order

” बाज हजरात का कहना है कि अमेरिका दज्जाल है, क्योंकि दज्जाल की भी एक आंख होगी और अमेरिका की भी एक आंख है, इसकी मादियत की आंख खुली जबकि रूहानियत की आंख चौपट है, वो मुसलमानो को एक आंख से और गैर मुसलमानो को दुसरी से देखता है, इसको अपने फायदे की चीज नजर आती है, दुसरे के नुकसान से इसे कोई लेना देना नही, इसकी करेंसी पर एक आंख बनी हुई है, दज्जाली आंखा, जो शैतानी तिकोन और पुर असरार अलामत के बीच है, इसकी सरजमीन पर दज्जाली तहजीब जन्म ले चुकी है, परवान चढ रही है, और मादी ताकतो पर गैर मामूली इकतदार की बदौलत वो “New World Order” के जरिए दुनिया मे दज्जाली निजाम बरपा करना चाहता है, इसके एक सदर का बयान रिकोर्ड पर है वो कहता है “मुझे खुदा की तरफ से बराये रास्त हिदायत मिलती है”

ये तो दावा ए नुबूवत करने वाला है और दज्जाल पहले ऐसा ही दावा करेगा, सदर साब ये भी फरमा चुके है ” हम तुम्हे पत्थरो के दौर मे भेज देगे” ये फिरओनी लहजा तो दावा ए खुदा के हम माअनी है, और दज्जाल आखिर मे खुदाई का दावा करेगा, दज्जाल दरअसल झूठी खुदाई का दुसरा नाम है, वगैरह वगैरह।

जो हजरात इस राय को अहमियत देते है, वो दो तरह के है:

  • 1) कुछ तो हदीस का इल्म ना होने और गलतफहमी की बुनियाद पर ऐसा समझते है, इनके पेश नजर कोई गलत मकसद नही, ये लोग माजूर है।
  • 2) कुछ जान बुझकर किसी खास मकसद (मसलन यहुदियत की खिदमत और मुसलमानो को दज्जाली फितने से बेखबर रखकर दज्जाल की राह हमवार करने) के लिए ऐसा करते है, ये खुद दज्जाल है, क्योंकि हदीस शरीफ मे आता है कि दज्जाल अकबर से पहले तीस झूठे दज्जाल निकलेगे।

एक हदीस मे तो सत्तर से उपर कुछ दज्जालो का जिक्र है दोनो बाते और दोनो तादाद अपनी जगह दुरूस्त है।

कुछ दज्जाल बी केटेगरी के होगे और कुछ सी केटेगरी के, पहले तीस होगे, दुसरी किस्म सत्तर से कुछ उपर होगी, हदीस को जिसने भी सरसरी नजर से देखा है उसे यकीन है कि दज्जाल कोई मुल्क नही, बल्कि ये एक शख्स है, जिसको इंसानो की अजमाईश के लिए गैर मामूली सलाहियते और ताकते दी गई है, लेकिन वो इनको हमेशा गलत मकसद के लिए इस्तेमाल करेगा। © www.Ummat-e-Nabi.com

हजरत मौलाना अबु अल हसन नदवी रहीमुल्लाह अलैहि  दज्जाल और दज्जालीयत पर अपनी मशहूर किताब “मआरका इमान व मादियत” के सफा 135 पर फरमाते है:

❛ जिन हदीस मे दज्जाल का जिक्र आया है और इसके ओसाफ व अलामत बयान की गई है, वो तवातुर मआनवी के हद तक पहुंच चुकी है, इनमे इस बात की साफ वजाहत है कि वो एक मुयीन शख्स होगा, जिसकी कुछ मुयीन सिफात होगी, वो एक खास और मुयीन जमाने मे जाहिर होगा (जिसकी सही तारीख व वक्त से हमको आगाह नही किया गया) नीज एक मुयीन कौम पर जाहिर होगा, जो यहुद है, इसलिए इन तमाम वजाहतो की मौजूदगी मे ना उसके इंकार की गुंजाइश है ना जरूरत।
हदीस मे इसका भी ताईन कर दिया गया है, के वो फिलिस्तीन मे जाहिर होगा और वहा उसको ऊरूज वो गलबा हासिल होगा, दर हकीकत फिलिस्तीन वो आखिरी स्टेज है जहा इमान व मादियत और हक व बातिल की ये कशमकश जारी है, और मंजर आम पर आने वाली है, एक तरफ अखलाकी व कानूनी हुकूक रखने वाली कौम है, जिसका सबसे बडा हथियार और सबसे बडी दलील ये है कि वो दीन और दावत इलल्लाह के हामिल है, और इंसानियत की फलाह और मुसावत के दाई है।
दुसरी तरफ वो कौम है जो एक खास नसल और खुन के तकद्दुस व बरतरी के काईल है, और पूरे आलम और इंसानियत के सारे वसाईल को इस नस्ल और उन्सर के इक्तदार वा सियादत के अंदर ले आना चाहती है, और फनी सलाहियतो और उलूम तबीया के वसाईल व जराये का बहुत बडा जखीरा इसको हासिल है।
इंसानियत के इस हकाकी और फैसला कुन मआरका के असार मशरिकी अरबी और मशरिकी इस्लामी के अफक पर अब जाहिर हो चुके है, और हालत व वाक्यात वो मुनासिब फिजा और माहौल तैयार कर रहे है, जिसमे ये कहानी अपने सच्चे किरदारो के साथ दोहराई जाएगी”।

इस इबारत को गौर से पढा जाए तो मजमून के शुरू मे दिए गए तीनो सवालात के जवाब आ जाते है, दज्जाल कौन है? कहा है? कब निकलेगा? लेकिन फिलहाल हम इन तीनो की तशरीह नही करते, इस वक्त हम पहले सवाल पर चल रहे है।

– (तालीफ- मुफ्ती अबु लुबाबा शाह मंसूर)

To be Continue … 

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