गुलामो का ये कहना के नाकिस है ये किताब, सिखाती नहीं हमे गुलामी के उसूल: डॉ. अल्लामा इकबाल

Gulaamo ka ye kehna ke naqees hai ye kitaab (Quran), Sikhaati nahi hume Gulaami ke …

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३ साल की कड़ी मेहनत के बाद राजीव भाई ने पेश किया कुरान का मारवाड़ी अनुवाद

जी हाँ ! जहा आज दुनिया भर में कुरान और इस्लाम के खिलाफ न जाने …

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आज़ादी मुबारक …. ये आज़ादी हमें याद दिलाती है (Happy Independence Day)

तमाम हिन्दोस्तानी भाई बहनों को यौम-ए-आज़ादी मुबारक (Happy Independence Day)…. ये आज़ादी हमें याद दिलाती …

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Ex Jain Brother Vijay Kumar Jain Accepted Islam विजय कुमार जैन ने अपनाया इस्लाम! रखा अब्दुल वाहिद अपना नाम

विजय कुमार जैन ने अपनाया इस्लाम! रखा अब्दुल वाहिद अपना नाम

जानिए – पूर्व जैन धर्म से इस्लाम लाने की दास्तान – विजय कुमार जैन से अब्दुल वाहिद तक का इब्रतनाक वाकिया | Janiye – Ex Jain Brother ke Islam laane ki dasta – Vijay Kumar Jain se Abdul Wahid tak ka Ibratnaak Wakiya

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16 Saal ke Researh ke baad Isayi Padri ne Apnaya Islam 16 साल के अध्यन के बाद ईसाई पादरी ने अपनाया इस्लाम

16 साल के अध्ययन के बाद ईसाई पादरी मैथ्यू पाल गिल ने अपनाया इस्लाम

पूर्व ईसाई पादरी मैथ्यू पाल गिल ने इस्लाम स्वीकार किया और मौलाना सलमान गिल बन गए। उन्होंने 16 साल की गहन शोध के बाद इस्लाम को स्वीकार किया। उन्होंने सच्चाई की खोज में विभिन्न धर्मों के विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया और अल्हम्दुलिल्लाह उन्हें अपने सच्चे रब (अल्लाह) का वास्तविक धर्म यानी इस्लाम मिल गया है।

*बराए मेहरबानी इस विडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने में हमारा तावून करे |
– जज़ाकअल्लाहु खैरण कसीरा !

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तलाक, हलाला और खुला की हकीकत (Triple Talaq & Halala)

तलाक, हलाला और खुला की हकीकत (Triple Talaq & Halala)

• तलाक की हकीकत:

पति पत्नी में अगर किसी तरह भी निबाह नहीं हो पा रहा है तो अपनी ज़िदगी जहन्नम बनाने से बहतर है कि वो अलग हो कर अपनी ज़िन्दगी का सफ़र अपनी मर्ज़ी से पूरा करें इसी को तलाक कहते है जो कि इंसान होने के नाते उनका हक है, इसी लिए दुनियां भर के कानून में तलाक़ की गुंजाइश मौजूद है। और इसी लिए पैगम्बरों के दीन (धर्म) में भी तलाक़ की गुंजाइश हमेशा से रही है।

यूं तो तलाक़ कोई अच्छी चीज़ नहीं है और सभी लोग इसको ना पसंद करते हैं इस्लाम में भी यह एक बुरी बात समझी जाती है लेकिन इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं कि तलाक़ का हक ही इंसानों से छीन लिया जाए।

• दीने इब्राहीम की रिवायात के मुताबिक अरब जाहिलियत के दौर में भी तलाक़ से अनजान नहीं थे, उनका इतिहास बताता है कि तलाक़ का कानून उनके यहाँ भी लगभग वही था जो अब इस्लाम में है लेकिन कुछ बिदअतें उन्होंने इसमें भी दाखिल कर दी थी. किसी जोड़े में तलाक की नौबत आने से पहले हर किसी की यह कोशिश होनी चाहिए कि जो रिश्ते की डोर एक बार बन्ध गई है उसे मुमकिन हद तक टूटने से बचाया जाए,

