आपल्या आईवडिलांशी चांगले वागा. निश्चितच तुमची मुले देखील तुमच्याशी चांगले वागतील.

आपल्या आईवडिलांशी चांगले वागा. निश्चितच तुमची मुले देखील तुमच्याशी चांगले वागतील. [अल्लाह चे अंतिम पैगंबर मुहम्मद ﷺ]

ऐ नबी हम ने आप को जन्नत की खुशखबरी देने वाला और जहन्नम से खबरदार कर देने वाला बना कर भेजा है।

पोस्ट 01: आप ﷺ की रिसालत का मकसद “अल्लाह तआ़ला क़ुरआन में फ़रमाता है:” ” ऐ नबी हम ने आप को गवाह बनाकर और जन्नत की खुशखबरी देने वाला और जहन्नम से खबरदार कर देने वाला बना कर भेजा है और अल्लाह के हुक्म के मुताबिक लोगों को उस की तरफ बुलाने वाला और रौशन […]

ख्वातीन-ए-इस्लाम

मुस्लिम ख़्वातीन से मुताअ़ल्लिक़ मोअ्तबर अह़ादीस़ का एक मुख़्तसर मजूमुआ अल्लाह की रह़मत समझाने के लिए मां की रह़मत की त़रफ़ इशारा करना मां बेहतरीन सुलुक की ह़क़दार है… नेक औ़रत बेहतरीन मताअ़् है… बेहतरीन औ़रत और बद्तरीन औ़रत किस औ़रत से निकाह़ बेहतर है ? बेहतरीन बीवी कौन ? शोहर की फ़रमांबरदारी की फ़ज़ीलत […]

जऩ्नत में बुढ़ापा नहीं।

पोस्ट 49 : जऩ्नत में बुढ़ापा नहीं। हसन बसरी रहिमहुल्लाह फ़रमाते हैं: ❝ एक बूढ़ी औरत नबी ﷺ के पास आई और कहा: ऐ अल्लाह के रसूल, अल्लाह से दुआ़ कीजिए कि वो मुझे जऩ्नत में दाख़िल कर दे । इस पर आप ने फ़रमाया: ओ फुलां, जऩ्नत में बुढ़ी औरत नहीं जाएगी । इस […]

सब्र दरअस़्ल सदमे की इब्तिदा में होता है।

पोस्ट 48 : सब्र दरअस़्ल सदमे की इब्तिदा में होता है। साबित अल बुनानी रहिमहुल्लाह फ़रमाते हैं कि: ❝ मैं ने अनस बिन मालिक रज़िअल्लाहु अ़न्हु को उनके घर की किसी ख़ातून से फ़रमाते सुना: क्या तुम फुलां औ़रत को जानती हो ? उन्होंने कहा: हां। फ़रमाया: अल्लाह के नबी ﷺ उस औ़रत के पास […]

जन्नती औरत: मुस़ीबत पर स़ब्र की फ़ज़ीलत।

पोस्ट 47 : जन्नती औरत: मुस़ीबत पर स़ब्र की फ़ज़ीलत। अ़त़ा बिन अबी रबाह़ से रिवायत है कि, मुझसे इब्ने अ़ब्बास रज़िअल्लाहु अ़न्हु ने फ़रमाया: ❝ क्या मैं तुम्हें एक जन्नती औरत ना दिखाऊं ! मैं ने कहा: ज़रूर। फ़रमाया: ये काली औ़रत, अल्लाह के नबी ﷺ के पास आई और कहा: ऐ अल्लाह के रसूल […]

नौहा (मातम) करने वाली औ़रत।

पोस्ट 46 : नौहा (मातम) करने वाली औ़रत। अबू मालिक अल अश्अ़री से रिवायत है कि, अल्लाह के नबी ﷺ ने फ़रमाया: ❝ जाहिलियत की चार चीज़ें मेरी उम्मत में बाक़ी रहेंगी, वो उसे नहीं छोड़ेंगे। हसब पर फ़ख़्र करना, नसब पर ताअ़्न करना, सितारों से बारिश का अ़कीदा रखना, और (मय्यित पर) मातम करना। […]

पडोसन के हदिये की क़द्र करना।

पोस्ट 45 : पडोसन के हदिये की क़द्र करना। अबू हुरैराह रज़िअल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि अल्लाह के नबी ﷺ ने फ़रमाया: ❝ ऐ मुसलमान औरतों! कोई औ़रत अपनी पडौसन (के हदिये) को हकीर ना समझे चाहे वो हदिये में बकरी का खुर ही क्यूं ना दे। ❞ 📕 बुखारी: अल हिबा व फ़ज़्लिहा वत्तह़रीजु […]