Ilm-Ki-Ahmiyat-14

Ilm Ki Ahmiyat: Part-14

# Al’khwarizmi: Koun Nahi Pahchanta Inhe.. Inke Naam Se “Algorithm” .. Jo Bhi Science Padha Ho, Aur Bilkhusus Science Jo Technology Ka Ho .. Log Iss Naam Ko Behtar Jante Hai.. Yeh “Algorithm” Al’khwarizmi Ki Hi Deyn Hai..
Inhone Kaha Ke Kisi Bhi Pechida Masle Ko Hal Karne Ke Liye Steps Bandhna Chahiye,.. Uski Tarkib Yeh Hona Chahiye Steps Ki Shakl Me.. Aur Inhi Ki Steps Ko Inhi Ka Naam Diya Gaya.. Jise Hum “Algorithm” Naam Se Jante… – @[156344474474186:]

Aur Inhone “Algebra” Ki Buniyad Daali.. Algebra Jo Subject Hota Hai Mathematics Ka Jo 4th Standard Se Shuru Hota Hai ,..
Unhone Ek Kitab Likhi Jo Mushkil Cheeze Hoti Hai Samjhne Ke Liye Unhe Hal Karne Ke Liye!

* Misaal Ke Taur Par 3x + 3y = 6 ,.. Ab Ye Kaisa Hal Kiya Jaye.. Isiliye Ke Nichey Wala Equation Upar Wale Jaisa Nahi Hota ..
Tou Inhone Kaha “Al Jabr Wal Muqabla” Yaani Jabardasti Laa Kar Uske Muqable Ko Khade Kardo ,…
Aur Fir Unn Dono Upar Wale Aur Nichey Wale Ko 3 Se Jarab Dedo Yaani Dono Ko Jarab Dene Ke Baad Ek Cut Ho Jata Hai Sum Fir ..
– Tou Kaha “Al Jabr Wal Muqabla” Yaani Jabardasti Lao Khada Kardo Uske Muqable Me, Isi Falsafe Par Ek Kitab Likhi Aur Pura Uska Hal Diya, Jis’se Wo Pura Fun Algebra Kehlaya.. Jiska Mana Hota Hai Jabardasti Lakar Khada Kardo Muqable Me Isliye Ke Ab Pechida Masla Hal Karna Hai ,…

Tou Dekhiye Ye Musalmano Ki Deyn Hai, Aur Pata Nahi Aise Itni Saari Cheeze Ke Humare Liye Ginwaana Mushkil Hai,
Khud Aaj Ki Jo English Hai Uski Gawahi Deti Hai Jo Musalmano Ke Ijadat(Invention) Hai, Unke Alfaz Batate Hai ,…
Jaise “Zeenat” Sitare Ko Kahte Hai Jo Arbi Lafz Hai,..
Shugar Hai, Sukar Hai, Cotton Hai, Lemon Hai Aur Anginat Aisi Cheeze Milengi Jo Musalmano Ki Deyn Hai Insaniyat Ke Liye ..

Lekin Aaj Hum Tamam Ne Iss Cheez Ko Yeh Keh-Kar Chorr Diya Ke Yeh Tou Asli Uloom Hai ,…
Jabki Yeh Scientist Badey-Badey Imam Bhi They Apne Qoum(Kabile, Maslak) Ke..
Aur Deen Ki Samjh Bhi Rakhte They Aur Saath Me Badey-Badey Scientist Bhi Hai.. Koi Fark Nahi Kiya Unhone Ilm Ke Andar ..

* Europe Jaha Andhere Me Rehta Tha, Waha Musalmano Ke Shehro Me Street Lights Jalti Thi ,..
Yeh Unke Inkashafat, Yeh Unke Iajadad They ,..

• Fir Aaj Hum Itney Pichey Kyu Reh Gaye ?
Yeh Sawal Bhi Aata Hoga Na Jehan Me ,.. Hum Uski Vajah Rakh Detey Hai Aapke Samney ,..
Isayiyat Ne, Christianity Ne Europe Ne Jab Dekha Ke Unka Rehnuma Jo Pope Hai Agar Uski Baat Hum Maaney Tou Inkashafat Nahi Kar Sakte! Aur Bible(Injeel) Par Jabtak Chale Tou Bible Hukm Nahi Deti Inkashafat Ka. Isliye Ke Bible Me Bohot Si Scientific Galatiya Hai ,.. Jo Insano Ne Usme Raddo Badal Kiya Uski Vajah Se …

* Tou Unhone Ye Socha Ke Bible Ko Jabtak Na Chorre Hum Duniya Me Inkashafat Nahi Kar Sakte.. Aagey Nahi Badh Sakte.. Aur Fir Bible Ko Renaissance Ke Naam Par Alag Kar Diya Apne Se ,…

* Jab Bible Ko Aur Pope Ko Hata Diya Apne Sir Se Tab Unhone Duniya Me Ijadad (Discoveries) Kar Sake..
Aur Baad Ke Musalmano Ko Bhi Laga Ke Jabtak Hum Bhi Quraano Hadees Ko Nahi Chorte Tab Tak Hum Bhi Iajdad Nahi Kar Payenge.. Lihaja Humne Bhi Qurano Hadees Ko Chorr Diya..