जब किसी पति-पत्नी का झगड़ा बढ़ता दिखाई दे तो अल्लाह ने कुरआन में उनके करीबी रिश्तेदारों और उनका भला चाहने वालों को यह हिदायत दी है कि वो आगे बढ़ें और मामले को सुधारने की कोशिश करें इसका तरीका कुरआन ने यह बतलाया है कि “एक फैसला करने वाला शोहर के खानदान में से मुकर्रर करें और एक फैसला करने वाला बीवी के खानदान में से चुने और वो दोनों जज मिल कर उनमे सुलह कराने की कोशिश करें, इससे उम्मीद है कि जिस झगड़े को पति पत्नी नहीं सुलझा सके वो खानदान के बुज़ुर्ग और दूसरे हमदर्द लोगों के बीच में आने से सुलझ जाए.”

♥ कुरआन ने इसे कुछ यूं बयान किया है –

“और अगर तुम्हे शोहर बीवी में फूट पड़ जाने का अंदेशा हो तो एक हकम (जज) मर्द के लोगों में से और एक औरत के लोगों में से मुक़र्रर कर दो, अगर शोहर बीवी दोनों सुलह चाहेंगे तो अल्लाह उनके बीच सुलह करा देगा, बेशक अल्लाह सब कुछ जानने वाला और सब की खबर रखने वाला है”[ सूरेह निसा ४:35 ]

इसके बावजूद भी अगर शोहर और बीवी दोनों या दोनों में से किसी एक ने तलाक का फैसला कर ही लिया है तो शोहर बीवी के खास दिनों (Menstruation) के आने का इन्तिज़ार करे, और खास दिनों के गुज़र जाने के बाद जब बीवी पाक़ हो जाए तो बिना हम बिस्तर हुए कम से कम दो जुम्मेदार लोगों को गवाह बना कर उनके सामने बीवी को एक तलाक दे, यानि शोहर बीवी से सिर्फ इतना कहे कि ”मैं तुम्हे तलाक देता हूँ”

* तलाक हर हाल में एक ही दी जाएगी दो या तीन या सौ नहीं, जो लोग जिहालत की हदें पार करते हुए दो तीन या हज़ार तलाक बोल देते हैं यह इस्लाम के बिल्कुल खिलाफ अमल है और बहुत बड़ा गुनाह है अल्लाह के रसूल (सल्लाहू अलैहि वसल्लम) के फरमान के मुताबिक जो ऐसा बोलता है वो इस्लामी शर्यत और कुरआन का मज़ाक उड़ा रहा होता है.

इस एक तलाक के बाद बीवी 3 महीने यानि 3 तीन हैज़ (जिन्हें इद्दत कहा जाता है और अगर वो प्रेग्नेंट है तो बच्चा होने) तक शोहर ही के घर रहेगी और उसका खर्च भी शोहर ही के जुम्मे रहेगा लेकिन उनके बिस्तर अलग रहेंगे, कुरआन ने सूरेह तलाक में हुक्म फ़रमाया है कि इद्दत पूरी होने से पहले ना तो बीवी को ससुराल से निकाला जाए और ना ही वो खुद निकले, इसकी वजह कुरआन ने यह बतलाई है कि इससे उम्मीद है कि इद्दत के दौरान शोहर बीवी में सुलह हो जाए और वो तलाक का फैसला वापस लेने को तैयार हो जाएं।

* अक्ल की रौशनी से अगर इस हुक्म पर गोर किया जाए तो मालूम होगा कि इसमें बड़ी अच्छी हिकमत है। हर समाज में बीच में आज भड़काने वाले लोग मौजूद होते ही हैं, अगर बीवी तलाक मिलते ही अपनी माँ के घर चली जाए तो ऐसे लोगों को दोनों तरफ कान भरने का मौका मिल जाएगा, इसलिए यह ज़रूरी है कि बीवी इद्दत का वक़्त शोहर ही के घर गुज़ारे।

