Waqt ki Pabandi, Soney aur Jaagne ka Waqt | Post 4 | Islam aur Humara Ghar

वक्त की पाबन्दी, सोने और जागने का वक़्त » पोस्ट 4⃣ » इस्लाम और हमारा घर

पोस्ट 4⃣

“इस्लाम और हमारा घर”

वक्त की पाबन्दी – सोने और जागने का वक़्त

अबूबर्ज़ा रज़िअल्लाहु अ़न्हु फ़रमाते हैं:
“अल्लाह के रसूल ﷺ इशा से पहले सोने और उसके बाद बात चीत करने को नापसंद करते थे।”

(बुखारी 535, मुस्लिम 1025)
अल्फ़ाज़ बुखारी के हैं ।

सिरीज » इस्लाम और हमारा घर

——J,Salafy✒——
▪शेयर करें▪

जिस शख़्स ने किसी नेकी का पता बताया, उसके लिए (भी) नेकी करने वाले के जैसा अजर हैं।
(स़ही़ह़ मुस्लिम: ज़ी. 3, हदीस 4665)

Ahadees in HindiBeautiful Hadees in HindiBest Hadees in HindiBest Islamic Hadees in Hindi LanguageBest Islamic Quotes in HindiJ.Salafyइस्लाम और हमारा घरवक्तहदीस की बातें हिंदी में


Recent Posts


भूत, प्रेत, बदरूह की हकीकत

क्या इन्सान वाकय में मरने के बाद भुत बन जाता है? अगर नहीं तो भुत प्रेत क्या है? ये इंसानों को क्यों तकलीफ पोहचाते है? इनसे कैसे बचा जाये ? तफ्सीली जानकारी के लिए जरुर इस पोस्ट का मुताला करे और इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करने में हमारी मदद करे ,. जज़ाकअल्लाहु खैरण कसीरा