2 Rabi-ul-Awal | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

2 Rabi-ul-Awal | Sirf Panch Minute ka Madarsa

1. इस्लामी तारीख

हज़रत याह्या (अ.स)

हज़रत याहया (अलैहि सलाम) हज़रत ज़करिया (अ.स) के फ़रज़न्द और अल्लाह तआला के नबी थे। वह नेक लोगों के सरदार और जुहद व तक़वा में बेमिसाल थे।

अल्लाह तआलाने बचपन से ही इल्म हिकमत से नवाज़ा था। उन्होंने शादी नहीं की थी, मगर उसके बावजूद उनके दिल में गुनाह का ख़्याल भी पैदा नहीं हुआ, वह अल्लाह तआला के ख़ौफ़ से बहुत रोया करते थे। अल्लाह तआला ने उन को और उनकी क़ौम को सिर्फ अपनी इबादत व परस्तिश, नमाज व रोज़े की पाबंदी और सदक़ा ख़ैरात करने और कसरत से ज़िक्र करने का हुक्म दिया था।

चुनांचे उन्होंने अपनी क़ौम को बैतुल मुक़द्दस में जमा कर के अल्लाह के इस पैग़ाम को सुनाया। उन की ज़िन्दगी का अहम काम हज़रत ईसा (अ.स) की आमद की बशारत देना और रुश्द व  हिदायत के लिये राह हमवार करना था, जब उन्होंने दावत व तब्लीग़ का काम शुरू किया और अपने बाद हज़रत ईसा (अ.स) के आने की ख़ुशख़बरी सुनाई, तो उन की बढ़ती हुई मकबूलियत यहूदी क़ौम को बरदाश्त न हो सकी और हुज्जत बाज़ी कर के इस अज़ीम पैग़म्बर को शहीद कर डाला और अपने ही हाथों अपनी दुनिया व आख़िरत को बरबाद कर लिया।

📕 इस्लामी तारीख


2. हुजूर (ﷺ) का मुअजिज़ा

थोड़ी सी खजूर में बरकत

हज़रत नोमान बिन बशीर (अ.स) की बहन बयान करती हैं के, खन्दक की खुदाई के मौक़े पर मेरी वालिदा अमरा बिन्ते रवाहा ने मुझे बुलाया और मेरे दामन में एक लब (दोनों हथेली) भर कर खजूर दी और फ़रमाया “यह अपने वालिद और मामू अब्दुल्लाह बिन रवाहा को दे आओ, चुनान्चे मैं चली, वहाँ पहुँच कर अपने वालिद और मामू को तलाश करने लगी, इतने में रसूलुल्लाह (ﷺ) ने मुझे देख लिया, तो फ़रमाया ऐ बेटी इधर आओ ! मैं आप (ﷺ) के पास पहुँची, तो आप ने पूछा यह क्या है? मैंने कहा यह थोड़ी सी खजूर है मेरी वालिदा ने मेरे वालिद और मेरे मामू के वास्ते भेजी है।

तो हुजूर (ﷺ) ने फ़रमाया मेरे पास लाओ, मैंने सारी खजूर हुजूर की हथेली मुबारक में रख दी और फिर एक कपड़ा बिछवाकर उस पर बिखेर दी और एक आदमी को फ़रमाया के आवाज़ लगाओ! चुनान्चे इस आवाज़ पर सब लोग जमा हो गए और खाना शुरू किया और खजूर बढ़ती गई हत्ता के सब लोगों ने पेट भरकर खाई फिर भी इतना ज़्यादा बच गई के कपड़े पर से खजूर ज़मीन पर गिर रहीं थीं |

📕 हुजूर (ﷺ) का मुअजिजा
📕 दलाइलुन्नुबवह लिल्असफहानी:495


3. एक फर्ज के बारे में

हज की फ़रज़ियत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया :

“ऐ लोगो ! तुम पर हज फर्ज़ कर दिया गया है, लिहाजा उस को अदा करो।”

📕 मुस्लिम: ३२५७


4. एक सुन्नत के बारे में

कर्जो और ग़मों से नजात की दुआ

रसूलल्लाह (ﷺ) ने कर्ज़ों और ग़मों से छुटकारे के लिये सुबह व शाम यह दुआ पढ़ने के लिये फर्माया :

"Allahumma inni a’udhu bika minal-hammi wal hazan, wa a’udhu bika minal-‘ajzi wal-kasal wa a’udhu bika minal-jubni wal-bukhul wa a’udhu bika min ghalabatid-dayn wa qahrir-rijal."