फिर अगर शोहर बीवी में इद्दत के दौरान सुलह हो जाए तो फिरसे वो दोनों बिना कुछ किये शोहर और बीवी की हेस्यत से रह सकते हैं इसके लिए उन्हें सिर्फ इतना करना होगा कि जिन गवाहों के सामने तलाक दी थी उनको खबर करदें कि हम ने अपना फैसला बदल लिया है, कानून में इसे ही ”रुजू” करना कहते हैं और यह ज़िन्दगी में दो बार किया जा सकता है इससे ज्यादा नहीं। (सूरेह बक्राह-229)

शोहर रुजू ना करे तो इद्दत के पूरा होने पर शोहर बीवी का रिश्ता ख़त्म हो जाएगा, लिहाज़ा कुरआन ने यह हिदायत फरमाई है कि इद्दत अगर पूरी होने वाली है तो शोहर को यह फैसला कर लेना चाहिए कि उसे बीवी को रोकना है या रुखसत करना है, दोनों ही सूरतों में अल्लाह का हुक्म है कि मामला भले तरीके से किया जाए, सूरेह बक्राह में हिदायत फरमाई है कि अगर बीवी को रोकने का फैसला किया है तो यह रोकना वीबी को परेशान करने के लिए हरगिज़ नहीं होना चाहिए बल्कि सिर्फ भलाई के लिए ही रोका जाए।

♥ अल्लाह कुरआन में फरमाता है –

“और जब तुम औरतों को तलाक दो और वो अपनी इद्दत के खात्मे पर पहुँच जाएँ तो या तो उन्हें भले तरीक़े से रोक लो या भले तरीक़े से रुखसत कर दो, और उन्हें नुक्सान पहुँचाने के इरादे से ना रोको के उनपर ज़ुल्म करो, और याद रखो के जो कोई ऐसा करेगा वो दर हकीकत अपने ही ऊपर ज़ुल्म ढाएगा।

और अल्लाह की आयातों को मज़ाक ना बनाओ और अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों को याद रखो और उस कानून और हिकमत को याद रखो जो अल्लाह ने उतारी है जिसकी वो तुम्हे नसीहत करता है, और अल्लाह से डरते रहो और ध्यान रहे के अल्लाह हर चीज़ से वाकिफ है”

[ सूरेह बक्राह २:231 ]

लेकिन अगर उन्होंने इद्दत के दौरान रुजू नहीं किया और इद्दत का वक़्त ख़त्म हो गया तो अब उनका रिश्ता ख़त्म हो जाएगा, अब उन्हें जुदा होना है.
इस मौके पर कुरआन ने कम से कम दो जगह (सूरेह बक्राह आयत 229 और सूरेह निसा आयत 20 में) इस बात पर बहुत ज़ोर दिया है कि मर्द ने जो कुछ बीवी को पहले गहने, कीमती सामान, रूपये या कोई जाएदाद तोहफे के तौर पर दे रखी थी उसका वापस लेना शोहर के लिए बिल्कुल जायज़ नहीं है वो सब माल जो बीवी को तलाक से पहले दिया था वो अब भी बीवी का ही रहेगा और वो उस माल को अपने साथ लेकर ही घर से जाएगी, शोहर के लिए वो माल वापस मांगना या लेना या बीवी पर माल वापस करने के लिए किसी तरह का दबाव बनाना बिल्कुल जायज़ नहीं है.

(नोट– अगर बीवी ने खुद तलाक मांगी थी जबकि शोहर उसके सारे हक सही से अदा कर रहा था या बीवी खुली बदकारी पर उतर आई थी जिसके बाद उसको बीवी बनाए रखना मुमकिन नहीं रहा था तो महर के अलावा उसको दिए हुए माल में से कुछ को वापस मांगना या लेना शोहर के लिए जायज़ है.)

अब इसके बाद बीवी आज़ाद है वो चाहे जहाँ जाए और जिससे चाहे शादी करे, अब पहले शोहर का उस पर कोई हक बाकि नहीं रहा.

इसके बाद तलाक देने वाला मर्द और औरत जब कभी ज़िन्दगी में दोबारा शादी करना चाहें तो वो कर सकते हैं इसके लिए उन्हें आम निकाह की तरह ही फिरसे निकाह करना होगा और शोहर को महर देने होंगे और बीवी को महर लेने होंगे.

