दज्जाल की हकीकत (फितना ऐ दज्जाल) पार्ट 2

Complete Story of Dajjal from Birth to Death (Part 2)

✦ दज्जाल का नाम और इसका मतलब:

यहुदी अपने इस नजात दहिन्दा का आखिरी नाम यबुल, युबील, या हुबल बताते है, जो हमारी इस्लामी इस्तलाह मे तागुत और बुतो का नाम है और इसका लकब इनके यहा مسیحا या مسیا है।

दज्जाल का असल नाम मालूम नही, क्योंकि हदीस मे नही आया, ये अपने लकब से मशहूर है, इस्लामी इस्तलाह मे इसका लकब दज्जाल है और ये लफ्ज इसकी पहचान और अलामत बन गया है।

– दज्जाल का मादह د ج ل से है:

दज्जाल का एक मायना है ढांप लेना, लपेट लेना, दज्जाल इसलिए कहा गया क्योंकि इसने हक को बातिल से ढांप दिया है, या इसलिए कि इसने अपने झूठ, जालसाजी, और फरेबकारी के जरिए अपने कुफ्र को लोगो से छिपा लिया है।

एक कौल ये है कि चुंकि वो अपनी फौजो से जमीन को ढांप लेगा, इसलिए इसे दज्जाल कहा गया है, इस लकब मे इस तरफ इशारा है कि “दज्जाल ऐ अकबर” बहुत बडे बडे फितनो वाला है, वो इन फितनो के जरिए अपने कुफ्र को जालसाजी के साथ पेश करेंगा और अल्लाह के बंदो को शक व शुबहात मे डाल देगा और ये कि इसका फितना आलमी फितना होगा। © www.ummat-e-nabi.com/home

– दज्जाल, अरबी जुबान मे जालसाज, धोकेबाज, और फरेबकार को भी कहते है।

दजल किसी नकली चीज पर सोने का पानी चढाने को कहते है, दज्जाल का ये नाम इसलिए रखा गया है कि झूठ और फरेब इसकी शख्सियत का नुमाया तरीन पहलु होगा, वो जाहिर कुछ करेगा, अंदर कुछ होगा, इसके तमाम दावे, मंसूबे, सरगर्मीया और प्रोग्राम एक ही महोर के गिर्द गर्दिश करेंगे और वो है: दजल और फरेब ।

इसके हर काम पर धोकाधड़ी और गलत बयानी का साया होगा, इसकी कोई चीज, कोई अमल, कोई कौल, इसके शैतानी आदत के असर से खाली ना होगा।

– इसका एक मायना ऐसी मरहम या लीप जिसकी तह जिल्द पर बिछाकर बदनुमाई छिपाई जाती है।

आप इसके ताअरूफ को सामने रखे और इसके खुशनुमा अलफाज को देखे जिन्हे मगरिबी मिडिया (जो दज्जाल की पहली आलमी कान्फ्रेंस से लेकर इसके आलमी वक्ती इक्तदार तक इसकी नुमाइंदगी का फर्ज अंजाम देगा) ने वाजेह कर रखा है और इनके सहारे अपनी खुनखारी, संगदिली और कत्ल व गारतगिरी को छिपा रखा है, मसलन-> इंसानी हुकूक, अखलाकीयत, जम्हूरियत, मआशी खुशहाली, समाजी सुधार, कामयाबी की खातिर खानदानी मंसूबा बंदी, फनून लतीफे, कानून व दस्तूर ये सब अलफाज सिर्फ नारे है इनके पिछे सिर्फ धोका है।

मसीह दज्जाल की हकीकत ?

दज्जाल को आहादीस मे “मसीह दज्जाल” भी कहा गया है, दज्जाल ऐ अकबर का नाम मसीह क्यू रखा गया है?
इसके बारे मे बहुत सारे अकवाल है, मगर सबसे ज्यादा वाजेह कौल ये है कि दज्जाल को मसीह कहने की वजह ये है कि इसकी एक आंख और आबरू नही है।

इब्ने फारस कहते है: मसीह वो है जिसके चेहरे के दो हिस्सो मे से एक हिस्सा मिटा हुआ हो, इसमे ना आंख हो और ना ही आबरू।

इसलिए दज्जाल को मसीह कहा गया है, फिर उन्होंने हजरत हुजेफा (रजि अल्लाहु अन्हु) की सनद से रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की हदीस से इस्तदलाल किया है ❝ बिलाशुबा दज्जाल मिटी हुई आंख वाला है, जिसका एक गलीज बद्दा (फुल्ली) है।❞

फुल्ली, अरबी के लफ्ज “जफुराह” का तर्जुमा है, ये उस गोश्त को कहते है जो कुछ लोगो की आंख के किनारे पर उग आता है और बाज वक्त आंख की पुतली तक फैल कर उसे ढांप लेता है।

✦ वजाहत :

बाज हदीस मे दज्जाल को बाय आंख से काना कहा गया है, और बाज मे दाई आंख से। बजाहिर इसमे दोनो बाते आपस मे टकराती है मगर एक और हदीस सेे पुरी हकीकत वाजेह होती है कि दज्जाल की दोनो आंखे ऐबदार होगी, बाई आंख बे नूर होगी, और दाई आंख अंगूर की तरह बाहर को निकली होगी।

हमारे यहा मसीह का लफ्ज हजरत ईसा अलेहिस्सलाम के लिए भी बोला जाता है, इसकी वजह और मसीह सच्चा और मसीह झूठा का फर्क नुजूल ईसा अलेहिस्सलाम के दुसरे पार्ट मे वाजेह होगा इंशाअल्लाह।

To be Continue …

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