3 रजब | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

1. इस्लामी तारीख

हज़रत उमर (र.अ) का इस्लाम लाना

हजरत उमर फारूक (र.अ) का शुमार अरब के बड़े बड़े बहादुरों में होता था।

इस्लाम कबूल करने से पहले हजरत उमर (र.अ) मुसलमानों के सख्त दुश्मन थे और रसूलुल्लाह (ﷺ) के कत्ल की फिक्र में रहते थे। एक दिन इसी नापाक इरादे से तलवार लटकाए हुए चले जा रहे थे के रास्ते में हजरत नुऐम बिन अब्दुल्लाह (र.अ) मिल गए। उन्होंने पूछा के उमर ! कहाँ जा रहे हो? कहने लगे के मुहम्मद को क़त्ल करने (नऊजु बिल्लाह) उन्होंने कहा के पहले अपने घर की तो खबर ले, तेरी बहन और बहनोई दोनों मुसलमान हो चुके हैं।

यह सुनना था के हजरत उमर गुस्से से भर गए और सीधे बहन के घर गए और दोनों को खूब मारा, यहाँ तक के बहन खून से लहूलुहान हो गई।
इस मारपीट के बाद जब उमर का गुस्सा कुछ ठंडा हुआ तो उन्होंने कहा के मुझे वह सहीफ़ा दिखाओ जो तुम लोग पढ़ रहे थे। बहन ने है कहा के तुम नापाक हो, गुस्ल किये बगैर उस को हाथ नहीं लगा सकते। लिहाजा उन्होंने ग़ुस्ल किया और बहन से कुरआन ले कर पढ़ना शुरू किया, कुरआन पढ़ते ही उनकी हालत बदल गई।

फौरन हुजूर (ﷺ) की खिदमत में हाज़िर हुए और मुसलमान हो गए।
सहाबा-ए-किराम को आप के इस्लाम लाने से बेहद खुशी हुई और इस ज़ोर से अल्लाहु अक्बर का नारा बुलन्द किया के सारा मक्क़ा गूंज उठा।


2. अल्लाह की कुदरत

बाल, अल्लाह की दी हुई नेअमत है

बाल अल्लाह तआला का दिया हुआ अनमोल तोहफ़ा है;

अल्लाह तआला ने इन्सान के सर पर रेशम की तरह चमक्दार और खूबसूरत बाल उगाए हैं, जो सदी, गर्मी और दूसरी नुक्सान देह चीजों से सर की हिफ़ाज़त करते हैं और चेहरे की खूबसूरती को बढ़ाते हैं; अल्लाह तआला ने हमारे जिस्म के मुनासिब जगहों पर बाल उगाए।

अगर बाल होंटों पर उग आते, तो कितनी परेशानी होती, न ठीक से बात कर सकते, न खाना खा सकते और न कोई चीज़ पी सकते, इसी तरह अगर हथेली पर बाल होते, तो कितनी परेशानी होती, यकीनन जरुरत के तहत इन्सान के जिस्म पर बाल उगाना और बाज जगहों पर न उगाना अल्लाह तआला की बेमिसाल कुदरत की निशानी है,
खुद अल्लाह तआला फर्माता है।

हमने इन्सान को बहुत ही खूबसूरत सांचे में ढाल कर पैदा किया है।
[ सूरह तीन: ४ ]


3. एक फ़र्ज़ के बारे में

नमाज़ के छेड़ने पर वईद

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया :
नमाज़ का छोड़ना आदमी को कुफ्र से मिला देता है।
[ मुस्लिम: २४६ अन जाबिर (र.अ) ]

एक दूसरी हदीस में आप ने फ़र्माया :
ईमान और कुफ्र के दर्मियान नमाज़ छोड़ने का फ़र्क है।”
[ इब्ने माजाह : १०७८ ]


4. एक सुन्नत के बारे में

तीन सांस में पानी पीना

हजरत अनस (र.अ) (पानी पीने के वक़्त) दो या तीन सांस लेते
और फरमाते के रसूलुल्लाह (ﷺ) भी तीन मर्तबा सांस ले तेथे।

[ बुखारी ०६३१ ]


5. एक अहेम अमल की फजीलत

बीमार की इयादत का सवाब

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“जब कोई मुसलमान अच्छी तरह वुजू कर के सवाब की उम्मीद से अपने बीमार भाई को देखने जाता है, तो उस शख्स और दोजख के दर्मियान ७० बरस की दूरी कर दी जाती है।”

[ अबू दाऊद ३०९७. अन अनस (र.अ) ]


6. एक गुनाह के बारे में

हज फर्ज़ होने के बावजूद न करने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया :

“जिस आदमी के पास सवारी और खर्चा इतना हो,
के वह आराम से बैतुल्लाह तक पहुँच सकता हो, फिर भी हज न करे, तो कोई फ़र्क नहीं है के वह यहूदी हो कर या फिर नसरानी हो कर मरे।”

[ तिर्मिजी ८१२. अन अली बिन अबी तालिब (र.अ) ]


7. दुनिया के बारे में

दुनिया आखिरत का जरिया है

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“दुनिया बहुत ही अच्छा घर है उस शख्स के लिए, जो उस को आखिरत का जरिया बनाए और अल्लाह तआला को उस (के जरिये) राजी कर ले और बहुत ही बुरा (घर) है उस शख्स के लिए जिस को आखिरत के कामों से रोक दे और अल्लाह तआला को नाराज़ कर दे।”

[ मुस्तदरक ८७ ]


8. आखिरत के बारे में

दोज़खी की चीख व पुकार

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

“जो लोग बदबख्त हैं, वह दोजख में होंगे उस में उन की चीख व पुकार होती रहेगी।”

[ सूरह हूद १०६ ]


9. तिब्बे नब्बीसे इलाज

तीन चीज़ों में शिफा है

हजरत इब्ने अब्बास (र.अ) बयान करते हैं के रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :
शिफा तीन चीजों में है :
शहद पीने में, पछना लगाने में और आग से दागने में
(मगर रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया) में अपनी ! उम्मत को दागने से मना करता हुँ
लिहाजा दाग कर इलाज करने से बचना चाहिए।
[ बुखारी ७६८० ]


10. कुरआन की नसीहत

अल्लाह ही की इबादत करो जो सारे आलम का रब है

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“ऐ लोगो! उस रब की इबादत करते रहो, जिसने तुम्हें और तुमसे पहले लोगों को पैदा किया, ताके तुम परहेजगार बन जाओ।”

[ सूरह बकराह: ३७८ ]


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