# अब फ़र्ज़ करें कि दूसरी बार निकाह करने के बाद कुछ समय के बाद उनमे फिरसे झगड़ा हो जाए और उनमे फिरसे तलाक हो जाए तो फिर से वही पूरा प्रोसेस दोहराना होगा जो मैंने ऊपर लिखा है,

# अब फ़र्ज़ करें कि दूसरी बार भी तलाक के बाद वो दोनों आपस में शादी करना चाहें तो शरयत में तीसरी बार भी उन्हें निकाह करने की इजाज़त है. लेकिन अब अगर उनको तलाक हुई तो यह तीसरी तलाक होगी जिस के बाद ना तो रुजू कर सकते हैं और ना ही आपस में निकाह किया जा सकता है.

• हलाला:

# अब चौथी बार उनकी आपस में निकाह करने की कोई गुंजाइश नहीं लेकिन सिर्फ ऐसे कि अपनी आज़ाद मर्ज़ी से वो औरत किसी दुसरे मर्द से शादी करे और इत्तिफाक़ से उनका भी निभा ना हो सके और वो दूसरा शोहर भी उसे तलाक देदे या मर जाए तो ही वो औरत पहले मर्द से निकाह कर सकती है, इसी को कानून में ”हलाला” कहते हैं.

लेकिन याद रहे यह इत्तिफ़ाक से हो तो जायज़ है जान बूझ कर या प्लान बना कर किसी और मर्द से शादी करना और फिर उससे सिर्फ इस लिए तलाक लेना ताकि पहले शोहर से निकाह जायज़ हो सके यह साजिश सरासर नाजायज़ है और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने ऐसी साजिश करने वालों पर लानत फरमाई है.

• खुला:

अगर सिर्फ बीवी तलाक चाहे तो उसे शोहर से तलाक मांगना होगी, अगर शोहर नेक इंसान होगा तो ज़ाहिर है वो बीवी को समझाने की कोशिश करेगा और फिर उसे एक तलाक दे देगा, लेकिन अगर शोहर मांगने के बावजूद भी तलाक नहीं देता तो बीवी के लिए इस्लाम में यह आसानी रखी गई है कि वो शहर काज़ी (जज) के पास जाए और उससे शोहर से तलाक दिलवाने के लिए कहे, इस्लाम ने काज़ी को यह हक़ दे रखा है कि वो उनका रिश्ता ख़त्म करने का ऐलान कर दे, जिससे उनकी तलाक हो जाएगी, कानून में इसे ”खुला” कहा जाता है.

यही तलाक का सही तरीका है लेकिन अफ़सोस की बात है कि हमारे यहाँ इस तरीके की खिलाफ वर्जी भी होती है और कुछ लोग बिना सोचे समझे इस्लाम के खिलाफ तरीके से तलाक देते हैं जिससे खुद भी परेशानी उठाते हैं और इस्लाम की भी बदनामी होती है.
– (मुशर्रफ अहमद)

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दावते इस्लाम की एक ऐसी कोशिश जिसमे मिडिया भी हुई शरीक

*पुणे (महाराष्ट्र): बहरहाल इसमें कोई शक नही के जो आल्लाह की राह में जद्दो जहद …

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*इंडोनेशिया के एक स्कूल ने अपने सभी छात्रों की मां को एक दिन स्कूल में …

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मोहम्मद साहब (स.) का संशिप्त जीवन परिचय और आपके मिशन की कुछ झलकिया

मोहम्मद साहब (स.) का संशिप्त जीवन परिचय और आपके मिशन की कुछ झलकिया

*अल्लाह के आखरी पैगम्बर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का संशिप्त जीवन परिचय और आपके मिशन की कुछ झलकिया ,..
– इस स्पीच में हम इस्लाम के अंतिम संदेष्ठा पैगम्बर मोहम्मद (स.) साहब की जीवनी का संशिप्त में परिचय करेंगे ,. वैसे तो आपकी जीवनी का अभ्यास एक स्पीच में करना बिलकुल मुमकिन नहीं , लिहाजा हम इस स्पीच में कुछ अहम बातो पर ही रौशनी डालने की कोशिश कर रहे है जो की सारे संसार के लिए पैगम्बर मोहम्मद साहब की तरफ से महत्वपूर्ण उपहार है ,…
*बराए मेहरबानी इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करने में हमारी मदद करे ..
– जजाक अल्लाहु खैरण कसीरा !

