और व्यभिचार (adultery) के निकट भी न जाओ।

कल्याणकारी मधुर संदेश

इस्लाम समाज में फैली किसी भी बुराई जैसे (चोरी/बलात्कार/शराब…आदि) से न सिर्फ रोकता है बल्कि उसे मिटाने के तरीके भी बताता है।

“और ज़िना (व्यभिचार) के निकट भी न जाओ, नि:सन्देह यह बहुत ही घृणित काम और बुरा रास्ता है।”

पवित्र कुरआन (17:32)

सबसे पहले तो इस्लाम लोगों को आध्यात्मिक स्तर पर इतना उठाता है कि वो ऐसा कार्य न करें। इसके बाद भी यदि कुछ लोग (स्त्री-पुरुष) यौन-अपराध कर बैठे तो इस्लाम ऐसे लोगों पर अपनी क़ानून व्यवस्था को क्रियान्वित (लागु) कर देता है।

दोषी पुरुष-स्त्री-दोनों या कोई एक-यदि विवाहित हैं तो संगसार कर देने (मार डालने) की सज़ा दी जाती है। यदि दोनों, या कोई एक,
अविवाहित हो तो ‘सौ कोड़े मारने की सज़ा निर्धारित की गई है।

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