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कुरान की नसीहत

6. शव्वाल | सिर्फ पाँच मिनट का मदरसा (कुरआन व हदीस की रौशनी में)

इस्लामी तारीख: हजरत जमीला बिन्ते सअद बिन रबी (र.अ.) हुजूर का मुअजिजा: हुजूर (ﷺ) की दुआ का असर एक फर्ज के बारे में: इल्म हासिल करना जरूरी है एक सुन्नत के बारे में: हर तरह की परेशानी से छुटकारा एक अहेम अमल की फजीलत: शहादत की मौत मांगना एक गुनाह के बारे में: हलाल को […]

4. शव्वाल | सिर्फ पाँच मिनट का मदरसा (कुरआन व हदीस की रौशनी में)

इस्लामी तारीख: हज़रत आयशा (र.अ) का इल्मी मर्तबा हुजूर का मुअजिजा: आंधी आने की खबर देना एक फर्ज के बारे में: हज किन लोगों पर फ़र्ज़ है एक सुन्नत के बारे में: मुशकिल कामों की आसानी की दुआ एक अहेम अमल की फजीलत: सूर-ए-इख्लास तिहाई कुरआन के बराबर है एक गुनाह के बारे में: फ़ितना […]

2. शव्वाल | सिर्फ पाँच मिनट का मदरसा (कुरआन व हदीस की रौशनी में)

इस्लामी तारीख: हज़रत खदीजा (र.अ) की फजीलत व खिदमात एक फर्ज के बारे में: नमाज़ों का सही होना एक सुन्नत के बारे में: मुसीबत के वक्त की दुआ एक अहेम अमल की फजीलत: इल्म हासिल करने के लिये सफर करना एक गुनाह के बारे में: अहेद और कस्मों को तोड़ना दुनिया के बारे में : […]

और (हे मनुष्य!) तेरे पालनहार ने आदेश दिया है कि उसके सिवा किसी की इबादत (वंदना) न करो तथा माता-पिता के साथ उपकार करो।” [कुरआन १७:२३] #Hadees #DailyHadees #HadeesoftheDay

अच्छाई उदारता नहीं है:  माता-पिता के साथ अच्छा बर्ताव अनिवार्य है उदारता नहीं। “और (हे मनुष्य!) तेरे पालनहार ने आदेश दिया है कि उसके सिवा किसी की इबादत (वंदना) न करो तथा माता-पिता के साथ उपकार करो।” (कुरआन १७:२३) Ref: Wisdom Media School | #IslamicQuotes by Ummat-e-Nabi.com

ऐ नबी हम ने आप को जन्नत की खुशखबरी देने वाला और जहन्नम से खबरदार कर देने वाला बना कर भेजा है।

पोस्ट 01: आप ﷺ की रिसालत का मकसद “अल्लाह तआ़ला क़ुरआन में फ़रमाता है:” ” ऐ नबी हम ने आप को गवाह बनाकर और जन्नत की खुशखबरी देने वाला और जहन्नम से खबरदार कर देने वाला बना कर भेजा है और अल्लाह के हुक्म के मुताबिक लोगों को उस की तरफ बुलाने वाला और रौशन […]

धर्म क्या है, और इसकी उत्पति कैसे हुयी ?

• सवाल 1. धर्म क्या है, और इसकी उत्पति कैसे हुयी ? • सवाल 2. आप धर्म को क्यों मानते हो और जीवन मै इसका क्या महतव है ? » जवाब: ● धर्म……… धर्म मौलिक मानवीय मूल्यों (अच्छे गुणों) से आगे की चीज़ है। अच्छे गुण (उदाहरणतः नेकी, अच्छाई, सच बोलना, झूठ से बचना, दूसरों […]

इस्लाम की मूल आस्थाये: तौहिद, रिसालत और आखिरत

इस्लाम की मुल आस्थाये ३ है , जिन्हें मानना सम्पूर्ण मानवजाति के लिए अनिर्वाय (Compulsory) है | तौहिद – एकेश्वरवाद (एक इश्वर में आस्था रखना) रिसालत – प्रेशित्वाद (इशदुत, नबी, Messengers) आखिरत – परलोकवाद (मृत्यु के बाद का जीवन) पहली अनिर्वाय आस्था – तौहीद इस्लाम की सबसे पहली जो आस्था है तौहिद इसको हम आपके […]

पवित्र क़ुरआन और अंतरिक्ष विज्ञान (Holy-Quran & Space Science)…

– जब से इस पृथ्वी ग्रह पर मानवजाति का जन्म हुआ है, तब से मनुष्य ने हमेशा यह समझने की कोशिश की है कि प्राकृतिक व्यवस्था कैसे काम करती है, रचनाओं और प्राणियों के ताने-बाने में इसका अपना क्या स्थान है और यह कि आखि़र खु़द जीवन की अपनी उपयोगिता और उद्देश्य क्या है ? […]

पवित्र क़ुरआन और परमाणु: (Holy Quran & Atoms)

*तमाम संस्कृतियों में मानवीय शक्ति वचन और रचनात्मक क्षमताओं की अभिव्यक्ति के प्रमुख साधनों में साहित्य और शायरी (काव्य रचना) सर्वोरि है। विश्व इतिहास में ऐसा भी ज़माना गु़ज़रा है जब समाज में साहित्य और काव्य को वही स्थान प्राप्त था जो आज विज्ञान और तकनीक को प्राप्त है। – गै़र-मुस्लिम भाषा-वैज्ञानिकों की सहमति है […]

नर और मादा पौधे (Holy-Quran & Botany) ….

*पवित्र क़ुरआन और वनस्पति विज्ञान: – प्राचीन काल के मानवों को यह ज्ञान नहीं था कि पौधों में भी जीव जन्तुओं की तरह नर (पुरूष) मादा (महिला) तत्व होते हैं। अलबत्ता आधुनिक वनस्पति विज्ञान यह बताता है कि पौधे की प्रत्येक प्रजाति में नर एवं मादा लिंग होते हैं। यहां तक कि वह पौधे जो […]

पशुओं और परिंदों का समाजी जीवन …

*पवित्र क़ुरआन और जीव विज्ञान (Holy Quran & Biology) ♥ अल-क़ुरआन: “धरती पर चलने वाले किसी पशु और हवा में परों से उड़ने वाले किसी परिंदे को देख लो यह सब तुम्हारे ही जैसी नस्लें हैं और हम ने उनका भाग्य लिखने में कोई कसर नहीं छोड़ी हैः फिर यह सब अपने रब की ओर […]

मधु (शहद) मानवजाति के लिये, शिफ़ा (रोग मुक्ति)

*पवित्र क़ुरआन और चिकित्सा-विज्ञान (Holy Quran & Medical Science) .. *शहद की मक्खी कई प्रकार के फूलों और फलों का रस चूसती हैं और उसे अपने ही शरीर के अंदर शहद में परिवर्तित करती हैं। इस शहद यानि मधु को वह अपने छत्ते के बने घरों (cells) में इकटठा करती हैं। आज से केवल कुछ […]