( Mohammad Sahab (SAW) ka Jivan Parichay )
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वो १३ बाते जिसकी वजह से अफ्रीकी फुटबॉलर "इमानुअल एडबेयर" ने अपनाया इस्लाम Emmanuel Adebayor accept islam

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Technology Industries aaj wajud me nahi hoti ! agar Musalman Scientist Na Hotey – Mrs Carlton Fiorina

“ट्विन टावर के हादसे के २ हफ्ते बाद ही जब इस्लाम पर सारी दुनिया दहशतगर्दी के इलज़ामात लगा रही थी तब एक ईसाई खातून जो की HP की CEO थी वो अपने स्पीच में “इस्लामी सिविलाइज़ेशन” के जो एहसानात है इंसानियत के लिए वो याद दिलाते हुए सबको हैरान कर देती है। आईये उर्दू तर्जुमे के साथ हिंदी में उनकी स्पीच का मुताला करे | जजाक अल्लाहु खैरण कसीरा!

❝ टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज आज वजूद में नहीं होती! अगर मुसलमान साइंटिस्ट न होते ❞

– मिस कार्लटन फिओरिना।

एक मशहूर और मारूफ शख्सियत “मिस. कार्लेटन फिओरिना” जो के H.P. की सीईओ थी, और इस खातून ने एक स्पीच दी थी जो H.P की “औल वर्ल्डवाइड कंपनी मैनेजर्स की मीटिंग” थी।

यह स्पीच उसने दी है २६ सितम्बर २००१ को यानी ११ सितम्बर २००१ को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का वाकिया हुआ जिसपर मुसलमानो पर इलज़ाम पर इंल्जाम लगाये जा रहे थे।

उनकी स्पीच इंग्लिश में थी हम उसका तर्जुमा यहाँ बताने की कोशिश करते है। यह स्पीच बहुत हिम्मत बहुत जसारत की चीज़ है! जहाँ मुसलमान अपने आप को मुसलमान कहने से यहाँ शर्मा रहे थे जो वाकिया वहां हुआ! ये खातून जो ईसाई है इसने “ट्विन टावर” के बलास्ट के २ हफ्ते बाद एक तक़रीर में दुनिया से ऐलान किया और कहा और उसने शुरुआत यू की:

तर्जुमा:

