सिर्फ पाँच मिनट का मदरसा

19 Jamadi-ul-Akhir | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

19 Jamadi-ul-Akhir | Sirf Panch Minute ka Madarsa

1. इस्लामी तारीख

दीन के मुकम्मल होने का एलान

रसूलुल्लाह (ﷺ) पर मैदाने अरफात में जुमा के दिन अस्र के बाद आख़री हज के मौके पर एक लाख से जाइद सहाब-ए-किराम के दर्मियान कुरआन की आयत नाज़िल हुई, वही के बोझ से आप (ﷺ) की ऊँटनी बैठ गई, उस में अल्लाह तआला ने खुशखबरी देते हुए फर्माया : "आज मैं ने तुम्हारे लिये तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया और तुम पर अपनी नेअमत पूरी कर दी और हमेशा के लिये तुम्हारे लिये दीने इस्लाम को पसन्द कर लिया।" 

इस आयत में एलान कर दिया गया के इस्लाम ही एक ऐसा दिन (मजहब) है, जो कयामत तक आने वाली नस्ले इन्सानी की हिदायत और रहबरी और दुनिया व आखिरत में कामयाबी की जमानत दे सकता है, इस के अलावा दुनिया का कोई मजहब इन्सानों की नजात का जरिया और अल्लाह के यहाँ कबूलियत व कामयाबी का मेयार नहीं बन सकता।

इस लिये अब कयामत तक किसी नबी या रसूल और नई किताब व शरीअत की बिल्कुल जरूरत नहीं, इस्लाम आख़री दीन और हुजूर (ﷺ) आखरी रसूल हैं, आप के बाद कोई नबी नहीं आएगा। 

📕 इस्लामी तारीख

To be Continued ...


2. अल्लाह की कुदरत

दाँतों की बनावट में अल्लाह की क़ुदरत

दाँतों की बनावट पर गौर कीजिये के अल्लाह तआला ने ३२ टुकड़ों को कैसी हसीन व खूबसूरत लड़ी में पिरोया है और उस की जड़ों को नर्म हड्डी में किस खूबी के साथ पेवस्त किया है, यह दाँत एक तरफ जहाँ चेहरे की हुस्न व जीनत हैं।

वहीं उन से हम चबाने, काटने, पीसने और तोड़ने का अहम काम भी कर लेते हैं और अल्लाह की अजीब कुदरत के उन को बत्तीस टुकड़ों में बनाया, एक ही सालिम हड्डी में उन को नहीं ढाला, वरना मुंह में बड़ी तकलीफ होती, इसी तरह अगर एक दाँत में कोई खराबी होती है, तो बाकी दाँतों से काम लिया जा सकता है, एक सालिम हड्डी होने की सूरत में यह मुमकिन न था।

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“खुद तुम्हारी ज़ात में भी (अल्लाह की कुदरत की) निशानियाँ हैं, तो क्या तुम देखते नहीं हो?” [ सूरह जारियात : २१ ]

📕 अल्लाह की कुदरत


3. एक फर्ज के बारे में

अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म देना

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है:

"आप अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म करते रहो और खुद भी नमाज़ के पाबन्द रहिये, हम आपसे रोजी तलब नहीं करते, रोजी तो आप को हम देंगे आर अच्छा अंजाम तो परहेजगारों का है।"

📕 सूरह ताहा: १३२


4. एक सुन्नत के बारे में

रुख्सत के वक़्त मुसाफा करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) जब किसी को रुख्सत फर्माते, तो उस का हाथ अपने हाथ में ले लेते और उस वक़्त तक (उसका हाथ) न छोड़ते, जब तक के वह आप के हाथ को खुद न छोड़ दे।

📕 तिर्मिजी : ३४४२, अन इब्ने उमर (र.अ)


5. एक अहेम अमल की फजीलत

जन्नत का मुस्तहिक

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

"जो आदमी इस हाल में मर जाए के वह तकब्बुर, खयानत और कर्ज से बरी हो, तो जन्नत में दाखिल होगा।"

📕 तिर्मिज़ी : १५७२


6. एक गुनाह के बारे में

सामान ऐब बताए बगैर फरोख्त करने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

"मुसलमान मुसलमान का भाई है और किसी मुसलमान के लिये अपने भाई से ऐब वाले सामान को ऐब बयान किए बगैर फरोख्त करना जाइज नहीं।"

📕 इब्ने माजा : २२४६, अन उकबा बिन आमिर (र.अ)


7. दुनिया के बारे में

दुनिया से बेरग़बती पैदा करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:

"मौत का (जिक्र) दुनिया से बेगरगबती करने और आखिरत की तलब के लिये काफी है।"

📕 शोअबुल ईमान: १०१५९


8. आख़िरत के बारे में

अहले जन्नत का इनाम : उस दिन बहुत से चेहरे तर व ताजा होंगे

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता : 

"उस दिन बहुत से चेहरे तर व ताजा होंगे, अपने (नेक) आमाल की वजह से खुश होंगे, ऊँचे ऊँचे बागों में होंगे। वह उन बागों में कोई बेहूदा बात नहीं सुनेंगे। उनमें चश्मे बह रहे होंगे।"

📕 सूरह ग़ाशिया: ८ ता १२


9. तिब्बे नबवी से इलाज

तलबीना से इलाज

हजरत आयशा (र.अ) बीमार के लिये तलबीना तय्यार करने का हुकम देती थीं और फर्माती थीं के मैंने हुजूर (ﷺ) को फ़र्माते हुए सुना के:

"तलबीना बीमार के दिल को सुकून पहुँचाता है और रंज व ग़म को दूर करता है।”

📕 बुखारी: ५६८९

फायदा: जौ (बरली) को कट कर दूध में पकाने के बाद मिठास के लिए इस में शहद डाला जाता है; इस को तलबीना कहते हैं।


10. कुरआन की नसीहत

अल्लाह तआला को तुम्हारे सब आमाल की खबर है

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

"ऐ ईमान वालो ! अल्लाह से डरते रहो और हर शख्स को इस बात पर गौर करना चाहिये के उस ने कल (आखिरत) के लिये क्या आगे भेजा है और अल्लाह से डरते रहो और अल्लाह तआला को तुम्हारे सब आमाल की खबर है।"

📕 सूरह हश्र १८

[icon name=”info” prefix=”fas”] इंशा अल्लाहुल अजीज़ ! पांच मिनिट मदरसा सीरीज की अगली पोस्ट कल सुबह ८ बजे होगी।

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