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मेरी नमाज़, क़ुरबानी, मेरा जीना मरना सब कुछ अल्लाह के लिए है

۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞

मेरी नमाज़, क़ुरबानी, मेरा जीना मरना सब कुछ अल्लाह के लिए है

“आप फ़रमा दीजिए बेशक! मेरी नमाज़ मेरी कुर्बानी मेरा जीना मेरा मरना सब कुछ अल्लाह ही के लिए है जो सारे जहान का मालिक है।”

📕 क़ुरआन; सूरह अल अनआम 6:162

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Qurbani ka Gosht 3 din se jyada rakhna kaisa Hadees ki roshni me

कुर्बानी का गोश्त ३ दिन से ज्यादा रखना कैसा ?

कुर्बानी का गोश्त ३ दिन से ज्यादा रखना कैसा है ?

अल्लाह के रसूल ने 3 दिन से ज़्यादा कुर्बानी का गोश्त रखने से कभी मना नहीं किया।

उम्मुल मोमिनीन आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से पूछा गया –
क्या रसूल अल्लाह (ﷺ) ने तीन दिन से ज़्यादा कुर्बानी का गोश्त खाने से मना किया है ?

उन्हों ने कहा अल्लाह के रसूल ने ऐसा कभी नहीं किया सिर्फ़ एक साल उस का हुक्म दिया था जिस साल सुखा पड़ा था अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने चाहा था ( उस हुक्म के ज़रिए ) के जो मालदार है वो ( गोश्त जमा करने के बजाए ) मोहताजो को खिला दें (यानी गरीबों में गोश्त बांट दे )।

📕 बुखारी शरीफ़ हदीस नं. 5423

Qurbani ka Gosht 3 din se jyada rakhna kaisa

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अरफा के दिन की दुआ सबसे बेहतरीन है

अरफा के दिन की दुआ सबसे बेहतरीन है

अरफा के दिन की दुआ सबसे बेहतरीन है

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

सबसे बेहतर दुआ अरफा (9 ज़िल-हिज्जा) वाले दिन की दुआ है और मैंने अब तक जो कुछ (बतौर ज़िक्र) कहा है और मुझसे पहले जो दुसरे नबियों ने कहा उसमें सबसे बेहतर दुआ है –

“ला इलाहा इल्लल्लाहू, वाहदहू ला शरीका लहू, लहूल मुल्क वल-हूल हम्द, व-हूवा अला कुल्ली शैइन क़दीर”

अल्लाह के सिवा कोई (सच्चा माबूद) नहीं, वो अकेला है और उसका कोई शरीक नहीं, उसी के लिए सारी बादशाही है और उसी के लिए सारी तारीफ है और वो हर चीज़ पर ख़ूब क़ुदरत रखता है।

📕 Jam e Tirmazi#3585 (Sahih)

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अशरा ज़ुल हज की फ़ज़ीलत ~ क़ुरानो सुन्नत की रौशनी में

अशरा ज़ुल हज की फ़ज़ीलत ~ क़ुरानो सुन्नत की रौशनी में

अशरा ज़ुल हज की फ़ज़ीलत क़ुरानो सुन्नत की रौशनी में ۞ बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ۞ तमाम तारीफे …

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हज का सुन्नत तरीका ~ कुरआन व सुन्नत की रौशनी में

हज का सुन्नत तरीका ~ कुरआन व सुन्नत की रौशनी में

हज का तारूफ , हज्ज के फ़र्ज़ होने की शर्तें, हज में एहतियात करने वाली बाते, एहराम की हालत में मना की हुई चीज़ें, हज्ज के तीन किस्मे, यौमूत्तर्वियह, अरफा का दिन , मुज़दलिफा में रात बिताना, यौमुन्नह्र (10 जिल हिज्जा – क़ुरबानी का दिन), अय्यामुत्तश्रीक़ (11,12,13 जिल हिज्जा), जिल हिज्जा की 12वीं तारीख