  • एक ज़माना था एक क़ौम गुज़री है जो दुनिया में सबसे बेहतरीन क़ौम थी (अभी उसने नाम नहीं लिया) ,
  • ये वो कौम थी जिसने एक ऐसी हुकूमत कायम की जो एक बर्रे आज़म से दूसरे बर्रे आज़म और एक पहाड़ी इलाक़े से दूसरे इलाक़े तक जंगलात और तमाम दीगर ज़मीनात इनके पास थी।
  • इनके हुकूमत के अंदर हज़ारो और लाखो लोग रहते थे जो मुख्तलिफ मज़ाहिब के मानने वाले थे।
  • इसकी ज़ुबान दुनिया की आलमी जुबान बन गयी थी और बहुत से क़ौम के बीच में ताल्लुकात कायम करने की वजह बन गई थी इसकी ज़ुबान।
  • इसके अंदर जो फौजे थी कई मुख्तलीफ़ मुमालिकात से थे और जो हिफाज़त इन्होने दी ऐसी हिफाज़त दुनिया में इस से पहले नहीं देखने को मिली कहीं और तिजारत साउथ अमेरिका से लेकर चीन तक और तमाम बीच के इलाक़ो तक फैली थी।
  • यह जो क़ौम थी जिस चीज़ से चलती थी वो इनके खयालात थे, इनके इन्क्शाफात थे।
  • इनके इंजीनियर्स ने ऐसी इमारते बनाई जो ज़मीन के कशिश (कुव्वत) के खिलाफ थे यानी बड़ी बड़ी इमारतें तामीर करते थे।
  • इनके मैथमेटिक्स जो थे इन्होने अलजेब्रा और एल्गोरिथम जैसे सब्जेक्ट की बुनियाद डाली जो आगे चलकर कंप्यूटर के बनाने इनक्रीप्शन की टेक्नोलॉजी ईजाद हो सकी।
  • इनके जो तबीब डॉक्टर्स थे जो इंसानी जिस्मो को जांचते और नए नए इलाज निकालते उन बीमारियो और कमज़ोरियों के।
  • इनके जो इल्म-ए-फाल्कियत रखने वाले लोग थे वो गौर करते ज़मीन और आसमान में और तारो को नाम देते और यही जरिया बनी आज के दौर के सैटेलाइट और दीगर स्पेस एक्सप्लोरेशन का,.. जो आज हम इन्क्शाफात कर रहे है उसकी वजह बनी।
  • इनके जो मुसन्निफ़ थे वो किताब लिखते थे कहानिया लिखते थे कहानिया जो जसारत, हिम्मत, ताक़त क़ुव्वत की मोहब्बत की।
  • इनके जो शायर थे वो मोहब्बत के बारे में शायरियां लिखते! यह वो ज़माना था जब दूसरे इसके कहने के लिए बहुत ज़्यादा ख़ौफ़ज़दा हुआ करते थे।
  • जब दूसरे लोग नयी इन्काशाफ़त के बारे में सोचना भी उनके लिए खौफ था यह क़ौम तो सोच पे जिया करती थी।
  • जब दुनिया इस चीज़ पर आ चुकी थी की पिछले क़ौम का इल्म मिटा दिया जाए इस क़ौम ने वो इल्म बाकी रखा और लोगों तक पहुँचाया।

बहुत सारी चीज़ जो आज की हम दुनिया में देख रहे है, इस्तेमाल कर रहे है, यह बहुत सारी चीज़ उस क़ौम की देन है जिसके बारे में मैं बात कर रही हूँ, वो “इस्लामिक वर्ल्ड” है,.. इस्लामी क़ौम है, मुसलमान है!! जिसने आठवीं सदी से लेकर सोलवीं सदी तक दुनिया को मशाल-राह दिखाई और इसके अंदर उस्मानी खलीफा और और बग़दाद और शाम और क़ाहेरा, मिस्र की लाइब्रेरीज कुतुबखाने और अच्छे हुक़ुमराह जैसे की “सुलैमान दी मग्निफिसेंत” भी मौजूद थे।

आगे वो कहती है की-
बहुत सारी चीज़ जो हमको मिली है इस क़ौम से, हाला के हम जानते है, फिर भी हम इनके अहसानमंद नहीं है ,..
और आगे वो कहती है की:
“इनकी यह देन आज हमारी ज़िंदगी का हिस्सा है, और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज आज वजूद में नहीं होती! अगर मुसलमान साइंटिस्ट न होते”

****
क्यूंकि उसका IT (इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी) से ताल्लुक़ था! वो H.P की सीईओ थी उसने सिर्फ यह बताने के लिए की आज हम इस कंपनी के ज़रिये जिसका हम फायदा उठा रहे है यह किसी का अहसान है हम पर जिस क़ौम ने हमे दिया है, वो मुसलमान थे।

* तो अंदाज़ा लगाइये किस जसारत से उसने “ट्विन टॉवर के ब्लास्ट” के बाद मुसलमान का नाम लेना बुरी बात समझी जा रही थी उसी माहोल में अमेरिका में इस नोनमुस्लिम खातून ने स्पीच दी और कहा की यह क़ौम तो इंसानियत के फायदे के लिए आई थी।

– (“औल वर्ल्डवाइड कंपनी मैनेजर्स की मीटिंग H.P.” , २६ सितम्बर २००१)

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NonMuslim Yuwak ne Marwadi me Likhi Paigamber Muhammad (ﷺ) ki Jivani

राजस्थान में कोलसिया गांव के एक हिंदू युवक राजीव शर्मा (28) ने धार्मिक सद्भाव की अनूठी मिसाल पेश की है।
राजीव ने बताया कि वे गांव का गुरुकुल नाम से एक ऑनलाइन लाइब्रेरी चलाते हैं। अगर कलम की ताकत का सही इस्तेमाल हो तो उसकी स्याही भाईचारे और मुहब्बत की जड़ों को सींचती है।

