सब्र दरअस़्ल सदमे की इब्तिदा में होता है।

पोस्ट 48 :
सब्र दरअस़्ल सदमे की इब्तिदा में होता है।

साबित अल बुनानी रहिमहुल्लाह फ़रमाते हैं कि:

❝ मैं ने अनस बिन मालिक रज़िअल्लाहु अ़न्हु को उनके घर की किसी ख़ातून से फ़रमाते सुना: क्या तुम फुलां औ़रत को जानती हो ? उन्होंने कहा: हां। फ़रमाया: अल्लाह के नबी ﷺ उस औ़रत के पास से गुज़रे जब वो क़ब्र के पास रो रही थी। (मुस्लिम की रिवायत में यूं है: वो अपने बच्चे की मौत पर रो रही थी)

आप ﷺ ने उस से कहा: अल्लाह से डरो, और स़ब्र करो। उस ने कहा: हटो यहां से, तुम्हें मेरी मुसीबत नहीं पहुंची। फ़रमाते हैं: आप ﷺ ने उस से दरगुज़र का मुआ़मला किया और वहां से चले गए। उस औ़रत के पास से एक आदमी गुज़रा उस ने कहा: तुम से अल्लाह के रसूल ﷺ ने क्या कहा ? वो बोली: मैं ने तो उन्हें पहचाना ही नहीं (कि वो अल्लाह के रसूल ﷺ हैं।) उस ने कहा: वो अल्लाह के रसूल ﷺ ही थे। इस पर वो फ़ौरन आप ﷺ के दरवाज़े पर आई, उसे वहां कोई दरबान दिखाई नहीं दिया। बोली: ऐ अल्लाह के रसूल, अल्लाह की क़सम, में आप को पहचान नहीं पाई थी। इस पर नबी ﷺ ने फ़रमाया: स़ब्र दरअस़्ल स़दमे की इब्तिदा ही में है।

📕 बुखारी: अल अह़काम 7154
📕 मुस्लिम: अल जनाएज़ 15 – 926

————-J,Salafy————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं
(सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224)

Series : ख़्वातीन ए इस्लाम

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