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हजरत मूसा अलैहि सलाम » Qasas ul Anbiya: Part 15.6

फ़िरऔन, फ़िरऔन की क़ौम और कयामत का अजाब ………. फ़िरऔन और हजरत मूसा अलैहि सलाम का यह वाक्रिया हक व बातिल के मारके में एक शानदार मारका है- एक ओर गुरूर व घमंड, जब व जुल्म, तो दूसरी ओर मज्लुमियत, ख़ुदापरस्ती और सब्र व इस्तिकामत की फ़तह व कामरानी का अजीब व ग़रीब मुरक्का। इसलिए […]

हजरत मूसा अलैहि सलाम » Qasas ul Anbiya: Part 15.5

फ़िरऔन का एलान ………. ग़रज जब फ़िरऔन और उसके सरदारों को मूसा अलैहि सलाम को हराने में नाकामी हुई तो फ़िरऔन ने अपनी कौम में एलान किया- ………. तर्जुमा- ‘ऐ कौम! क्या मैं मिस्र के ताज व तख़्त का मालिक नहीं हूँ। मेरी हुक़ूमत के क़दमों के नीचे ये नहरें बह रही हैं? क्या तुम […]

हजरत मूसा अलैहि सलाम » Qasas ul Anbiya: Part 15.4

जादूगरों की हार और फ़िरऔन का रद्देअमल (प्रतिक्रिया) ………. बहरहाल जश्न का दिन आ पहुंचा, जश्न के मैदान में तमाम शाहाना कर व फ़र के साथ फ़िरऔन तख्तनशी है और दरबारी भी दर्जे के एतबार से क़रीने से बैठे हैं और लाखों इंसान हक व बातिल के मारके का नज़ारा करने को जमा हैं। एक […]

हजरत मूसा अलैहि सलाम » Qasas ul Anbiya: Part 15.3

हज़रत मूसा अलैहि सलाम की एक नबी की हैसियत से मिस्र को वापसी और हज़रत हारून अलैहि सलाम को रिसालत का मंसब अता किया जाना। मिस्र में दाखिला ………. जब हज़रत मूसा अलैहि सलाम नुबूवत के मंसब से सरफ़राज़ होकर कलामे रब्बानी से फैजयाब बनकर और दावत और हक़ की तब्लीग़ में कामयाबी व कामरानी […]

फिरौन की लाश पर परिक्षण कर के डॉक्टर मोरिस को कुरान की सत्यता पर विश्वास हुआ

डॉ मौरिस बुकाय फ्रांस के सबसे बड़े डाक्टर थे, और उनका धर्म ईसाई था स। 1898 मे जब मिस्र मे लाल सागर के किनारे एक अति प्राचीन मानव शरीर मिला जो आश्चर्यजनक रूप से हज़ारों साल गुजर जाने के बाद भी सुरक्षित था, सभी को इस मृत शरीर का रहस्य जानने की उत्सुकता रहती थी […]