किसी भी धर्म का दूसरे से कोई विरोध नहीं है। हिंदू धर्म संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानता है और इस्लाम भाईचारे का पैगाम देता है। इसलिए लोगों में एक दूसरे के प्रति समझ बढऩी चाहिए ताकि नफरत के सौदागर कभी सफल न हो सकें।

राजीव जी ने हाल ही में पैगम्बर मुहम्मद साहब (स.) प् मारवाड़ी में एक किताब लिखी है ! साहित्य की भाषा में इसे जीवनी कहा जा सकता है , लेकिन उनका मानना है की मुहम्मद साहब (स.) का जो स्तर है, उसे किसी भी व्यक्ति के लीए किताब के पन्नो में समेट पाना मुमकिन नहीं | मुहम्मद साहब (स.) के सम्मान में राजीव जी का यह एक छोटा सा प्रयास है|

मोहम्मद साहब (स.) पर पहली ऐसी ईबुक है जो किसी हिन्दू ने मारवाड़ी में लिखी है| साथ ही में वो ये भी कहते है के इससे हम मुहम्मद साहब (स.) के पैगाम को जानने के साथ ही एक-दूसरे को भी अच्छी तरह जान सकेंगे , मुल्क में अमन की फिजा कायम होगी |

राजीव शर्मा जी के इस जस्बे के लिए हमारी तहे दिल से दुआ है के ! अल्लाह तआला राजीव भाई को हिदायत से सरफ़राज़ करे ! उनकी जेद्दो-जेहद को कुबूल फरमाए, और उन्हें दुनिया और अखिरत के तमाम खैर से नवाज़े | …. अमीन …

*Rajeev Sharma has written Prophet Muhammad’s (PBUH) Biography

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पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) का विदायी अभिभाषण (इस्लाम में मानवाधिकार)

पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) ईश्वर की ओर से, सत्यधर्म को उसके पूर्ण और अन्तिम रूप में …

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क्या इस्लाम औरतों को पर्दे में रखकर उनका अपमान करता है और क्या बुरखा औरतो की आज़ादी के खिलाफ है ?

» उत्तर: इस्लाम में औरतों की जो स्थिति है, उसपर सेक्यूलर मीडिया का ज़बरदस्त हमला …

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चाँद के टूटने के विश्वास से सिद्ध होते है वैज्ञानिक तथ्य

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बहुत समय से गैर मुस्लिम भाईयों को मुस्लिमों के इस विश्वास का मजाक उडाते देख …

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चींटियों की जीवनशैली और परस्पर सम्पर्क (Ant life in Quran)

!! कुरआन और जीव विज्ञान !!
“पैग़म्बर सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के लिये जिन्नातों, इंसानों, परिन्दों की सेनाऐं संगठित की गई थीं और वह व्यवस्थित विधान के अंतर्गत रखे जाते थे एक बार वह उनके साथ जा रहा था यहां तक कि जब तमाम सेनाएं चींटियों की वादी में पहुंचीं तो एक चींटी ने कहाः ‘‘ए चींटियो ! अपने बिलों में घुस जाओं कहीं ऐसा न हो कि सुलेमान और उसकी सेना तुम्हें कुचल ड़ालें और उन्हें पता भी न चले। ”
(अल-क़ुरआन: सूर: 27 आयत. 17.18 )

