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Topic: अहेम अमल की फजीलत

तमाम अहेम अमल की फजीलत के बारे में तफ्सील में जानकारी कुरान और हदीस की रौशनी में

अल्लाह के रास्ते में रोज़ा रखना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “जिसने अल्लाह के रास्ते में एक रोज़ा रखा, तो अल्लाह तआला उस के और जहन्नम के दर्मियान आसमान व ज़मीन के फासले के बराबर खन्दक़ कायम कर देगा।”

खाना खिलाने की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : “जिस ने किसी मोमिन को खाना खिलाया और उसको सैराब कर दीया तो अल्लाह तआला एक खास दरवाजे से उस को जन्नत में दाखिल फ़रमाएगा जिस में उस के जैसा अमल करने वाला ही दाखिल होगा।”

अल्लाह के लिये मुहब्बत का बदला

रसुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया: “अल्लाह तआला क़यामत के दिन फरमाएगा। “मेरी अजमत की वजह से आपस में मुहब्बत करने वाले लोग आज कहाँ हैं ? मैं आज उन को अपने साए में जगह दूँगा जब के मेरे साए के अलावा कोई साया न होगा।”

सबसे अच्छा मुसलमान कौन है ?

अबू मूसा (र.अ) से रिवायत है के, कुछ सहाबा ने पूछा, या रसूल अल्लाह ﷺ ! कौन सा इस्लाम अफज़ल है (यानि सबसे अच्छा मुसलमान कौन है) तो नबी-ऐ-करीम ﷺ ने फ़रमाया: “वह शख्स जिस की जबान और हाथ से दूसरे मुसलमान महफूज रहें ।”

इज्जत की हिफाज़त करना

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : “जिस ने पीठ पीछे अपने भाई की इज्जत की हिफाजत की। अल्लाह तआला अपनी जिम्मेदारी से उस को (जहन्नम की) आग से आज़ाद कर देगा।”

मुसाफा मगफिरत का जरिया है

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “जब दो मुसलमान आपस में मिलते हैं और मुसाफा करते हैं, तो जुदा होने से पहले उन दोनों की मगफिरत कर दी जाती है।”

सलाम करने पर नेकियाँ

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “जिस ने अस्सलामु अलैकुम कहा, उस के लिये दस नेकियाँ लिखी जाती हैं और जिस ने अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह कहा, उस के लिये बीस नेकियाँ लिखी जाती है, और जिसने अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह व बरकातुह कहा, उस के लिये तीस नेकियाँ लिखी जाती हैं।”

अच्छे और बुरे अख़्लाक़ की मिसाल

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : “अच्छे अख्लाक बुराइयों को इस तरह खत्म कर देते हैं जिस तरह पानी बरफ को पिघला देता है और बुरे अख्लाक अच्छे कामों को इस तरह खत्म कर देते हैं जिस तरह सरका शहद को खराब कर देता है।”

शर्म व हया ईमान का जुज़ है

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “ईमान के साठ से ऊपर या सत्तर से कुछ जायद शोअबे हैं। सब से अफज़ल (ला इलाहा इलल्लाहु) पढ़ना है और सब से कम दर्जा रास्ते से तकलीफ़ देह चीज़ का हटा देना है और शर्म व हया ईमान का हिस्सा है।”

पसंद के मुताबिक हदिया देना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “जो आदमी अपने मुसलमान भाई से किसी ऐसी चीज़ के साथ मुलाकात करे जिस से वह खुश होता हो, तो अल्लाह तआला उस को कयामत के दिन खुश कर देगा। वजाहत: हदीस से मालूम हुआ के किसी दीनी भाई के यहाँ जाते वक़्त उस की पसंद के मुताबिक़ कोई चीज़ […]

लोगों की जरूरतें पूरी करने वालो की फ़ज़ीलत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “अल्लाह तआला ने कुछ बन्दों को लोगों की जरूरत पूरी करने के लिये पैदा किया है, लोग उन के पास अपनी ज़रूरत ले कर जाते हैं, लोगों की जरूरत पूरी करने वाले यह लोग अल्लाह के अज़ाब से महफूज रहेंगे।”

