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Topic: सुन्नत अमल

सुन्नत क्या है?, सुन्नत के अक्साम और सुन्नत अमल के बारे में तफ्सील में जानकारी कुरान और हदीस की रौशनी में

घर वालों से नेक बरताव करना

हजरत आयशा (र.अ) फर्माती हैं के – आप (ﷺ) ने ग़ज़वे के अलावा कभी भी किसी को अपने हाथ से नहीं मारा और न कभी किसी खादिम को मारा और न ही कभी किसी औरत को मारा।

फसाद करने वालों पर गलबा पाने की दुआ

फितना व फसाद करने वालों पर गलबा पाने के लिये क़ुरआन की इस दुआ का एहतेमाम करना चाहिये: ۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞ قَالَ رَبِّ انصُرْنِي عَلَى الْقَوْمِ الْمُفْسِدِينَ “Rabbi onsurnee AAala alqawmi almufsideena” तर्जुमा: ऐ मेरे परवरदिगार ! मुझे फसाद करने वाली कौम पर गलबा अता फर्मा।

मूंछों को तराशना

रसूलुल्लाह (ﷺ) मूंछों को तराश्ते थे और फ़रमाया करते थे के हजरत इब्राहीम (र.अ) भी ऐसा ही किया करते थे।

बदअख़्लाक़ी से बचने की दुआ

۞ हदीस: रसूलुल्लाह (ﷺ) यह दुआ फरमाते थे : ( Allahumma Inni A’udhu Bika Min Munkaratil-Akhlaqi Wal-Amali Wal-Ahwa ) तर्जुमा : ऐ अल्लाह ! मै बुरे अख्लाक और ख्वाहिशात से तेरी पनाह चाहता हु।

सवारी पर सवार होने के बाद की दुआ

रसूलुल्लाह (ﷺ) जब सफ़र के इरादे से निकलते और सवारी पर बैठ जाते तो तीन मर्तबा तक्बीर: (अल्लाहु अकबर) फ़र्माते और यह दुआ पढ़तेः “Allahu akbar, Allahu akbar, Allahu akbar, subhanal-lathee sakhkhara lana hatha wama kunna lahu muqrineen, wa-inna ila rabbina lamunqaliboon”

इस्मिद सुरमा लगाना

हज़रत इब्ने अब्बास (र.अ) फरमाते हैं के रसूलुल्लाह (ﷺ) से हर रात सोने से पहले तीन मर्तबा इस्मिद सुरमा लगाया करते थे।

मगफिरत की क़ुरानी दुआ: 01

अपने परवरदिगार से इस तरह मगफिरत तलब करनी चाहिये: (Rabbana zalamna anfusina wa il lam taghfir lana wa tarhamna lana kunan minal-khasireen) तर्जमा : ऐ हमारे पालने वाले हमने अपना आप नुकसान किया और अगर तू हमें माफ न फरमाएगा और हम पर रहम न करेगा तो हम बिल्कुल घाटे में ही रहेगें।

बच्चों को यह दुआ पढ़ कर दम करें

रसूलुल्लाह (ﷺ) हजरत हसन व हुसैन (र.अ) को यह दुआ पढ कर दम किया करते थे : أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لامَّةٍ आऊज़ु बिकालिमातिल्लाहीत ताम्माह वा मीन कुल्ली शयतानीव वा हाम्माह वा मीन कुल्ली अयनील आम्माह तर्जमा: मैं पनाह माँगता हूँ अल्लाह की पूरे पूरे कलिमात के ज़रिए, […]

रुकू में हाथों को घुटनों पर रखना

रसूलुल्लाह (ﷺ) रुकू फरमाते, तो “अपने हाथों को घुटनों पर रखते, ऐसा लगता था जैसे उन को पकड़ रखा हो और दोनों हाथों को थोडा मोड़ कर पहलुओं से अलग रखते थे।”