हो सकता है कि अतीत में कुछ लोगों ने पवित्र क़ुरआन में चींटियों की उपरोक्त वार्ता देख कर उस पर टिप्पणी की हो और कहा हो कि चींटियां तो केवल कहानियों की किताबों में ही बातें करती हैं। अलबत्ता निकटतम वर्षो में हमें चींटियों की जीवन शैली उनके परस्पर सम्बंध और अन्य जटिल अवस्थाओं का ज्ञान हो चुका है। यह ज्ञान आधुनिक काल से पूर्व के मानव समाज को प्राप्त नहीं था।
अनुसंधान से यह रहस्य भी खुला है कि वह “जीव: कीट” पतंग, कीड़-मकोड़े जिनकी जीवन शैली मानव समाज से असाधरण रूप से जुड़ी है वह चींटियां ही हैं।
इसकी पुष्टि चींटियों के बारे में निम्नलिखित नवीन अनुसंधानों से भी होती है:
क). चींटियां भी अपने मृतकों को मानव समाज की तरह दफ़नाती हैं।
ख). उनमें कामगारों के विभाजन की पेचीदा व्यवस्था है जिसमें मैनेजर, सुपरवाईज़र, फोरमैन और मज़दूर आदि शामिल हैं।
ग). कभी कभार वह आपस में मिलती है और बातचीत भी करती हैं।
घ). उनमें विचारों का परस्पर आदान प्रदान (Communication) की विकसित व्यवस्था मौजूद है।
च). उनकी कॉलोनियों में विधिवत बाज़ार होते हैं जहां वे अपने वस्तुओं का विनिमय करती हैं।
छ) सर्द मौसम में लम्बी अवधि तक भूमिगत रहने के लिये वह अनाज के दानों का भंडारण भी करती हैं और यदि कोई दाना फूटने लगे यानि पौधा बनने लगे तो वह फ़ौरन उसकी जड़ें काट देती हैं ।
जैसे उन्हें यह पता हो कि अगर वह उक्त दाने को यूंही छोड़ देंगी तो वह विकसित होना प्रारम्भ कर देगा ।
– अगर उनका सुरक्षित किया हुआ अनाज भंडार किसी भी कारण से उदाहरण स्वरूप वर्षा में गीला हो जाए तो वह उसे अपने बिल से बाहर ले जाती हैं और धूप में सुखाती हैं।
– जब अनाज सूख जाता है तभी वह उसे बिल में वापस ले जाती हैं। यानि यूं लगता है , जैसे उन्हें यह ज्ञान हो कि नमी के कारण अनाज के दाने से जड़ें निकल पड़ेंगी जिसके कारण वह दाने खाने के योग्य नहीं रह जाएंगे।

Ant , Quran and Miracle of Female talking Ant

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क़ुरआन मे मानव जीवन के लिये है – “समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व-भावना” : विशम्भर नाथ पाण्डे (भूतपूर्व राज्यपाल, उड़ीसा)

“क़ुरआन ने मनुष्य के आध्यात्मिक, आर्थिक और राजकाजी जीवन को जिन मौलिक सिद्धांतों पर क़ायम …

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अमेरिका के तीन ईसाई पादरी आये इस्लाम की शरण में: यूसुफ एस्टीज की जुबानी

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सिस्टर खदीजा वाटसन journey to islam

आठ साल तक धार्मिक अध्ययन के बाद मैं जान गई कि इस्लाम सच्चा धर्म है : खदीजा वाटसन

सिस्टर खदीजा वाटसन एक कट्टर ईसाई थीं। लेकिन जब इस्लाम का अध्ययन किया और इस्लाम …

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इस्लाम का अध्ययन करना बना सिस्टर जेनी केम्प की हिदायत की वजह Sister Jenny Kemp Journey of Faith

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कुरआन और हदीस के अध्ययन के बाद मुझे अपनी जिंदगी का मक्सद इस्लाम में ही नजर आया: सिस्टर विक्टोरिया (अब आयशा) Islamic reverts stories in hindi - Sister Victoria

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इस्लामी विरोधी डच राजनेता 'अनार्ड वॉन डूर्न' ने अपना लीया इस्लाम Dutch Islamophobe Arnoud Van Doorn revert to Islam

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“क्या ये संभव है कि जीवन भर आप जिस विचारधारा का विरोध करते आए हों …

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डॉ. गैरी मिलर (इसाई प्रचारक) ने इस्लाम अपनाने के बाद रखा अपना नजरिया Dr. Gary Miller convert story

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स्वामी विवेकानंद इस्लाम के बारे में – Swami Vivekananda about Islam

» NonMuslim View About Islam: स्वामी विवेकानंद (विश्व-विख्यात धर्मविद्) “मुहम्मद(स.) साहब (इन्सानी) बराबरी, इन्सानी भाईचारे …

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