तर्जुमा: ए अल्लाह मैं पनाह चाहता हु रंज और ग़म से, और पनाह चाहता हूँ आजज़ी और कुसली (सुस्ती) से और पनाह चाहता हूँ बुख़ल और बुज़दिली से और पनाह चाहता हु कसरत ए क़र्ज़ से और लोगों के ग़लबा पाने से।

📕 अबू दाऊद : १५५५


5. एक अहेम अमल की फजीलत

तहज्जुद की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

”जब कोई आदमी रात को अपनी बीवी को बेदार करता है और अगर उस पर नींद का ग़लबा हो, तो उसके चेहरे पर पानी छिडक कर उठाता है और फिर दोनों अपने घर में खड़े होकर रात का कुछ हिस्सा अल्लाह की याद में गुज़रते हैं तो उन दोनों की मग़फिरत कर दी जाती है।”

📕 तबरानी कबीर:3370, अन अबी मालिक (र.अ)


6. एक गुनाह के बारे में

जमीन में फसाद फैलाने का गुनाह

क़ुरान में अल्लाह तआला फ़रमाता है:

"बिलाशुबाह लोग जो अल्लाह से पक्का अहद करने के बाद तोड़ डालते हैं और उन रिश्ते नातों को भी तोड़ डालते हैं जिन को अल्लाह ने जोड़े रखने का हुक़्म दिया है और ज़मीन में फसाद फैलाते फिरते हैं, तो ऐसे लोग बड़े ख़सारे (नुकसान उठाने) वाले हैं।"

📕 सूरह बकरह 2:27


7. दुनिया के बारे में

सिर्फ दुनिया मांगने वाले को आख़िरत में कुछ नहीं मिलेगा

क़ुरान में अल्लाह तआला फ़रमाता है:

"लोगों में से बाज़ ऐसे भी हैं जो कहते हैं, के ऐ हमारे परवरदिगार ! हम को (जो कुछ देना हो) दुनिया में ही दे दीजिये (तो उन को जो कुछ मिलना होगा वह दुनिया ही में मिल जाएगा) और ऐसे शख़्स को आख़िरत में कुछ न मिलेगा।"

📕 सूरह बकरह: 200


8. आख़िरत के बारे में

जन्नती का ताज

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

"अहले जन्नत के सर पर ऐसे ताज होंगे, जिन का अदना से अदना मोती भी मशरिक व मग़रिब के दर्मियान की चीज़ों को रौशन कर देगा।"

📕 तिर्मिजी:2562, अन अबी सईद खुदरी (र.अ)


9. तिब्बे नबवी से इलाज

क़लौंजी (शोनीज़) में हर बीमारी से शिफ़ा

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

"तुम इस कलौंजी (मंगरैला) को इस्तेमाल करो, क्योंकि इस में मौत के अलावा हर बीमारी से शिफ़ा मौजूद है।"

📕 बुखारी: 5687, अन आयशा (र.अ)

एक और रिवायत में आप (ﷺ) ने फ़रमाया :

"बीमारियों में मौत के सिवा ऐसी कोई बीमारी नहीं, जिस के लिये कलौंजी में शिफा नहो।"

📕 मुस्लिम ५७६८


10. क़ुरान की नसीहत

तुम शैतान के नक्शे कदम पर न चलो

कुरआन में अल्लाह तआला फर्रमाता है :

"ऐ ईमान वालो तुम शैतान के नक्शे कदम पर न चलो और जो शैतान के नक्शे कदम पर चलेगा तो शैतान तो बेहयाई और बुरी बातों का हुक्म करता है।"

📕 सूरह नूर: २१

इंशा अल्लाहुल अजीज़ ! पांच मिनिट मदरसा सीरीज की अगली पोस्ट कल सुबह ८ बजे होगी।

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