30. रबी उल आखिर | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

(1). मदीना में हुजूर (ﷺ) का इस्तिकबाल, (2). किला फतह होना, (3). वालिदैन के साथ एहसान का मामला करो, (4). घरवालों पर सवाब की नियत से खर्च करना भी सदक़ा है, (5). कुरआन का मजाक उड़ाना, (6). माल की मुहब्बत खुदा की नाशुक्री का सबब है, (7). हर शख्स मौत के बाद अफसोस करेगा, (8). तलबीना से इलाज, (9). औरतो से उनकी दिनदारी की वजह से निकाह करो।

Sirf Paanch Minute ka Madrasa in Hindi

Sirf 5 Minute Ka Madarsa (Hindi Book)

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1. इस्लामी तारीख

मदीना में हुजूर (ﷺ) का इस्तिकबाल

कुबा में चौदा दिन कयाम फ़र्मा कर रसूलुल्लाह (ﷺ) मदीना तय्यिबा के लिये रवाना हो गए, जब लोगों को आप के तशरीफ लाने का इल्म हुआ, तो खुशी में सब के सब बाहर निकल आए और सड़क के किनारे खड़े हो गए, सारा मदीना “अल्लाहु अक्बर” के नारों से गूंज उठा, अंसार की बच्चियाँ खुशी के आलम में यह अश्आर पढ़ने लगीं:
“तर्जुमा: “रसूलुल्लाह (ﷺ) की आमद ऐसी है के गोया के वदअ पहाड़ की घाटियों से चौदहवीं का चाँद निकल आया हो, लिहाज़ा जब तक दुनिया में अल्लाह का नाम लेने वाला बाकी रहेगा, उन का शुक्र हम पर वाजिब रहेगा, ऐहम में मबऊस होने वाले! आपमाने वाले अहकामात लाए हैं।”

और बनू नज्जार की लड़कियाँ दफ बजा बजाकर गा रही थीं:
“तर्जुमा: “हम खानदाने नज्जार की लड़कियाँ हैं, मुहम्मद (ﷺ) क्या ही अच्छे पड़ोसी हैं।”

हज़रत अनस बिन मालिक (र.अ) फ़र्माते हैं के मैं ने कोई दिन उस से ज़ियादा हसीन और रौशन नहीं देखा, जिस दिन रसूलुल्लाह (ﷺ) हमारे यहाँ (मदीना) तशरीफ लाए।

To be Continued …

📕 इस्लामी तारीख


2. हुजूर (ﷺ) का मुअजीजा

किला फतह होना

जंगे खैबर के दिन चन्द आदमी रसूलुल्लाह (ﷺ) के पास आ कर भूक की शिकायत करने लगे और रसूलुल्लाह (ﷺ) से सवाल करने लगे, लेकिन हुजूर (ﷺ) के पास कोई चीज़ न थी, तो आप ने अल्लाह तआला से दुआ की : या अल्लाह ! तू इन की हालत से वाकिफ है, इन के पास खाने के लिये ही कुछ भी नहीं और न ही मेरे पास है के मैं इन को दूँ, या अल्लाह ! तू इन के लिये खैबर का ऐसा किला फतह करदे जो सब किलों में माल व दौलत के एतेबार से जियादा फरावानी रखता हो, चुनान्चे अल्लाह तालाने सअब बिन मुआज का किला फतह कर दिया जो खैबर के सब किलों में मालदार था।

📕 बैहक़ी फी दलाइलिन्नुबुबह : १५६७


3. एक फर्ज के बारे में

वालिदैन के साथ एहसान का मामला करो

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“तुम्हारे रब (अल्लाह) ने फैसला कर दिया है उसके के अलावा किसी और की इबादत न करो और वालिदैन के साथ एहसान का मामला करो।”

खुलासा: माँ बाप की खिदमत करना और उनके साथ अच्छा बरताव करना फर्ज है।

📕 सूरह बनी इस्राईल : २३


4. एक सुन्नत के बारे में

खाना खाते वक्त टेक न लगाना

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया: “मैं टेक लगा कर नहीं खाता हूँ।”

फायदा: बिला उज्र टेक लगा कर खाना सुन्नत के खिलाफ है।

📕 बुखारी: ५३९८


5. एक अहेम अमल की फजीलत

घरवालों पर सवाब की नियत से खर्च करना भी सदक़ा है

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“जब आदमी अपने अहले खाना पर सवाब की निय्यत से खर्च करता है, तो यह खर्च करना उस के हक में सद्का है।”

📕 बुखारी: ५५


6. एक गुनाह के बारे में

कुरआन का मजाक उड़ाने का गुनाह

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“जब इन्सान के सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहता है के यह पहले लोगों के किस्से कहानियां हैं। हरगिज़ नहीं! बल्के उन के बुरे कामों के सबब उन के दिलों पर जंग लग गया है।”

📕 सूरह मुतफ्फिफीन: १३ ता १४


7. दुनिया के बारे में

माल की मुहब्बत खुदा की नाशुक्री का सबब है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“इन्सान अपने रब का बड़ा ही नाशुक्रा है, हालाँ के उसको भी इस की खबर है (और वह ऐसा मामला इस लिये करता है) के उस को माल की मुहब्बत ज़ियादा है।”

📕 सूरह आदियात: ६ ता ८


8. आख़िरत के बारे में

हर शख्स मौत के बाद अफसोस करेगा

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “हर शख्स मौत के बाद अफसोस करेगा, सहाबा ने अर्ज किया: या रसूलअल्लाह (ﷺ) ! किस बात का अफसोस करेगा? आप (ﷺ) ने फ़र्माया : अगर नेक है, तो जियादा नेकी न करने का अफसोस करेगा और अगर गुनहगार है तो गुनाह से न रूकने पर अफसोस करेगा।

📕 तिर्मिज़ी : २४०३


9. तिब्बे नबवी से इलाज

तलबीना से इलाज

हजरत आयशा (र.अ) बीमार के लिये तलबीना तय्यार करने का हुकम देती थीं और फर्माती थीं के मैंने हुजूर (ﷺ) को फ़र्माते हुए सुना के:

“तलबीना बीमार के दिल को सुकून पहुँचाता है और रंज व ग़म को दूर करता है।”

📕 बुखारी: ५६८९

फायदा: जौ (बरली) को कट कर दूध में पकाने के बाद मिठास के लिए इस में शहद डाला जाता है; इस को तलबीना कहते हैं।


10. नबी (ﷺ) की नसीहत

औरतो से उनकी दिनदारी की वजह से निकाह करो

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“तुम औरतों से (सिर्फ) उन के हुस्न व जमाल की वजह से शादी न करो क्योकि हुस्न व जमाल खत्म होने वाला है और न उनकी मालदारी की वजह से शादी करो, मुमकिन है यह मालदारी उनको नाफ़रमानी में मुब्तला कर दे, अलबत्ता उनसे दीनदारी की बूनियाद पर निकाह करो।”

📕 इब्ने माजा: १८५९


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