"the best of peoples, evolved for mankind" (Al-Quran 3:110)
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सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम

नज़र का फ़ित्ना ….

नज़र एक ऐसा फ़ित्ना हैं जिस पर कोई रोक नही जब तक कोई इन्सान खुद अपनी नज़र को बुराई से न फ़ेर ले| अमूमन नज़र के फ़ित्ने से आज का इन्सान महफ़ूज़ नही क्योकि टीवी, अखबार, मिडिया के ज़रीये जिस तरह इन्सान के जज़्बात को जिस तरह भड़काने का मौका दिया जा रहा…