क्या कयामत का संकेत देती है मछलियों की बारिश ? जानिए इसकी हकीकत …

विश्व के कई देशों में जलीय जीवों की बारिश देखी गई है। इस तरह की घटनाएं लोगों के अंदर भय तो पैदा करती ही हैं, वैज्ञानिकों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर भी करती हैं। कुछ जगह तो घड़ियालों को भी बारिश के साथ नीचे गिरते देखा गया है। 2015 में भारत के इस हिस्से में हुई थी ऐसी बारिश…

अमेरिका, जापान और भारत के साथ-साथ कई देशों में कई बार आसमान से मछलियों की बरसात हुई है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में कौतुहल के साथ भ्रम और भय की स्थिति बनी हुई है। कुछ समय पहले थाईलैंड में, वहीं वर्ष 2015 के जून महीने में भारत के विजयवाड़ा के गांव गोलमुंडी में मछलियों और मेंढकों की बारिश देखी गई थी। भयग्रस्त लोगों ने इसे ईश्वर का कहर बताया तो कुछ ने इसके बाद दुनिया में प्रलय आने की बात तक कही।
आसमान से इतनी मछलियां बरसीं कि लोग इकट्ठा करते-करते थक गए। थाईलैंड में तो यह तक कहा जाता है कि सालभर में करीब 100 से ज्यादा बार ऐसी बारिश होती है, जब मछलियां बारिश के पानी के साथ आसमान से नीचे आती हैं। कई बार तो घोंघे और घड़ियाल भी ऐसी बारिश के जरिए आसमान से जमीन पर गिरते देखे गए हैं।

तो सच क्या है?
प्रकृति के कई चमत्कार आज भी अनसुलझे हैं, लेकिन आसमान से मछलियों के गिरने की वजह का पता वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला है। वैज्ञानिकों के विस्तृत अध्ययन के बाद पाया गया इस तरह की घटनाएं जल स्तंभ या बवंडर के कारण होती हैं। जब बवंडर समुद्र तल को पार करते हैं तो ऐसी स्थिति में पानी के भीषण तूफान में बदल जाते हैं। इस दौरान चलने वाली हवाएं अपने साथ मछलियां, मेंढक, कछुए, केकड़े यहां तक कि कई बार घड़ियालों को भी साथ ले जाती हैं।

यह जीव इस बवंडर के साथ उड़ते रहते हैं और तब तक आसमान में होते हैं, जब तक हवा की गति कम न हो जाए। जैसे ही हवा धीमी होती है और यह बवंडर जहां पहुंचता है उसके आसपास के हिस्सों में यह जीव बरसात के पानी के साथ गिरने लगते हैं। वैज्ञानिक बिल इवांस की एक पुस्तक के अनुसार पानी के प्राणी सालभर में करीब 40 बार बारिश के पानी के आसमान से नीचे गिरते हैं।
– खबर दैनिक भास्कर

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