औ़रतों का जिहाद ह़ज है।

पोस्ट 27 :
औ़रतों का जिहाद ह़ज है।

उम्मुल मोमिनीन आ़ईशा रज़िअल्लाहु अ़न्हा से रिवायत है कि,
उन्होंने अल्लाह के रसूल ﷺ से अ़र्ज़ किया:

❝ ऐ अल्लाह के रसूल, हम समझते हैं कि जिहाद सबसे अफ़ज़ल अमल है, फिर क्या हम भी जिहाद ना करें?
आप ﷺ ने फ़रमाया: नहीं, लेकिन सबसे अफ़ज़ल जिहाद ह़ज्जे मबरूर है

एक रिवायत है कि फरमाती हैं:
“मैं ने अल्लाह के नबी ﷺ से जिहाद में जाने की इजाज़त चाही तो आप ने फ़रमाया:
तुम औ़रतों का जिहाद ह़ज है।”

 📕 बुख़ारी: अल ह़ज 1520, अल जिहाद वस्सियर 2875: 

————-J,Salafy————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं
(सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224)

Series : ख़्वातीन ए इस्लाम

J.Salafyबुख़ारीसुनन इब्ने माजाहदीस की बातें हिंदी में
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