दीनी भाई की जियारत की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “जिस ने किसी मरीज़ की इयादत की, या किसी दीनी भाई की जियारत की, तो एक पुकारने वाला (फरिश्ता) कहता है। तुम (दुनिया में) अच्छे रहो, तुम्हारा (अच्छे कामों की तरफ) चलना मुबारक हो और तुम ने (अपने इस अमल के जरिये) जन्नत का बुलंद दर्जा हासिल कर लिया है।”

औरत के लिये चंद आमाल

रसुलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “जब औरत पाँच वक्त की नमाज पढती रहे और अपनी इज्जत की हिफाजत करती रहे और अपने शौहर की फरमा बरदारी करती रहे तो वह जन्नत के जिस दरवाजे से चाहे, दाखिल हो जाए।”

इंसाफ करने की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : “थोड़ी देर का इन्साफ साठ साल की शब बेदारी और रोजा रखने की इबादत से बेहतर है। ऐ अबू हुरैरा ! किसी मामले में थोड़ी सी देर का जुल्म, अल्लाह के नजदीक साठ साल की नाफ़रमानी से जियादा सख्त और बड़ा गुनाह है।”

आफत व बला दूर होने की दुआ

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया: “जो शख्स (माशाअल्लाह ला हौल वाला क़ूवता इल्लाह बिल्लाह ) पढ़ लिया करे, तो सिवाए मौत के अपने अहल व अयाल और माल में कोई आफत नहीं देखेगा।”

बीवियों के साथ अच्छा सुलूक करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : “ईमान वालों में ज़ियादा मुकम्मल ईमान वाले वह लोग हैं, जो अखलाक में ज्यादा अच्छे हैं और तुम में सबसे अच्छे वह लोग हैं जो अपनी बीवियों के साथ अच्छा बरताव करते हैं।”

औरतों का चंद बातों पर अमल करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : “अगर औरत पाँच वक़्त की नमाज पढ़े और रमजान के रोजे रखे और अपनी शर्मगाह की हिफाज़त करे और अपने शौहर की फरमाबरदारी करे (तो कयामत के दिन) उससे कहा जाएगा: तुम जन्नत के जिस दरवाजे से चाहो जन्नत में दाखिल हो जाओ।”

अपने घरवालों पर खर्च करने की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “एक वह दीनार जिसे तुमने अल्लाह के रास्ते में खर्च किया और एक वह दीनार जिसे तुमने किसी गुलाम के आज़ाद करने में खर्च किया और एक वह दीनार जो तुमने किसी ग़रीब को सदका किया और एक वह दीनार जो तुम ने अपने घर वालों पर खर्च किया तो […]

लोगों से अपनी जरूरत छुपाए रखने की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : “जो शख्स भूका हो, या उस को कोई और खास हाजत हो और वह अपनी उस भूक और हाजत को लोगों से छुपाए रखे (यानी उन के सामने जाहिर कर के उनसे सवाल न करे) तो अल्लाह तआला के जिम्मे है के उस को हलाल तरीके से एक साल का […]

नर्म मिज़ाजी इख्तियार करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : “क्या मैं तुम को ऐसे शख्स की खबर न दूँ जो दोजख के लिये हराम है और दोज़ख की आग उस पर हराम है? हर ऐसे शख्स पर जो तेज़ मिजाज न हो बल्के नर्म हो, लोगों से क़रीब होने वाला हो, नर्म मिजाज हो।”

तहज्जुद की निय्यत कर के सोना

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : “जो आदमी अपने बिस्तर पर लेटते वक्त रात को उठ कर (तहज्जुद की नमाज पढने की निय्यत करे फिर नींद के गलबे की वजह से सुबह हो जाए तो निय्यत के मुताबिक उसको नमाज का सवाब मिलेगा और (हुस्ने निय्यत की वजह से) उस का सोना अल्लाह की तरफ से […]