16 जमादी-उल-अव्वल | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

(1). ग़ज़व-ए-उहुद में सहाबा-ए-किराम की बेमिसाल क़ुरबानी, (2). हाथ से ख़ुश्बू निकलना, (3). मजदूर को पूरी मजदूरी देना, (4). बदअख़्लाक़ी से बचने की दुआ, (5). खुशू व खुजू से नमाज़ अदा करना, (6). यतीमों का माल खाने का गुनाह, (7). नाफ़र्मानों से नेअमतें छीन ली जाती हैं, (8). अहले ईमान और क़यामत का दिन, (9). कद्दू (दूधी) से इलाज, (10). पडोसी का इकराम किया करो।

Sirf Paanch Minute ka Madrasa in Hindi

Sirf 5 Minute Ka Madarsa (Hindi Book)

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1. इस्लामी तारीख

ग़ज़व-ए-उहुद में सहाबा-ए-किराम की बेमिसाल क़ुरबानी

गजवा-ए-उहुद में हुजूर (ﷺ) के सहाबा ने जिस वालिहाना मुहब्बत व फिदाकारी का मुजाहरा किया उस का तसव्वुर भी रहती दुनिया तक आलमे इस्लाम को रूहानी जज़्बे से माला माल करता रहेगा।

जब मुश्रिकीन ने आप (ﷺ) का घेराव कर लिया तो फ़रमाया : मुझ पर कौन जान कुरबान करता है ?

जियाद बिन सकन (र.अ) चदं अन्सारियों के साथ आगे बढ़े और यके बाद दीगरे सातों ने आप (ﷺ) की हिफाजत में अपने आप को कुर्बान कर दिया।

अब्दुल्लाह बिन कमीआ ने जब तलवार का वार किया तो उम्मे अम्मारा हुजूर (ﷺ) के सामने आ गईं और उस के वार को अपने कन्धे पर रोक लिया।

हज़रत अबू दुजाना (र.अ) ढाल बन कर खड़े हो गए, यहाँ तक के उन की पीठ तीरों से छलनी हो गई।

हज़रत तलहा (र.अ) ने दुश्मन के तीर और तलवार हाथों पर रोकी, जिस की वजह से उन का एक हाथ कट कर गिर गया।

दुश्मन की एक जमात हमले के लिये आगे बढ़ी तो तन्हा हज़रत अली (ﷺ) ने उन का रुख फेर दिया।

ग़र्ज सहाब-ए-किराम (र.अ) की हुजूर (ﷺ) से वफादारी और जाँनिसारी ने अपनी शिकस्त को फतह में तबदील कर दिया।

To be Continued …


2. हुजूर (ﷺ) का मुअजीजा

हाथ से ख़ुश्बू निकलना

۞ हदीस: हज़रत उम्मे सलमा (र.अ) फर्माती हैं के,

जिस दिन रसूलुल्लाह (ﷺ) की वफात हुई, उस दिन मैंने हुजूर (ﷺ) के सीन-ए-मुबारक पर हाथ रखा था,

उस के बाद एक जमाना गुजर गया, मैं उस हाथ से खाती रही और उस को धोती रही,

लेकिन मेरे उस हाथ से मुश्क की खुश्बू ख़त्म नहीं हुई।

📕 बैहकी की दलाइलिन्नुबुव्वह : ३१५१


3. एक फर्ज के बारे में

4. एक सुन्नत के बारे में

बदअख़्लाक़ी से बचने की दुआ

۞ हदीस: रसूलुल्लाह (ﷺ) यह दुआ फरमाते थे :

( Allahumma Inni A’udhu Bika Min Munkaratil-Akhlaqi Wal-Amali Wal-Ahwa )

तर्जुमा : ऐ अल्लाह ! मै बुरे अख्लाक और ख्वाहिशात से तेरी पनाह चाहता हु।

📕 तिर्मिज़ी : ३५९१


5. एक अहेम अमल की फजीलत

खुशू व खुजू से नमाज़ अदा करना

۞ हदीस: रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया :

“जो कोई खूब अच्छी तरह वुजू करे और दो रकात नमाज खुशू खुजू के साथ पड़े

तो उस के लिये जन्नत वाजिब हो गई।”

📕 अबूदाऊद :९०६


6. एक गुनाह के बारे में

7. दुनिया के बारे में

नाफ़र्मानों से नेअमतें छीन ली जाती हैं

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है :

“वह नाफरमान लोग कितने ही बाग, चश्मे, खेतियाँ और उम्दा मकानात

और आराम के सामान जिन में वह मजे किया करते थे, (सब) छोड़ गए, हम ने इसी तरह किया

और उन सब चीज़ों का वारिस एक दूसरी कौम को बना दिया।

फिर उन लोगों पर न तो आसमान रोया और न ही जमीन

और नही उन को मोहलत दी गई।”

📕 सूर-ए-दुःखान: २५ ता २९


8. आख़िरत के बारे में

9. तिब्बे नबवी से इलाज

कद्दू (दूधी) से इलाज

۞ हदीस: हज़रत अनस (र.अ) फर्माते हैं के,

“मैंने खाने के दौरान रसूलुल्लाह (ﷺ) को देखा के प्याले के चारों तरफ से कद्दू तलाश कर के खा रहे थे,

उसी रोज़ से मेरे दिल में कद्दु की राबत पैदा हो गई ।”


फायदा : अतिब्बा ने इस के बे शुमार फवायद लिखे हैं और अगर बही के साथ पका कर इस्तेमाल किया जाए तो
बदन को उम्दा ग़िज़ाइयत बख्शता है, गरम मिजाज और बुख़ार जदा लोगों के लिये यह गैर मामूली तौर पर नफा बख्श है।

📕 बुख़ारी : ५३७९


10. क़ुरान की नसीहत

पडोसी का इकराम किया करो

۞ हदीस: रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया :

“जो अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान रखता हो उसे अपने पडोसी का इकराम करना चाहिये।

सहाबा ने पुछा: या रसुलल्लाह (ﷺ) पड़ोसी का क्या हक़ है ?

फरमाया : अगर वह तुम से कुछ माँगे तो उस को दे दिया करो।”

📕 तरगीब वतरहीय : ३६५७


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