‎बुतपरस्ती की इब्तेदा …

*नूह (अलैहिस्लाम) जिस कौम मे मबउस थे उस कौम मे पाँच नेक सालेहीन नेक बुजुर्ग औलिया अल्लाह थे |
– उनकी मज्लिशों मे बैठकर लोग अल्लाह को याद करते थे और मसाइल सुनते थे,
– इससे उनके दीन को तक्वियत पहुचती थी|

– जब वे ग़ुजर गए तो क़ौम मे परेशानी हुई कि अब न वो मज्लिस रही न वो मसाइल रहे, अब कहा बैठे ?
– उस वक्त शैतान ने उनके दिलों मे यह फूंक मारी कि इन बुजूर्गों की इबादतगाहों मे उनकी तस्वीर (बूत) बनाकर अपने पास रखलों |

– जब उन तस्वीरों को देखोगे तो उनका जमाना याद आ जाएगा और वह क़ैफियत पैदा हो जाएगी|
– तो उन के पाँचों के मुजस्समें बनाए गए और उन पाँचों का नाम था (1) वद , (2) सुवाअ , (3) यग़ूस , (4) नसर , (5) यऊक | उनका कुरआन मे जिक्र है ये पाँच बुत बनाकर रखे गए !
– उनका मक्सद सिर्फ तज़्कीर था की उन तस्वीरों(बुतो) के जरीए याद दिहानी हो जाएगी | उनको पूजना मक्सद नही था | शूरू मे जब तक लोगो के दिलों मे मारिफत रही, उन बुजूर्गों के असरात रहे |

– लेकिन जब दुसरी नस्ल आई तो उनके दिलों मे वह मारफत नही रही उनके सामने तो यही बुत थे |
– चूनांचे कुछ अल्लाह की तरफ मुतवज्जेह हुए और कुछ बुतों की तरफ मुतवज्जेह हुए |

– और जब तीसरी नस्ल आई तब तक शैतान अपना काम कर चुका था | उनके दिलों मे इतनी भी मारफत नही रही | उनके सामने बुत ही बुत रह गए | उन्ही को सज़्दा , उन्ही को नियाज उन्ही की नजर यहा तक की शिर्क शुरू हो गया | फिर तो नजराने वसूल किए जाने लगे मेंले और उर्स न जाने क्या क्या खुरापात शुरू हो गई ,..
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(तफ़्सीरे इब्ने कसीर:पारा 29 ,पेज. 42 ,सूर: नूह के दुसरे रूकूअ मे)

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Comments (12)
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  • MD RASHID

    Good

  • MD RASHID

    Umda

  • जीशान अहमद सिद्दीकी

    बढ़िया दिल खुस हो गया very Good..

  • इरफ़ान मेमन

    शुक्रिया
    अच्छी बातें बताई आने

  • Shazia azam qureshi

    Allah neik hidayat ata farmaye tamaam muslim aur muslima ko aur neik raah par chalaye ameen!

  • Shazia azam qureshi

    Subhan allah

  • Warish Alam

    GooG

  • Warish Alam

    Good

  • Rafeek malik

    Allah hu akber

  • M r Ali Ansari

    Masha Allah

  • Muhammad Mansur Razvi

    Bhai Jaan Kitab Ke Nam Ke Sath Bayan Kare Take Majid Malumat Ke Liye Kitab Ko Dekha Jae Aur Kisi Ko Koy Suba Paida Na Ho

  • firoj ahmad

    Tum log yahudi ki hi aulad ho buto aur walio ko ek sath jodte ho


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