# Yaad Rakhiye! Unka Aur Humara Usool Mukhatlif Hai ..
Jab Tak Wo Apni Kitab Ko Thaamkar Rakhenge Wo Duniya Me Aage Nahi Badh Sakte ..
Aur Jab Hum Apni Kitab Ko Chorrenge, Hum Duniya Me Aage Nahi Badh Sakte ..

Tou Humko Bhi Laga Ke Modern Ban’na Hai, Technology Me Aagey Badhna Hai Tou Quraan Aur Hadees Ko Chorrna Hoga!
Lihaza Humne Chorr Diya! Aur Jiss Din Se Chorra Uss Din Se Duniya Me Zaleelo-Khwar Hue..

* Jabki Yaad Rakhiye Hum Jab-Tak Allah Ki Kitab Aur Rasool’Allah(Sallallahu Alaihay Wasallam) Ki Sunnat Ko Thamey Rahenge Tab Tak Duniya me Aagey Badhenge Aur Jab Chorr Denge Tab Humara Zaleelo khwar Hona Lazim Hai.. Aur Iski Misaale Bhari Padi Hai Tareekh Me ,..

* Aur Jo Log Deen Jantey Hai Wohi Tou Sahi Inkhshafat Karenge!!!
Jo Log Apne Rab Ki Marifat Rakhenge, Allah Unhi Se Fir Kaam Bhi Leta Hai..
Tou Aaj Hum Duniyawi Uloom Me Pichey Isliye Hai Kyunki Humne Quraan-o-Hadees Ko Chorr Diya ,..

# Lihaja Hume Chahiye Ke Duniyawi IlM Bhi Khub Haasil Karey.. Aur Sharayi Ilm Tou Haasil Karna Hi Hai ,..

♥ In’sha’Allah !! Agli Post me Hum Ek NonMuslim Mas’hoor Aur Maaruf Shakhsiyat Ke Bayan Ka Zikr Karenge Jo UnhoNe Aise Haalato me Diya Jab Ke Islam Ka Naam Leney Se Bhi Log KhoufJada Hua Karte They …

☆ इल्म की अहमियत: पार्ट-१४
# अल’ख्वारिज़्मी(Al’khwarizmi) : कौन नहीं पहचानता इन्हे ? इनके नाम से “एल्गोरिथम” जो भी साइंस पढ़ा हो ,.. और बिलखुसुस जो टेक्नोलॉजी का हो वो लोग इस नाम को बेहतर जानते है यह “एल्गोरिथम” अल-ख्वारिज़्मी की ही देन है ,..

इन्होने कहा की किसी भी पेशीदा मसले को हल करना के लिए स्टेप्स (Steps) बांधना चाहिए! उसकी तरकीब ये होनी चाहिए स्टेप्स की शक्ल में और इन्ही की स्टेप्स को इन्ही का नाम दिया गया जिसे हम “एल्गोरिथम” के नाम से जानते है ,.. – @[156344474474186:]
और इन्होने “अलजेब्रा” की बुनियाद डाली,.. अलजेब्रा जो सब्जेक्ट होता है मैथमेटिक्स का जो चौथी जमात से शुरू होता है
उन्होंने एक किताब लिखी जो मुश्किल चीज़े होती है समझने के लिए उन्हें हल करने के लिए!
मिसाल के तौर पर ३X + ३Y = ६ ,.. अब ये कैसे हल किया जाए इसलिए की नीचे वाला इक़ुएशन ऊपर वाले जैसा नहीं होता ,..
तो इन्होने कहा “अल जब्र वल मुक़ाबला” यानी जबरदस्ती ला कर उसके मुकाबले को खड़े करदो
और फिर उन दोनों ऊपर वाले और निचे वाले को ३ से जरब दे दो यानी दोनों को जरब देने के बाद एक कट हो जाता है सम फिर
तो कहा “अल जब्र वल मुक़ाबला” यानी जबरदस्ती लाओ खड़ा करदो उसके मुकाबले में, इसी फलसफे पर एक किताब लिखी और पूरा उसका हल दिया, जिससे वो पूरा फन “अलजेब्रा” कहलाया जिसका माना होता है खड़ा करदो मुकाबले में इसलिए के अब पेचीदा मसला हल करना है …

तो देखिये ये मुसलमानो की देन है, और पता नहीं ऐसे इतनी सारी चीज़े है की हमारे लिए गिनवाना मुश्किल है ,..
खुद आज की जो इंग्लिश है उसकी गवाही देती है जो मुसलमानो की इजादात है, उनके अल्फ़ाज़ बताते है,
* जैसे “ज़ीनत” सितारे को कहते है जो अरबी लफ्ज़ है ,…
शुगर है, सुकर है, कॉटन है, लेमन है और अनगिनत ऐसी चीज़े मिलेंगी जो मुसलमानो की देन है इंसानियत के लिए ,..

