30. शव्वाल | सिर्फ पाँच मिनट का मदरसा (कुरआन व हदीस की रौशनी में)

  1. इस्लामी तारीख: हजरत सुहेल बिन अम्र (र.अ)
  2. हुजूर (ﷺ) का मुअजिजा: एक वसक जौ में बरकत
  3. एक फर्ज के बारे में: बीवी को उस का महर देना
  4. एक सुन्नत के बारे में: औलाद के फर्माबरदार होने के लिए
  5. एक अहेम अमल की फजीलत: पहली सफ की फजीलत
  6. एक गुनाह के बारे में: कुरआन का मज़ाक उड़ाना
  7. दुनिया के बारे में: माल की मुहब्बत अल्लाह की नाशुक्री का सबब है
  8. आख़िरत के बारे में: हर शख्स मौत के बाद अफ़सोस करेगा
  9. तिब्बे नबवी से इलाज: बड़ी बीमारियों से हिफ़ाज़त
  10. नबी ﷺ की नसीहत: हमेशा ऐसे शख्स को देखो जो

1. इस्लामी तारीख:

हजरत सुहेल बिन अम्र (र.अ)

.     हजरत सुहैल बिन अम्र (र.अ) “खतीब कुरैश” के लकब से मशहूर थे, शायरी में भी कमाल रखते थे, इमांन लाने से पहले तमाम जंगों में तकरीर व शायरी के जरिए मुशरिकीने मक्का को मुसलमानों के खिलाफ़ उभारते रहे, जब ग़ज़व-ए-बद्र में मुसलमानों के हाथों कैद हुए, तो हजरत उमर (र.अ) ने उन के सामने के दो दांत तोड़ने की इजाज़त चाही तो, हुजूर (ﷺ) ने फ़र्माया: उमर जाने दो शायद इसकी तकरीर व खिताबत और शायरी तुम्हारे काम आजाए, चुनान्चे सुलहे हुदैबिया के मौके पर कुरैशे मक्का की तरफ़ से सुलहनामा लिखने के लिए सुहेल बिन अम्र (र.अ) ही को मुन्तखब किया गया था।

.     फतहे मक्का के मौके पर अबू जनदल की दरख्वास्त पर नबी (ﷺ) ने उन के बाप सुहैल को अमान दी।  लिहाजा आप (ﷺ) के इस हुस्ने सुलूक से मुतअस्सिर हो कर ईमान में दाखिल हो गए, नमाज, रोज़ा, सदका व खैरात में बेमिसाल थे, मुसलसल इबादत की वजह से उन का बदन सूख कर लकड़ी की तरह हो गया था। वह इस्लाम से पहली जिंदगी को याद कर के और कुरआन शरीफ़ सुन कर बहुत रोया करते थे।

.     हजरत अबू बक्र (र.अ) के दौर में फ़ितनों को खत्म करने में हजरत सुहैल (र.अ) और उन के घराने की कोशिशें काबिले तारीफ़ हैं। रात भर इबादत करते और दिन सिपेह सालार की हैसियत से यरमूक के मैदान में गुज़ारते। और इसी जंग में १३ हिजरी में जामे शहादत नोश फ़रमाया।

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2. हुजूर (ﷺ) का मुअजिजा

एक वसक जौ में बरकत

हज़रत आयशा (र.अ) बयान करती हैं के जब आँहज़रत (ﷺ) ने वफ़ात पाई, तो कुछ वसक (वजन) बरावर जौ के सिवा घर में कुछ न था, हम बकद्रे जरूरत उस में से इस्तेमाल करते रहते थे, लेकिन वह खत्म ही नहीं होता था, तो हम ने उस को तोला, बस फ़िर वह खत्म हो गया यानी वह बरकत जाती रही।

[बुखारी: ३०१७]

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3. एक फर्ज के बारे में:

बीवी को उस का महर देना

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

“तुम लोग अपनी बीवियों को उन का महर खुश दिली से दे दिया करो, अलबत्ता अगर वह अपने महर में से कुछ छोड़ दें, तो उसे लज़ीज़ और खुश गवार समझ कर खाओ।”

[सूर-ए-निसा: ४]

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4. एक सुन्नत के बारे में:

औलाद के फर्माबरदार होने के लिए

जो शख्स यह चाहता हो के उस की औलाद फर्माबरदार और नेक हो, तो वह यह दुआ पढ़े :

“परवरदिगार तो मुझे तौफ़ीक़ अता फरमा कि तूने जो एहसानात मुझ पर और मेरे वालदैन पर किये हैं मैं उन एहसानों का शुक्रिया अदा करूँ और ये (भी तौफीक दे) कि मैं ऐसा नेक काम करूँ जिसे तू पसन्द करे और मेरे लिए मेरी औलाद में सुलाह व तक़वा पैदा करे तेरी तरफ रूजू करता हूँ और मैं यक़ीनन फरमाबरदारो में हूँ।”

[सूर-ए-अहकाफ 46:15]

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5. एक अहेम अमल की फजीलत:

पहली सफ की फजीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“अल्लाह तआला पहली सफ़ वालों पर रहमत भेजते हैं और फ़रिश्ते दुआए मग़फ़िरत फ़र्माते हैं।”

[इब्ने माजा : ९९९, अन अब्दुर्रहमान बिन ऑफ़ (र.अ)]

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6. एक गुनाह के बारे में:

कुरआन का मज़ाक उड़ाना

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

“जब इन्सान के सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहता है के यह पहले लोगों के किस्से कहानियों हैं।  हरगिज़ नहीं ! बल्के उन के बुरे कामों के सबब उन के दिलों पर जंग लग गया है।”

[सूरह मुताफ्फिन १३-१४]

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7. दुनिया के बारे में :

माल की मुहब्बत अल्लाह की नाशुक्री का सबब है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“इन्सान अपने रब का बड़ा ही नाशुक्रा है, हालांके उस को भी इसकी खबर है (और वह ऐसा मामला इसलिए करता है) के उस को माल की मुहब्बत ज़ियादा है।”

[सूर-ए-आदियात : ६-८]

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8. आख़िरत के बारे में:

हर शख्स मौत के बाद अफ़सोस करेगा

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया:

हर शख्स मौत के बाद अफ़सोस करेगा, सहाबा ने अर्ज किया : या रसूलल्लाह! किस बात पर अफसोस करेगा? आप (ﷺ) ने फ़र्माया: अगर नेक है, तो जियादा नेकी न करने पर अफ़सोस करेगा और अगर गुनहगार है तो गुनाह से न रुकने पर अफ़सोस करेगा।

[तिर्मिज़ी : २४०३, अन अबी हुरैराह (र.अ)]

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9. तिब्बे नबवी से इलाज:

बड़ी बीमारियों से हिफ़ाज़त

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

“जो शख्स हर महीने तीन दिन सुबह के वक्त शहद चाटेगा, तो उसे कोई बड़ी बीमारी नहीं लगेगी।”

[इब्ने माजा: ३४५०, अन अबी हुरैरह (र.अ)]

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10. नबी ﷺ की नसीहत:

हमेशा ऐसे शख्स को देखो जो

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया:

“जब तुम में से कोई ऐसे शख्स को देखे जो माल व दौलत और शक्ल व सूरत में उस से बढ़ा हुआ हो, तो उस को चाहिए के किसी ऐसे शख्स को देखे, जो उस से (माल व दौलत में) कम हो (ताके शुक्र की कैफियत पैदा हो)

[बुखारी: ६१०, अन अबी हुरैराह (र.अ)]

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