हजरत मूसा अलैहि सलाम » Qasas ul Anbiya: Part 15.4

जादूगरों की हार और फ़िरऔन का रद्देअमल (प्रतिक्रिया)

………. बहरहाल जश्न का दिन आ पहुंचा, जश्न के मैदान में तमाम शाहाना कर व फ़र के साथ फ़िरऔन तख्तनशी है और दरबारी भी दर्जे के एतबार से क़रीने से बैठे हैं और लाखों इंसान हक व बातिल के मारके का नज़ारा करने को जमा हैं। एक तरफ मिस्र के मशहूर जादूगरों का गिरोह अपने साज व सामान से लेस खड़ा है और दूसरी तरफ़ अल्लाह के रसूल, हक के पैगम्बर, सच्चाई और रास्ती के पेकर हज़रत मूसा व हारून खड़े हैं। ऐसी हालत में-

………. तर्जुमा- ‘जादूगर फ़िरऔन के पास आए और कहने लगे, क्या अगर हम मूसा पर ग़ालिब आ जाएं, तो हमारे लिए इनाम व इकराम है? फ़िरऔन ने कहा, हां, ज़रूर और यही नहीं बल्कि तुम शाही दरबार के मुकर्रब बनोगे।’ [7:113-114]

………. जादूगरों ने जब इस तरफ़ से इत्मीनान कर लिया तो हज़रत मूसा अलैहि सलाम की तरफ़ मुतवज्जह हुए और हज़रत मूसा अलैहि सलाम ने कहा-

………. तर्जुमा- ‘अफ़सोस तुम पर देखो, अल्लाह पर झूठी तोहमत न लगाओ, ऐसा न हो कि वह कोई अज़ाब भेजकर तुम्हारी जड़ उखाड़ दे। जिस किसी ने झूठ बात बनाई, वह नामुराद हुआ।’ [20:60]

………. जादूगरों ने कहा-
………. तर्जुमा- ‘ऐ मूसा! या तो तुम अपनी लाठी फेंको या फिर हम फेंके। मूसा ने कहा, तुम ही पहले फेंको। फिर जब जादूगरों ने जादू की बनाई हुई लाठियां और रस्सियां फेंकी, तो लोगों की निगाहें जादू से मार दी और अपने करतबों से उनमें दहशत फैला दी और बहुत बड़ा जादू बना लाए।’ [आराफ 7:115-116]

………. तर्जुमा- ‘और उस वक्त हमने मूसा पर वह्य की कि तुम भी अपनी लाठी डाल दो। ज्यों ही उसने लाठी फेंकी तो अचानक क्या हुआ कि जो कुछ झूठी नुमाइश जादूगरों की थी, सब उसने निगल कर नाबूद कर दी, पस हक कायम हो गया और वे जो अमल कर रहे थे, बातिल होकर रह गया। पस इस मौके वे मतलूब हो गए।’ [आराफ 7:117-118]

………. जादूगरों ने जब मूसा के असा का यह करिश्मा देखा तो-
………. तर्जुमा- ‘सब जादूगर सज्दे में गिर पड़े, कहने लगे, हम तो जहानों के परवरदिगार पर ईमान ले आए, जो मूसा व हारून का परवरदिगार है।’ [आराफ 7:120-122]

………. इस हालत को देखकर फिरऔन ने कहा-
………. तर्जुमा- ‘तुम बगैर मेरे हुक्म के मूसा पर ईमान लाए, जरूर यह तुम्हारा सरदार है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है, अच्छा देखो, मैं क्या करता हूं। मैं तुम्हारे हाथ-पांव उलटे-सीधे कटवा दूंगा और खजूर के तनों पर सूली दूंगा।’ [ताहा 20:71]

मगर सच्चा ईमान जब किसी को नसीब हो जाता है भले ही वह एक लम्हें ही का क्यों न हो’ वह ऐसी बेपनाह रूहानी कूवत पैदा कर देता है कि कायनात की कोई जबर्दस्त से जबर्दस्त ताक़त भी उसको मरऊब नहीं कर सकती।

………. इसीलिए जादूगरों को फ़िरऔन की जाबिराना धमकियां मरऊब न कर सकी और उन्होंने कहा-
………. तर्जुमा- ‘हम यह कभी नहीं कर सकते कि सच्चाई की जो रोशन दलीलें हमारे सामने आ गई हैं और जिस अल्लाह ने हमें पैदा किया है, उससे मुंह मोड़ कर तेरा हुक्म मान लें, तू जो फैसला करना चाहता है, कर गुज़र, तू ज्यादा से ज्यादा जो कुछ कर सकता है वह यही है कि दुनिया की इस जिंदगी का फैसला कर दे। हम तो अपने परवरदिगार पर ईमान ला चुके कि वह हमारी ख़ताये बख्श दे, खास तौर से जादूगरी की ख़ता कि जिस पर तूने हमें मजबूर किया था। हमारे लिए अल्लाह ही बेहतर है और यही बाकी रहने वाला है।’ [ताहा 20:72-73]