बिजली कड़कने और बादल गरजने के वक़्त की दुआ

अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर रज़ियल्लाहु अन्हुमा जब बादल की गरज सुनते तो बातें छोड़ देते और यह दुआ पढ़ते। (Subhanal-lathee yusabbihur-raAAdu bihamdih, walmala-ikatu min kheefatih.) तर्जुमा : पाक है वह ज़ात बादल की गरज जिसकी तस्बीह़ बयान करती है उसकी तारीफ के साथ और फ़रिश्ते भी उसके डर से उसकी तस्बीह़ पढ़ते हैं।

इशा के बाद दो रकात नमाज पढना

हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर (र.अ) बयान फ़र्माते हैं के, “मैंने रसूलुल्लाह (ﷺ) के साथ ईशा की फर्ज नमाज़ के बाद दो रकात (सुन्नत) पढ़ी है।” फायदा: इशा की नमाज के बाद वित्र से पहले दो रकात पढ़ना सुन्नते मोअक्कदा है।

मुसीबत के वक्त की दुआ

जब कोई मुसीबत पहुँचे या उसकी खबर आए, तो यह दुआ पढ़ेः “इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलाही राजिऊन” तर्जमा : हम सब (मअ माल व औलाद हकीक़त में) अल्लाह तआला ही की मिल्कियत में है और मरने के बाद) हम सब को उसी के पास लौट कर जाना है।

बीवियों को सलाम करना

हज़रत उम्मे सलमा (र.अ) बयान करती हैं के आप (ﷺ) रोजाना सुबह के वक्त बीवियों के पास तशरीफ ले जाया करते थे और उन को खुद सलाम किया करते थे।

बुरे लोगों की सोहबत से बचने की दुआ

अपने आप को और अपनी औलाद को बुरे लोगों की सोहबत से बचाने के लिये यह दुआ पढ़े “Rabbi najjinee waahlee mimma yaAAmaloon” तर्जमा: ऐ मेरे रब! मुझे और मेरे अहल व अयाल को उनके (बुरे) काम से नजात अता फ़र्मा।

दुनिया व आखिरत में आफियत की दुआ

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : बन्दे की अपने रब से माँगी जाने वाली दुआओं में सबसे अफजल यह है: तर्जमा: ऐ अल्लाह! मैं दुनिया और आखिरत में तुझसे आफियत व भलाई का सवाल करता हूँ।

हिकमत के लिये दुआ

हिकमत और सलाह व तकवा हासिल करने के लिये यह दुआ पढ़ें: तर्जुमा: ऐ हमारे परवरदिगार! हमें हिकमत अता फ़रमा और नेक लोगों के साथ शामिल फरमा।

गुस्ल करने का सुन्नत तरीका

रसूलुल्लाह (ﷺ) जब गुस्ले जनाबत फ़र्माते, तो सबसे पहले हाथ धोते, फिर सीधे हाथ से बाएँ हाथ पर पानी डालते, फिर इस्तिन्जे की जगह धोते, फिर जिस तरह नमाज के लिये वुजू किया जाता है उसी तरह वुजू करते, फिर पानी लेकर अपनी उंगलियों के जरिये सर के बालों की जड़ों में दाखिल करते, फिर […]

मोहताजगी व जिल्लत से पनाह माँगना

रसूलुल्लाह (ﷺ)  ने फ़रमाया : फक्र व मोहताजगी और जिल्लत से इस तरह पनाह माँगा करो : तर्जुमा : हम अल्लाह की पनाह चाहते हैं, फक्र व फाका और जिल्लत से और इससे के हम किसी पर जुल्म करें, या हम पर कोई जुल्म करे।

इत्र लगाना

हजरते आयशा (र.अ) से मालूम किया गया के रसूलुल्लाह इत्र लगाया करते थे? उन्होंने फ़रमाया “हाँ मुश्क वगैरह की उम्दा खुशबु लगाया करते थे।”