2. शव्वाल | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

(1). हज़रत खदीजा (र.अ) की फजीलत व खिदमात, (2). नमाज़ों का सही होना जरूरी है, (3). मुसीबत के वक्त की दुआ, (4). इल्म हासिल करने के लिये सफर करना, (5). अहेद और कस्मों को तोड़ने का गुनाह, (6). दुनिया पर मुतमइन नहीं होना चाहिए, (7). कयामत का मंज़र, (8). सब से बेहतरीन दवा, (9). मजलूम की बद्दुवा से बचो।

सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा
5 Minute Ka Madarsa in Hindi

  1. इस्लामी तारीखहज़रत खदीजा (र.अ) की फजीलत व खिदमात
  2. एक फर्ज के बारे मेंनमाज़ों का सही होना जरूरी है
  3. एक सुन्नत के बारे मेंमुसीबत के वक्त की दुआ
  4. एक अहेम अमल की फजीलतइल्म हासिल करने के लिये सफर करना
  5. एक गुनाह के बारे मेंअहेद और कस्मों को तोड़ने का गुनाह
  6. दुनिया के बारे मेंदुनिया पर मुतमइन नहीं होना चाहिए
  7. आख़िरत के बारे मेंकयामत का मंज़र
  8. क़ुरान की नसीहतसब से बेहतरीन दवा
  9. नबी (ﷺ) की नसीहतमजलूम की बद्दुवा से बचो
1

इस्लामी तारीख

हज़रत खदीजा (र.अ) की फजीलत व खिदमात

उम्मुल मोमिनीन हज़रत खदीजा (र.अ) को जो फज़ल व कमाल अल्लाह तआला ने अता फ़रमाया था, उस में कयामत तक कोई खातून शरीक नहीं हो सकती, उन्होंने सब से पहले हुजूर (ﷺ) की नुबुव्वत की तसदीक करते हुए ईमान कबूल किया। सख्त आज़माइश में आप (ﷺ) का साथ देना, इस्लाम के लिए हर एक तकलीफ़ को बर्दाश्त करना, रंज व गम के मौके पर आप (ﷺ) को तसल्ली देना, यह उन की वह सिफ़ात हैं, जो उन्हें दीगर उम्महातुल मोमिनीन से मुमताज कर देती हैं।

.     अल्लाह तआला ने (फ़रिश्ते) जिब्रईले अमीन के जरिए उन्हें सलाम भेजा। खुद पैगंबर (ﷺ) ने फ़रमाया “अल्लाह की कसम! मुझे खदीजा से अच्छी बीवी नहीं मिली”, वह उस वक्त मुझ पर ईमान लाई जब लोगों ने इन्कार किया। उस ने उस वक्त मेरी नुबुव्वत की तसदीक की जब लोगों ने मुझे झुटलाया, उसने मुझे अपना माल व दौलत अता किया जब के दूसरे लोगों ने महरूम रखा। हकीकत यह है के इब्तिदाए इस्लाम में उन्होंने दीन की इशाअत व तबलीग में अपनी जानी व माली खिदमात अंजाम देकर पूरी उम्मत पर बड़ा एहसान किया है।

.     अल्लाह तआला उन्हें इस का बेहतरीन बदला अता फरमाए। (आमीन), सन १० नब्वी में ६५ साल की उम्र में (वफ़ात पाई और मक्का के हुजून नामी कब्रस्तान (यानी जन्नतुल माला) में दफन की गई।

[ इस्लामी तारीख ]
2

एक फर्ज के बारे में

नमाज़ों का सही होना जरूरी है

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“कयामत के दिन सब से पहले नमाज़ का हिसाब होगा, अगर नमाज़ अच्छी हुई तो बाकी आमाल भी अच्छे होंगे और अगर नमाज खराब हुई तो बाकी आमाल भी खराब होंगे।”

[ तर्गीब व तहींब: ५१६ ]
3

एक सुन्नत के बारे में

मुसीबत के वक्त की दुआ

जब कोई मुसीबत पहुँचे या उसकी खबर आए, तो यह दुआ पढ़ेः

“इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलाही राजिऊन”

तर्जमा : हम सब (मअ माल व औलाद हकीक़त में) अल्लाह तआला ही की मिल्कियत में है और मरने के बाद) हम सब को उसी के पास लौट कर जाना है।

4

एक अहेम अमल की फजीलत

इल्म हासिल करने के लिये सफर करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“जो शख्स ऐसा रास्ता चले जिस में इल्म की तलाश मक्सूद हो तो अल्लाह तआला उस के लिए जन्नत का रास्ता आसान कर देगा।”

[ मुस्लिम : ६८५३ ]
5

एक गुनाह के बारे में

अहेद और कस्मों को तोड़ने का गुनाह

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“यक़ीनन जो लोग अल्लाह तआला से अहेद कर के उस अहेद को और अपनी क़स्मों को थोड़ी सी कीमत पर फरोख्त कर डालते हैं, तो ऐसे लोगों का आखिरत में कोई हिस्सा नहीं और न अल्लाह तआला उनसे बात करेगा और न कयामत के दिन (रहमत की नज़र से) उनकी तरफ देखेगा और न उन को पाक करेगा और उन के लिये दर्दनाक अजाब होगा।”

[ सूरह आले इमरान : ७७ ]
6

दुनिया के बारे में

दुनिया पर मुतमइन नहीं होना चाहिये

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है :

“जिन लोगों को हमारे पास आने की उम्मीद नहीं है और वह दुनिया की जिन्दगी पर राजी हो गए और उस पर वह मुतमइन हो बैठे और हमारी निशानियों से गाफिल हो गए हैं, ऐसे लोगों का ठिकाना उनके आमाल की वजह से जहन्नम है।”

7

आख़िरत के बारे में

कयामत का मंजर

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:

“अगर (आखिरत के हौलनाक अहवाल के मुतअल्लिक) तुम्हें वह सब मालूम हो जाए जो मुझे मालूम है, तो तुम्हारा हँसना बहुत कम हो जाए और रोना बहुत बढ़ जाए।”

[ बुखारी : ६४८६ ]
8

क़ुरान की नसीहत

सब से बेहतरीन दवा

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “सबसे बेहतरीन दवा कुरआन है।”

फायदा : उलमाए किराम फर्माते हैं के क़ुरआनी आयात के मफ़हूम के मुताबिक जिस बीमारी के लिए जो आयत मुनासिब हो, उस आयत को पढ़ने से इन्शा अल्लाह शिफा होगी और यह सहाब-ए-किराम का मामूल था।

[ इब्ने माजा: ३५३३ ]
9

नबी (ﷺ) की नसीहत

मजलूम की बद्दुवा से बचो

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया:

“ऐसे शख्स की बद्दुआ से बचो, जिस पर जुल्म किया गया हो, इस लिए के उसकी बद्दुआ और अल्लाह के दर्मियान कोई आड़ नहीं होती है।”

[ तिर्मिज़ी : २०१४ ]
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