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इस्लाम का परिचय

क्यों हो जाते है लोग इतने बेहरहम ? क्या इन्हें खुदा का खौफ नहीं है ?

सदियों से हम इन्सानो पर हो रहे ज़ुल्म की दास्ताँ सुनते आ रहे है, ज़ालिम इस हद्द तक क़त्ले आम करते है मानो वो इन्सान ही न हो, वो जिस किसी भी रब की इबादत करते हो उसे उसका खौफ ही न हो,.. जैसा की मौजूदा दौर में सीरिया में जो कुछ क़त्ले आम हो रहा है वो किसी हैवानियत से कम नहीं, बेकसूर मर्द और औरतो को बेवजह गोलियों से भुन दिया जाता है, यहाँ तक की मासूम…
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इस्लाम क्या है और मुस्लिम किसे कहते है ? (संशित परिचय)

#_इस्लाम_क्या_है_? "..सम्पूर्ण प्रशंशा उस एक सत्य इश्वर (अल्लाह) के लिए है जो सारे संसार का रचियेता और पालनकर्ता है, और इश्वर की शांति और कृपा हो उसके अंतिम संदेष्ठा मुहम्मद सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम पर|.." इस्लाम धर्म एक ऐसा धर्म है जिसके…

तौहीद – इस्लाम की पहली अनिर्वाय आस्था

इस्लाम की सबसे पहली जो आस्था है तौहिद इसको हम आपके सामने रखते है जो मानवता को बताने के लिए इश्वर (अल्लाह) ने हर समय, हर समुदाय, हर जाती के अंदर प्रेषित (नबी, इश्दुत) भेजे ताकि मानवों को बता दे और उनका रिश्ता श्रुष्टि के रचियेता एक इश्वर से…

रिसालत – इस्लाम की दूसरी अनिर्वाय आस्था

*रिसालत का अर्थ होता है के जब अल्लाह ने पृथ्वी पर मानवो को भेजा तो मानव क्या करे और क्या ना करे , कैसे जीवन व्यक्त करे इसके मार्गदर्शन के लिए इश्वर(अल्लाह) मानवो में से एक मानव को चुन लेता था फिर वो अपनी वाणी उस तक भेजता था और फिर उन्हें…

आखिरत – इस्लाम की तीसरी अनिर्वाय आस्था

आखिरत का अर्थ होता है – परलोकवाद (अंतिम प्रलय या मृत्यु के पच्छात जीवन पर विश्वास): *जैसे के: हम इस जीवन से पहले मृत्य थे, इश्वर(अल्लाह) ने हमे पृथ्वी पर भेजा (जीवन दिया).. तो एक मृत्यु और उसके बाद ये जीवन एक हुआ ,. इस जीवन के बाद फिर एक…