औरत और इल्मी तह़क़ीक़ व उलमा से सवाल।

पोस्ट 23 :
औरत और इल्मी तह़क़ीक़ व उलमा से सवाल।

इब्ने अबी मुलैका से रिवायत है कि;

❝ नबी ﷺ की ज़ौजा मोहतरमा आ़ईशा रज़िअल्लाहु अ़न्हा का मुआ़मला ये था कि जब भी वो नबी ﷺ से कोई बात सुनती और वो बात उन की समझ में ना आती तो उसे दोबारा दरियाफ़्त करती यहां तक की वो बात अच्छी तरह समझ में आ जाती। लिहाज़ा एक मर्तबा अल्लाह के नबी ﷺ ने फ़रमाया: जिस का हिसाब लिया गया उसे अ़ज़ाब दिया जाएगा।

हज़रत आ़ईशा रज़िअल्लाहु अ़न्हा फ़रमाती हैं: मैं ने अ़र्ज़ किया: क्या अल्लाह तआ़ला ने यूं नहीं फ़रमाया कि: فَسَوۡفَ یُحَاسَبُ حِسَابًا یَّسِیۡرًا
(जिस शख़्स़ का आ़माल नामा उस के दाएं हाथ में दिया गया) उस से आसान हिसाब लिया जाएगा? (अल इनशिक़ाक़ 8)

इस पर आप ने फ़रमाया: इस (आयत में हिसाब) से मुराद तो बस पेशी है। लेकिन जिस का हिसाब उधेड़ा गया वो हलाक हो जाएगा।

📕 बुखारी: अल इल्म 103
📕 मुस्लिम: अल जऩ्ना व स़िफ़ति नईमिहा व अहलिहा 5122

————-J,Salafy————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं
(सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224)

Series : ख़्वातीन ए इस्लाम

J.Salafyबुखारी शरीफ हदीस हिंदी मेंमुस्लिमसुनन इब्ने माजाहदीस की बातें हिंदी में
Comments (0)
Add Comment


Recent Posts


Kyu Humesha Musalmano ko fasaya jata hai?

जानिए - दुनिआ में कही भी कोई हादसा हो तो इल्ज़ाम हमेशा मुसलमानो पर ही क्यों लगाया जाता है