औ़रतें मर्दों की शक़ाइक हैं।

पोस्ट 20 :
औ़रतें मर्दों की शक़ाइक हैं।

आ़ईशा रज़िअल्लाहु अ़न्हा से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ﷺ से पूछा गया कि:

❝एक शख़्स़ (नींद से जागने पर कपड़ों में) गीलापन देखे लेकिन उसे एह्तेलाम याद ना हो (तो वो क्या करे ?) आप ने फ़रमाया: वो गुस्ल करले । फ़िर आप से उस शख़्स़ के बारे में पूछा गया जिसे एह्तेलाम तो याद हो लेकिन वो तरी ना पाए । आप ने फ़रमाया: उस पर गुस्ल नहीं है । इस पर उम्मे सुलैम रज़िअल्लाहु अ़न्हा ने कहा: अगर औ़रत भी इस त़रह़ (गीलापन) पाए तो क्या उस पर भी गुस्ल है ? आप ने फ़रमाया: हां, औ़रतें मर्दों ही की शक़ाइक हैं। ❞

📕 मुस्नद अहमद, अबू दाऊद, तिर्मिज़ी – राविया: आ़ईशा
📕 अल बज़्ज़ार – रावी: अनस स़ही़ह़ अल जामे 2333

————-J,Salafy————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं
(सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224)

Series : ख़्वातीन ए इस्लाम

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