………. ग़रज़ हक व बातिल की इस कशमकश में फ़िरऔन और उसके दरबारियों को जबरदस्त हार का मुंह देखना पड़ा और वे खुलेआम ज़लील व रुसवा हुए और हजरत मूसा अलैहि सलाम पर अल्लाह का वायदा पूरा हुआ और कामियाबी का सेहरा उन्हीं के सर रहा और जादूगरों के अलावा एक छोटी सी जमाअत इसराईली नौजवानों में से भी मुसलमान हो गई।

………. तर्जुमा- ‘फिर मूसा पर कोई ईमान नहीं लाया मगर सिर्फ एक गिरोह जो उसकी कौम के नौजवानों का गिरोह था, वह भी फ़िरऔन और उसके सरदारों से डरता हुआ कि कहीं किसी मुसीबत में न डाल दे।’ [यूनुस 10:83]

………. हज़रत मूसा की इस महदूद कामियाबी से मुतास्सिर होकर-
………. तर्जुमा- ‘फ़िरऔन की क़ौम में से एक जमाअत ने फ़िरऔन से कहा, क्या तू मूसा और उसकी कौम को यों ही छोड़ देगा कि वह ज़मीन (मिस्र) में फ़साद करते फिरें और तुझको और तेरे देवताओं को ठुकरा दें। फ़िरऔन ने कहा हम उनके लड़कों को क़त्ल कर देंगे और उनकी लड़कियों को (बांदिया बनाने के लिए) जिंदा रखेंगे।’ [आराफ़ 7:127]

यह फ़िरऔन का दूसरा एलान था जो बनी इसराईल के बच्चों के क़त्ल से मुताल्लिक़ किया गया।


बनी इसराईल की बेचैनी

हज़रत मूसा अलैहि सलाम को जब फ़िरऔन और उसके दरबारियों की बात-चीत का हाल मालूम हुआ, तो उन्होंने बनी इसराईल को जमा करके सब्र और अल्लाह पर भरोसा करने की तलकीन की, बनी इसराईल ने सुनकर जवाब दिया कि मूसा, हम पहले ही से मुसीबतों में गिरफ्तार थे, अब तेरे आने पर कुछ उम्मीद बंधी थी, मगर तेरे आने के बाद भी वही मुसीबत बाकी रही, यह तो सख्त आफ़त का सामना है।

………. हज़रत मूसा अलैहि सलाम ने तसल्ली दी कि अल्लाह का वायदा सच्चा है, घबराओ नहीं, तुम्ही कामयाब रहोगे और तुम्हारे दुश्मन को हलाकत का मुंह देखना पड़ेगा। जमीन का मालिक फ़िरऔन या उसकी कौम नहीं है, बल्कि रब्बुल आलमीन है जो मुख्तारे मुतलक़ है, पस वह. अपने बन्दों में से जिसको चाहे उसका मालिक बना दे और अंजामेकार यह इनाम मुत्तक्रियों ही का हिस्सा है।

………. इसके बाद हज़रत मूसा अलैहि सलाम ने मुसलमानों से कहा कि फ़िरऔन के जूल्मों का सिलसिला अभी ख़त्म नहीं हुआ और वह बनी इसराईल मामिनों को आजादी के साथ मिस्र से चले जाने पर राजी नहीं है। और फिर अल्लाह तआला की बारगाह में दुआ की, ऐ अल्लाह! फिरओनियों को जो तूने दौलत व सरवत अता फ़रमाई है; उस पर शुक्र करने के बजाए वे तेरे बन्दों पर जब्र और जुल्म व सितम करने पर आमादा हो गए हैं और हक के तेरे रास्ते को न ये ख़ुद कुबूल करते हैं और न किसी को कुबूल करने देते हैं, बल्कि जब्र व तशद्दुद से काम लेकर उनके आड़े आते हैं, इसलिए अब तू उनके जुल्मों का मज़ा उनको चखा और उनकी दौलत सरबत को तबाह व हलाक कर दे, जिस पर उन्हें घमंड है और जिस तर ईमान की सच्चाई को ठुकराते हैं, तू भी उनको ईमान की दौलत के बजाए ऐसा दर्दनाक अज़ाब दे कि उनकी दास्तान दूसरों के लिए इबरत बन जाए।


