इल्मे दीन की एहमीयत …..

» अल्लाह के नाम से शुरू जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयावान हैं.!!

अल्लाह तआला इर्शाद फ़रमाता है…
» तर्जुमा : क्या वह जिसे फ़रमांबरदारी में रात की घड़ियां गुज़रीं (1) सुजूद में और क़याम में। आख़िरत से डरता और अपने रब की रहमत की आस लगाए। क्या वह नाफ़रमानों जैसा हो जाएगा? तुम फ़रमाओ क्या बराबर हैं जानने वाले और अंजान, नसीहत तो वही मानते हैं (2) जो अक़ल वाले हैं (3)।
(पारा 23, अलज़ुमर: 9)

» तफ़सीर :
(1) इस से नमाज़े तहज्जुद की अफ़ज़लीयत मालूम हुई। यह भी मालूम हुआ कि नमाज़ में क़याम और सजदा आला दर्जा के रुकन हैं। यह भी मालूम हुआ कि नमाज़ी और परहेज़गार को रब अज़्ज़-ओ-जल से ख़ौफ़ ज़रूर चाहिए। अपनी इबादत पर नाज़ां ना हो, डरता रहे।
(शाने नुज़ूल) यह आयते करीमा हज़रते सय्यिदेना अबूबकर सिद्दीक़-ओ-हज़रत सय्यिदेना उम्र फ़ारूक़ रज़ीयल्लाहु अन्हुमा के हक़ में नाज़िल हुई। बाअज़ ने फ़रमाया कि उस्माने ग़नी के हक़ में नाज़िल हुई, जो नमाज़े तहज्जुद के बहुत पाबंद थे और उस वक़्त अपने किसी ख़ादिम को बेदार ना करते थे। सब काम अपने दस्ते मुबारक से सरअंजाम देते थे।

(2) मालूम हुआ कि आबिद से आलिमे दीन अफ़्ज़ल है, मलाइका आबिद थे और आदम अलैहिस्सलाम आलिम। आबिदों को आलिम के सामने झुकाया गया, यहां मुतल्लिक़न इरशाद हुआ कि आलिम ग़ैरे आलिम से अफ़्ज़ल है, गैरे आलिम ख़्वाह आबिद हो या ग़ैरे आबिद, बहरहाल इस से आलिम अफ़्ज़ल है। ख़्याल रहे कि आलिम से मुराद आलिमे दीन हैं। उन्हीं के फ़ज़ाइल क़ुरआन-ओ-हदीस में वारिद हुए। इसी लिए हज़रते आईशा सिद्दीक़ा रज़ी अल्लाहु तआला अन्हा तमाम अज़्वाजे मुत्तहिरात बल्कि तमाम जहाँ की बीबियों से अफ़्ज़ल हैं कि बड़ी आलिमा हैं।

(3) इस में इशारतन फ़रमाया गया कि आक़िल वही है, जो अन्बिया की तालीम से फ़ायदा उठाए, जो इलम-ओ-अक़ल हुज़ूर (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) के क़दम शरीफ़ पर ना झुकाए, वह जिहालत और बेवक़ूफ़ी है।
(तफ़्सीरे नुरुलइरफ़ान : @[156344474474186:] )

– मुफ़्ती सैफ़ुल्लाह ख़ां अस्दक़ी, चिश्ती, क़ादरी
Tahajjud

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