लेकिन आज हम तमाम ने इस चीज़ को यह कह-कर छोड़ दिया की यह तो असली उलूम है, दुनियावी इल्म है !!!!
जबकि यह साइंटिस्ट बड़े-बड़े इमाम भी थे अपने क़ौम (कबीले, मसलक) के ,..
*और दीन की समझ भी रखते थे और साथ में बड़े-बड़े साइंटिस्ट भी है! कोई फर्क नहीं किया उन्होंने इल्म के अंदर,..

यूरोप जहाँ अँधेरे में रहता था, वहा मुसलमानो के शहरों में “स्ट्रीट लाइट्स” जलती थी ,..
यह उनके इन्क्शाफात थे! उनके इजादाद थे ,..

• फिर आज हम इतने पीछे क्यों रह गए?
यह सवाल भी आता होगा ना ज़ेहन में ? हम उसकी वजह रख देते है आपके सामने ,…
ईसाईयत ने, क्रिश्चियनिटी ने यूरोप में जब देखा की उनका रहनुमा जो पॉप है अगर उसकी बात हम माने तो इन्क्शाफात नहीं कर सकते! और बाइबिल पर जब तक चले तो बाइबिल हुक्म नहीं देती इन्क्शाफात का इसलिए की बाइबिल में बहोत सी साइंटिफिक गलतियां है जो इंसानो ने उसमे रद्दो बदल किया उसकी वजह से …
तो उन्होंने ये सोचा की बाइबिल को जब तक ना छोड़े हम दुनिया में इन्क्शाफात नहीं कर सकते, आगे नहीं बढ़ सकते
और फिर बाइबिल को रेनाइसेंस के नाम पर अलग कर दिया अपने से ,..

जब बाइबिल को और पॉप को सर से हटाया तब वो दुनिया में इजादाद कर सके ,… आगे बढ़ सके ,…
और बाद के मुसलमानो को भी लगा की जब तक हम भी क़ुरान और हदीस को नहीं छोड़ते तब तक हम भी इजादाद नहीं कर पाएंगे
लिहाज़ा हमने भी क़ुरान हदीस को छोड़ दिया ,.. सुभान’अल्लाह !!!

याद रखिये ! उनका और हमारा उसूल मुख़तलिफ़ है, उल्टा है ,…
जब तक वो अपनी किताब को थामकर रखेंगे वो दुनिया में आगे नहीं बढ़ सकते ,..
और जब हम अपनी किताब को छोड़ेंगे हम दुनिया में आगे नहीं बढ़ सकते …

* तो हमको भी लगा की मॉडर्न बनना है, टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ना है, तो क़ुरान और हदीस को छोड़ना होगा !
लिहाज़ा हमने छोड़ दिया! और जिस दिन से छोड़ा उस दिन से दुनिया में ज़लील और ख्वार हुए …

* जबकि याद रखिये हम जब-तक अल्लाह की किताब और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत को थामे रहेंगे तब तक दुनिया में आगे बढ़ेंगे और जब छोड़ देंगे तब हमारा ज़लील और ख्वार होना लाज़िम है और इसकी मिसाल भरी पड़ी है तारीख में ,..

* और जो लोग दीन जानते है वो तो सही इन्क्शाफात करेंगे !!!
जो लोग अपने रब की मारिफ़त रखेंगे, अल्लाह उन्ही से फिर काम भी लेता है ,..
तो आज हम दुनियावी उलूम में पीछे इसलिए है क्यूंकि हमने क़ुरान और हदीस को छोड़ दिया ,..
लिहाज़ा हमे चाहिए की दुनियावी इल्म भी खूब हासिल करे और शराई इल्म तो हर हाल में हासिल करना है ..

# इंशा अल्लाह !! अगली पोस्ट में हम एक नोनमुस्लिम मशहूर और मारूफ शख्सियत के बयान का ज़िक्र करेंगे जो उन्होंने ऐसे हालातो में दिया जब की इस्लाम का नाम लेने से भी लोग ख़ौफ़ज़दा हुआ करते थे ….

To Be Continue …

• इल्म की अहमियत → Parts:

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