फ़िरऔन की जवाबी कार्रवाई

………. फ़िरऔन ने अपने सरदारों से अगरचे इत्मीनान का इजहार कर दिया लेकिन हज़रत मूसा अलैहि सलाम के रूहानी ग़लबे का ख्याल उसको अन्दर ही अन्दर घुल डालता था और बनी इसराइल के लड़कों के क़त्ल के हुक्म से भी उनके कल्ब को सुकून नसीब न था, आखिरकार उसने कहा-

………. तर्जुमा- ‘मुझे मूसा को क़त्ल ही कर लेने दो और उसको चाहिए अपने रब को पुकारे।’ [40:26]

………. हज़रत मूसा को जब यह मालूम हुआ तो उन्होंने कहा-
………. तर्जुमा- ‘मैं अपने और तुम्हारे रब की पनाह चाहता हूँ, हर उस घमंडी से जो हिसाब के दिन पर ईमान नहीं लाता।’ [40:27]


मिस्री मर्दे मोमिन

………. फिरऔन और उसके सरदार जब उस बात-चीत में लगे हुए थे, तो उस मज्लिस में एक मिस्री ‘मर्दै मोमिन’ भी था, जिसने अभी तक अपने इस्लाम’ को छिपा रखा था। उसने जब यह सुना तो अपनी कौम के उन लोगों के मुकाबले में हज़रत मूसा अलैहि सलाम की ओर से बचाव करने की कोशिश शुरू की, और उनको समझाया कि तुम एक ऐसे आदमी को क़त्ल करने चले हो जो सच्ची बात कहता है कि मेरा परवरदिगार अल्लाह है और जो तुम्हारे सामने अपनी सच्चाई पर बेहतरीन दलील और निशनियां लाया है। मान लीजिए अगर वह झूठा है तो उसके झूठ से तुमको कुछ नुक्सान नहीं पहुंच रहा है और वह सच्चा है तो फिर उसकी उन धमकियों से डरो जो वह तुमको अल्लाह की ओर से सुनाता है।

………. फ़िरऔन ने मर्दै मोमिन की बात काटते हुए कहा कि मैं तुमको वही मश्विरा दे रहा हूं, जिसको अपने ख्याल में दुरुस्त समझता हूं और तुम्हारी भलाई की बात कह रहा हूं।

………. मर्दे मोमिन ने आखिरी नसीहत के तौर पर कहा: ऐ मेरी क़ौम! मुझे यह डर है कि हमारा हाल कहीं उन पिछली क़ौमों जैसा न हो जाए जो नूह, आद और समूद की कौमों के नाम से मशहूर हैं या उनके बाद कौमें आई। अल्लाह अपने बन्दों पर कभी जुल्म नहीं करता, बल्कि उन क़ौमों की हलाकत खुद अपने इसी किस्म के आमाल की बदौलत पेश आई थी जो आज तुम मूसा के खिलाफ सोच रहे हो तो तुम आज दुनिया में ‘बड़े’ होने की सोच में पड़े हो और मैं तुम्हारे लिए उस दिन से डर रहा हूं जब क़ियामत का दिन होगा और सब एक दूसरे को पुकारेंगे, मगर उस वक़्त तुम्हें कोई अल्लाह के अजाब से बचाने वाला न होगा।

………. ऐ कौम के सरदारो! तुम्हारा हाल तो यह है कि इस सरज़मीन में जब हज़रत यूसुफ़ अलैहि सलाम ने अल्लाह का पैग़ाम सुनाया था तब भी तुम यानी तुम्हारे बाप-दादा इसी शक और तशद्दुद में पड़े रहे और इन पर ईमान न लाए और जब इनकी वफ़ात हो गई, तो कहने लगे कि अब अल्लाह अपना कोई रसूल न भेजेगा। अब यही मामला तुम मूसा अलैहि सलाम के साथ कर रहे हो। खुदा के लिए समझो और सीधी राह अपनाओ।

………. जब फ़िरऔन और उसके सरदारों ने उस मर्दे मोमिन की ये बातें सुनी तो उनका रुख मूसा अलैहि सलाम से हटकर उसकी तरफ़ हो गया और फ़िरऔनियों ने चाहा कि पहले उसकी ही खबर लें और उसको क़त्ल कर दें, मगर अल्लाह तआला ने इस नापाक इरादे में उनको कामयाब न होने दिया।

To be continued …

इंशा अल्लाह अगले पार्ट 15.5 में हम देखंगे मिस्रियों पर अल्लाह का कहर और फिरौन का पानी में गर्क होना

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